
पश्चिम एशिया संघर्ष के 34वें दिन ईजरायल और अमेरिका की ओर से मध्य पूर्व के सबसे ऊंचे पुल को निशाना बनाया गया। इससे ईरान की राजधानी तेहरान का पश्चिमी शहर करज से संपर्क पूरी तरह से टूट गया। फार्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती आकलन के मुताबिक, इन हमलों में कई लोग घायल हुए हैं। करज के अन्य इलाकों को भी निशाना बनाया गया है। यह पुल देश के दो सबसे ज्यादा आबादी वाले शहरों, तेहरान और करज को आपस में जोड़ता है।
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फार्स ने आगे बताया कि बी1 पुल को मध्य-पूर्व का सबसे ऊंचा पुल माना जाता है और इसका उद्घाटन इसी साल की शुरुआत में किया गया था। मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह पश्चिमी एशिया के सबसे जटिल इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स में से एक है, जिसे पूरी तरह से ईरानी तकनीक से बनाया गया है। यह पुल 1,050 मीटर लंबा है और इसके आठ हिस्से हैं। जिनमें सबसे लंबा हिस्सा 176 मीटर का है और इसमें 136 मीटर ऊंचा एक खंभा भी है।
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उद्घाटन के दौरान बताया गया था कि बी1 पुल अंतर्राष्ट्रीय आवागमन को भी आसान बनाएगा, जिससे क्षेत्रीय व्यापार और यात्रा को बढ़ावा मिलेगा। ये पुल 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर (500 बिलियन रियाल) की लागत से बनाया गया था। यह उन्नत बुनियादी ढांचे और बड़े पैमाने की इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ईरान की बढ़ते कद का परिचायक माना जाता है।
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इस ब्रिज के अलावा गुरुवार को ईरानी पाश्चर इंस्टीट्यूट पर हमला भी चर्चा में रहा। इसे विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने क्रूर और दिल दहलाने वाला अमानवीय कृत्य बताया। उन्होंने एक्स पर लिखा, "अमेरिकी-इजरायली हमलावरों ने ईरान के पाश्चर इंस्टीट्यूट पर हमला किया, जो ईरान और मध्य पूर्व का सबसे पुराना और सबसे प्रतिष्ठित सार्वजनिक स्वास्थ्य और अनुसंधान केंद्र है जिसकी स्थापना 1920 में पेरिस के पाश्चर इंस्टीट्यूट और ईरानी सरकार के बीच एक समझौते के तहत की गई थी।"
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