
ईरान और अमेरिका में दूसरे दौर की संभावित वार्ता से पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने चेतावनी दी है कि अमेरिका की अपनी मर्जी थोपने या ईरान को सरेंडर करने के लिए मजबूर करने की कोई भी कोशिश नाकाम होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि उनका देश जंग नहीं बल्कि बातचीत चाहता है।
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आईआरएनए न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरानी राष्ट्रपति ने ईरान में स्कूलों और कॉलेजों पर इजरायल और अमेरिका के हमलों को लेकर कहा, “अंतरराष्ट्रीय कानून और इंसानियत के उसूलों के दायरे में, आम लोगों, गरीब लोगों और बच्चों को टारगेट करने और स्कूल और हॉस्पिटल समेत जरूरी सेंटर्स को तबाह करने में क्या सही है?”
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पेजेश्कियन ने टेलीग्राम पर एक बयान में कहा, "ईरान युद्ध या अस्थिरता नहीं चाहता है और हमेशा दूसरे देशों के साथ सिर्फ बातचीत और अच्छे सहयोग की बात करता है। लेकिन, देश पर किसी और की मर्जी थोपने और उसे सरेंडर करने के लिए मजबूर करने की कोई भी कोशिश नाकाम होनी तय है। ईरानी लोग ऐसा तरीका कभी नहीं अपनाएंगे।" वहीं ईरान के विज्ञान मंत्री ने तेहरान में एयरोस्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट के दौरे के दौरान कहा कि ईरान एक ऐसे दुश्मन का सामना कर रहा है जो नैतिकता, कानून या किसी भी दूसरे सिस्टम को नहीं मानता।
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उधर संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के स्थायी प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने कहा कि अमेरिका इस बात पर जोर देता है कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह से बंद कर दे। वाल्ट्ज ने फॉक्स न्यूज पर वॉशिंगटन की तेहरान से की गई मांगों को लेकर कहा, "दूसरी बात, आप न्यूक्लियर प्रोग्राम नहीं चला सकते।" उन्होंने यह भी दावा किया कि जब तक तेहरान होर्मुज स्ट्रेट में पूरी तरह से नेविगेशन बहाल नहीं कर देता, तब तक अमेरिका ईरान पर अपनी नेवल नाकाबंदी जारी रखने के लिए तैयार है। उन्होंने कन्फर्म किया कि अमेरिका ईरान पर वॉटरवे खोलने के लिए दबाव डाल रहा है। वॉल्ट्ज ने कहा, "ईरान वैश्विक अर्थव्यवस्था में जीतने वालों और हारने वालों को चुनने का हकदार नहीं है।"
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