
मिडिल-ईस्ट में स्थिति सामान्य होते नजर नहीं आ रहे हैं। सीजफायर के ऐलान के बाद भी हमलों की खबरें आ रही हैं। कुवैत ने ईरान और उसके सहयोगियों पर दो सप्ताह के युद्धविराम के बावजूद बृहस्पतिवार को उसे निशाना बनाकर ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया है, वहीं सऊदी अरब ने कहा है कि हाल के हमलों से उसकी एक महत्वपूर्ण पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई है।
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सरकारी समाचार एजेंसी ‘केयूएनए’ ने कुवैत के विदेश मंत्रालय के एक बयान के हवाले से यह जानकारी दी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस्लामाबाद में शनिवार को अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर वार्ता होनी है।
हालांकि, ईरान ने इन हमलों में खुद का हाथ होने से इनकार किया है। ईरान ने इन हमलों के लिए इजरायल को दोषी ठहराया है।
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि बृहस्पतिवार रात को हुए ड्रोन हमलों में ‘‘कुवैत के कुछ महत्वपूर्ण केंद्रों को निशाना बनाया गया’’।
इस बीच, सऊदी अरब की सरकारी समाचार एजेंसी ‘सऊदी प्रेस एजेंसी’ ने एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से स्वीकार किया कि युद्ध में हुए हालिया हमले से उसकी महत्वपूर्ण ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ को नुकसान पहुंचा है।
इस पाइपलाइन से तेल लाल सागर तक जाता है और इसके मार्ग में होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं आता। ईरान ने युद्धविराम के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखा है।
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हालांकि, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ द्वारा जारी एक बयान में ईरान के अर्द्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कुवैत के दावों के बाद बृहस्पतिवार को फारस की खाड़ी से सटे देशों पर हमले शुरू करने की बात से इनकार किया।
रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा, “अगर मीडिया में छपी ये खबरें सच हैं तो निश्चित ही ये इजराइल या अमेरिका का काम है।’’
इससे पूर्व, पश्चिम एशिया में युद्धविराम प्रयासों की संभावनाओं को बढ़ावा देते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बृहस्पतिवार को कहा कि उन्होंने लेबनान के साथ ‘‘जितनी जल्दी हो सके’’ सीधी बातचीत की अनुमति दी है। इस बातचीत का उद्देश्य ईरान समर्थित हिजबुल्ला को निरस्त्र करना और दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंध स्थापित करना है।
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वर्ष 1948 में इजरायल की स्थापना के बाद से ही इजरायल और लेबनान तकनीकी रूप से युद्ध की स्थिति में हैं। अमेरिका के साथ युद्धविराम समझौते के बाद नेतन्याहू ने बाद में इस बात पर जोर दिया कि इजरायल और लेबनान के बीच कोई युद्धविराम नहीं हुआ है। उन्होंने एक वीडियो बयान में कहा कि उत्तरी इजरायल में सुरक्षा बहाल होने तक इजरायल हिजबुल्ला पर हमले जारी रखेगा।
लेबनान की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
हालांकि नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इजराइल-लेबनान वार्ता अगले सप्ताह वाशिंगटन में शुरू होने की उम्मीद है।
हालांकि बृहस्पतिवार शाम को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम के प्रभावी होने को लेकर आशंका जताते हुए अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था, ‘‘ईरान बहुत खराब काम कर रहा है। ईरान तेल को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने देने के संदर्भ में बहुत खराब काम कर रहा है। कुछ लोग इसे शर्मनाक कहेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे बीच ऐसा कोई समझौता नहीं है।’’
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ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान समझौते का पालन नहीं करता है तो अमेरिकी सेना पहले से भी ज्यादा कठोर कार्रवाई करेगी।
बृहस्पतिवार को ट्रंप ने एक बार फिर उन खबरों पर चिंता जताई कि ईरान की सेना जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे टैंकरों से शुल्क वसूल रही है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘‘ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए और अगर वे ऐसा कर रहे हैं तो इसे अभी बंद कर दें!’’
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने ‘टेलीग्राम’ पर एक संदेश में कहा कि ईरान का युद्धविराम स्वीकार करने का निर्णय ‘‘कमजोरी का संकेत नहीं है, बल्कि ईरान की गौरवशाली विजयगाथा को मजबूत करने का एक तरीका है’’।
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अमेरिका या इजरायल द्वारा ईरान को निशाना बनाकर किए गए हमलों की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।
ट्रंप ने बृहस्पतिवार को कहा कि उन्होंने नेतन्याहू से लेबनान में हमलों को कम करने का अनुरोध किया है।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि बुधवार को इजराइल द्वारा मध्य बेरूत और लेबनान के अन्य क्षेत्रों पर किए गए हमलों में 300 से अधिक लोग मारे गए और 1,100 से अधिक घायल हुए। इजराइल का कहना है कि ये हमले हिजबुल्ला को निशाना बनाकर किए गए थे जो तेहरान के समर्थन में युद्ध में शामिल हुआ था।
बृहस्पतिवार को इजराइल ने कहा कि उसने हिजबुल्ला नेता नईम कासिम के एक सहयोगी अली यूसुफ हर्शी को मार गिराया। हिजबुल्ला ने इस मामले पर टिप्पणी के अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया।
पीटीआई के इनपुट के साथ
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