ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है। ईरान पर अमेरिकी हवाई हमलों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम (सीजफायर) अब खत्म हो गया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहेगी। ट्रंप ने तेहरान की इस्लामिक सरकार को "बीमार" बताते हुए कहा कि अब ईरान के साथ किसी समझौते पर बातचीत करना समय की बर्बादी है।
ट्रंप इस समय तुर्की की राजधानी अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। वहीं, पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान के साथ सीजफायर खत्म हो गया है, तो उन्होंने जवाब दिया, "मेरे हिसाब से तो यह खत्म हो गया है।" यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलमार्ग में तीन व्यावसायिक जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई तेज हो गई है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिका के 85 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। संगठन के अनुसार, बहरीन के फिफ्थ नेवल डिस्ट्रिक्ट बंदर सलमान और कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस पर संयुक्त मिसाइल और ड्रोन अभियान चलाया गया। IRGC ने यह भी दावा किया कि अभियान के दौरान एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को भी मार गिराया गया। ईरान ने इस कार्रवाई को अमेरिका की ओर से कथित युद्धविराम उल्लंघन के जवाब में उठाया गया कदम बताया है।
मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात होर्मुज जलमार्ग में तीन तेल टैंकरों पर हमले के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान पर नए हवाई हमले किए। इसके साथ ही वाशिंगटन ने ईरान को तेल बेचने की अनुमति देने वाला लाइसेंस भी रद्द कर दिया। अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) के मुताबिक, उसने ईरान में 80 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें ईरानी वायु रक्षा प्रणाली, कमान एवं नियंत्रण नेटवर्क, तटीय रडार स्टेशन, जहाज-रोधी मिसाइल क्षमताएं और होर्मुज क्षेत्र में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की 60 से अधिक छोटी नौकाएं शामिल थीं। सेंटकॉम ने कहा कि यह कार्रवाई वाणिज्यिक जहाजों पर हालिया हमलों की "तत्काल प्रतिक्रिया" थी और इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर हमला करने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना था।
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने साफ किया है कि वह इसी तरह जवाब देगा। दोनों देशों की ताजा सैन्य कार्रवाई ने उस अंतरिम समझौते पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसका मकसद संघर्ष को रोकना था। अमेरिका ने ईरानी कार्रवाई को युद्धविराम का स्पष्ट और खतरनाक उल्लंघन बताया है, जबकि ईरान इसे अमेरिकी हमलों की शुरुआती प्रतिक्रिया बता रहा है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में पहले से तनावपूर्ण हालात और अधिक गंभीर होते नजर आ रहे हैं।
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