
ईरान से जारी जंग में लगातार चुनौतियों का सामने कर रहे अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने मंगलवार को दावा किया कि ईरान में अमेरिका 'बूट्स ऑन द ग्राउंड' के लिए तैयार है और यह संघर्ष उनकी शर्तों पर ही खत्म होगा। हेगसेथ ने यह भी कहा कि अगर संवाद से बात नहीं बनेगी तो 'बम के जरिए बातचीत' को अंजाम दिया जाएगा।
वाशिंगटन डीसी में 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का अपडेट देने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन ने आगामी योजनाओं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जज्बे और सैन्य ऑपशन को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब दिया। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान को लेकर बातचीत चल रही है और इसमें तेजी आ रही है, लेकिन साथ ही सैन्य ऑप्शन भी खुले हैं। अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका जमीनी हमला (ग्राउंड इनवेजन) भी कर सकता है। हालांकि, शायद इसकी जरूरत न पड़े।
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एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिका की रणनीति थोड़ी 'अनप्रेडिक्टेबल' यानी अनिश्चित रहने की है, ताकि दुश्मन अंदाजा न लगा सके कि अगला कदम क्या होगा? उन्होंने कहा, "आप कोई युद्ध तब तक न तो लड़ सकते हैं और न ही जीत सकते हैं, जब तक आप अपने विरोधी को यह बता दें कि आप क्या करने को तैयार हैं और क्या नहीं- जिसमें जमीनी सैनिकों की तैनाती भी शामिल है।"
हेगसेथ ने आगे कहा, "हमारा विरोधी इस समय सोच रहा है कि ऐसे 15 अलग-अलग तरीके हैं जिनसे हम जमीनी सैनिकों के साथ उन पर हमला कर सकते हैं।" उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो अमेरिका "उन विकल्पों को अमल में ला सकता है। या शायद हमें उनका इस्तेमाल करने की जरूरत ही न पड़े। शायद बातचीत से बात बन जाए। मुख्य बात यह है कि इस मामले में अप्रत्याशित बने रहें- निश्चित रूप से किसी को भी यह न पता चलने दें कि आप क्या करने को तैयार हैं और क्या नहीं।"
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ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने भी पत्रकारों से कहा कि यूएस की सेना जिन सैन्य विकल्पों की श्रृंखला को अमल में ला सकती है, वह काफी व्यापक है। उन्होंने कहा, "मैं राष्ट्रपति के निर्णय लेने के दायरे को सीमित नहीं करना चाहूंगा, लेकिन कई ऐसी बातें हैं-जिनमें सबसे अहम बात यह है, जिस पर ईरान को गौर करना चाहिए- कि हमारे सैनिक वहां मौजूद हैं और वे एक दबाव बिंदु का काम करते हैं। इसलिए मेरा मानना है कि मौजूदा हालात को ध्यान में रखते हुए उन्हें कूटनीतिक स्तर पर इस बात पर सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए।"
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वहीं, ट्रंप के नाटो पर हमलावर रवैए को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि 'मिशन तो हमारी शर्तों पर ही खत्म होगा।' राष्ट्रपति के शब्दों में कहें तो, इसे लेकर कोई शक नहीं है। जहां तक नाटो की बात है, यह फैसला राष्ट्रपति पर ही छोड़ दिया जाएगा। लेकिन मैं बस इतना कहूंगा कि बहुत कुछ स्पष्ट हो गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दुनिया को यह दिख गया है कि जब हम आजाद दुनिया की तरफ से इतने बड़े पैमाने पर कोई कोशिश करते हैं, तो हमारे सहयोगी अमेरिका के लिए क्या करने को तैयार होते हैं?
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हेगसेथ ने कहा कि उनकी मिसाइलों के रेंज में अमेरिका नहीं है। वे हमारे सहयोगियों और दूसरों तक पहुंचती हैं। फिर भी, जब हम अतिरिक्त मदद या सिर्फ बुनियादी हवाई मार्ग की अनुमति मांगते हैं, तो हमें सवालों, रुकावटों या हिचकिचाहट का सामना करना पड़ता है। फिर हेगसेथ ने अंत में ट्रंप के ट्रुथ पोस्ट का मतलब समझाते हुए कहा कि राष्ट्रपति यही इशारा कर रहे हैं कि अगर आपके पास ऐसे देश हैं जो जरूरत पड़ने पर आपके साथ खड़े होने को तैयार नहीं हैं, तो फिर आपके गठबंधन का कोई खास मतलब नहीं रह जाता है।
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