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फ्रांस के कई शहरों में कर्फ्यू, 2,400 गिरफ्तार, 3,000 दुकानें प्रभावित, मैक्रों ने ठुकराया गृह मंत्री का इस्तीफा

फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों के बाद पेरिस समेत कई शहरों में कर्फ्यू लगाया गया है। करीब 2,400 गिरफ्तारियों और हजारों दुकानों को नुकसान के बीच मैक्रों ने गृह मंत्री का इस्तीफा ठुकराया।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

  • फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों और लूटपाट के बाद पेरिस, लिली और नीस समेत कई शहरों में कर्फ्यू लगाया गया।

  • हिंसा के दौरान करीब 2,400 लोग गिरफ्तार हुए, 1,000 पुलिसकर्मी घायल हुए और करीब 3,000 दुकानें प्रभावित हुईं।

  • सुरक्षा व्यवस्था में चूक पर बढ़ते दबाव के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज का इस्तीफा ठुकरा दिया।

  • सरकार ने प्रभावित कारोबारियों को राहत देने की बात कही है, जबकि ट्रेड यूनियनों ने 5 नवंबर को नई हड़ताल और रैलियों का आह्वान किया है।

फ्रांस में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और लूटपाट के बाद प्रशासन ने कई शहरों में सख्त कदम उठाए हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को पेरिस, लिली और नीस समेत कई शहरों के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लगाया गया। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने पेरिस में पूरे शहर में कर्फ्यू लगाने से इनकार किया, लेकिन आपातकाल लागू करने की संभावना को खारिज नहीं किया। उनका कहना था कि फिलहाल प्रभावित इलाकों में सीमित और स्थानीय पाबंदियां लगाना अधिक उचित है।

पेरिस पुलिस ने राजधानी के कुछ इलाकों में रात 8 बजे से प्रदर्शनों पर रोक लगा दी है। प्लास द ला रिपब्लिक और लेस हॉल्स के आसपास रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लागू किया गया है। लिली, डूए, वाटिग्नी और डेनैन में अगले दो दिनों तक रात 8 बजे से सुबह 6 बजे के बीच नाबालिगों के बाहर निकलने पर रोक लगाई गई है। नीस में भी शहर के मध्य हिस्से में नाबालिगों के लिए रात का कर्फ्यू लगाया गया है, जबकि मार्सेई में सभाओं और प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

करीब 3,000 दुकानें प्रभावित, 2,400 लोगों की गिरफ्तारी

रॉयटर्स के अनुसार, सप्ताहांत में हुई हिंसा के सिलसिले में करीब 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया। गृह मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार को एक प्रदर्शनकारी की हृदयाघात से मौत हो गई, जबकि करीब 1,000 पुलिसकर्मी घायल हुए। व्यापार और खुदरा क्षेत्र के महासंघ ने बताया कि हिंसा के दौरान लगभग 3,000 दुकानें प्रभावित हुईं। पेरिस के प्लास वेंदोम इलाके में कई दुकानें बंद रहीं और सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए। डायर के एक स्टोर का दरवाजा तोड़ा गया, जबकि रोलेक्स, लुई वितों, राल्फ लॉरेन और गुच्ची के स्टोर की खिड़कियों को भी नुकसान पहुंचा। मार्सेई में फुटबॉल क्लब ओलंपिक डी मार्सेई की आधिकारिक दुकान में लूटपाट हुई और मध्य फ्रांस के एक कस्बे में टाउन हॉल को आग लगा दी गई।

मैक्रों ने गृह मंत्री का इस्तीफा ठुकराया

हिंसा के बाद सुरक्षा व्यवस्था में चूक को लेकर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार पर दबाव बढ़ गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने इस्तीफे की पेशकश की थी, लेकिन मैक्रों ने इसे स्वीकार नहीं किया। राष्ट्रपति ने उनसे बैरिकेड हटाने, लूटपाट रोकने और खुफिया जानकारी जुटाने और संभावित खतरे का आकलन करने में हुई चूक पर पारदर्शिता बरतने को कहा। फ्रांस में शनिवार को 60,000 पुलिसकर्मियों और अन्य सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था। इसके बावजूद नुनेज ने माना कि हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए यह पर्याप्त नहीं था।

प्रधानमंत्री लेकोर्नू ने देश में हाल के वर्षों की सबसे गंभीर हिंसा के लिए कुछ कट्टर वामपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया। वामपंथी नेता ज्यां-लुक मेलेंशों ने उनसे इन आरोपों के समर्थन में सबूत देने की मांग की। इस बीच, सरकार ने लूटे गए सामान को ऑनलाइन बेचने वाले प्लेटफॉर्म से ऐसी लिस्टिंग हटाने और सामान दोबारा बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग करने को कहा है।

कारोबारियों को राहत, 5 नवंबर को नई हड़ताल का आह्वान

रॉयटर्स के मुताबिक, सरकार मंगलवार से हिंसा से प्रभावित कारोबारियों के लिए अस्थायी राहत उपाय लागू करने जा रही है। व्यापार संगठनों ने नुकसान झेलने वाले कारोबारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा और करों में राहत की मांग की है। वहीं, ट्रेड यूनियनों ने 5 नवंबर को नई हड़ताल और रैलियां आयोजित करने का आह्वान किया है। पेरिस, मार्सेई और लियोन के मेयरों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि वे आम तौर पर प्रदर्शनों के अभ्यस्त हैं, लेकिन इस बार उन्हें लगा कि शहरों के कई हिस्सों को सुरक्षा के बिना छोड़ दिया गया।

क्यों हो रहे प्रदर्शन, लोग नाराज क्यों हैं?

इन प्रदर्शनों के पीछे महंगाई, कमजोर सार्वजनिक सेवाओं और बिगड़ती आर्थिक स्थिति को लेकर नाराजगी भी है। सप्ताहांत में सैकड़ों हजारों लोग सड़कों पर उतरे थे। अगले राष्ट्रपति चुनाव में करीब छह महीने शेष रहते हिंसा ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सरकार को सार्वजनिक वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए बजट विधेयक भी पारित कराना है। इस बीच, छात्रों के कुछ समूहों ने लूव्र संग्रहालय और पेरिस के साइंसेज पो विश्वविद्यालय में भी जुटान और अवरोध जारी रखे। मैक्रों सोमवार को खाड़ी देशों के दौरे के तहत कुवैत पहुंचे, जहां उनका उद्देश्य पेट्रोल और डीजल की अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करना है, ताकि ईंधन की कीमतें घटाने में मदद मिल सके।

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