
मिडिल ईस्ट में जंग जारी है। इस बीच ईरान अब तेल और व्यापार के अहम समुद्री रास्तों को बाधित करने की रणनीति पर काम करता दिख रहा है। तस्नीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सैन्य सूत्र ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान के क्षेत्र या उसके द्वीपों पर हमला होता है, तो वह बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट में नया मोर्चा खोल सकता है। इस बयान ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
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रिपोर्ट के अनुसार, ईरान पहले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर चुका है, जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है। हाल में अमेरिका और इजरायल की ओर से ऐसे संकेत मिले हैं कि ईरान के द्वीपों को निशाना बनाया जा सकता है। फारस की खाड़ी में ईरान के 30 से अधिक द्वीप हैं, जिनमें से करीब 10 द्वीप तेल-गैस निर्यात, समुद्री सुरक्षा और होर्मुज पर नजर रखने के लिहाज से बेहद अहम हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि इन द्वीपों पर हमला हुआ तो जवाब और ज्यादा कड़ा होगा।
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अरबी में ‘बाब अल-मंडेब’ का अर्थ ‘आंसुओं का द्वार’ होता है। यह संकरा समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है और यमन (जहां ईरान समर्थित हूती सक्रिय हैं) तथा अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र के बीच स्थित है। अपने सबसे संकरे हिस्से में यह सिर्फ 29 किलोमीटर चौड़ा है। यह मार्ग यूरोप, एशिया और मिडिल ईस्ट के बीच व्यापार की अहम कड़ी है, जहां से दुनिया के करीब 12 प्रतिशत व्यापार और लगभग 10 प्रतिशत तेल और LNG गुजरता है।
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अगर इस समुद्री रास्ते में बाधा आती है तो जहाजों को अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ के रास्ते लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा, जिससे डिलीवरी में 15-20 दिन की देरी और लागत में भारी बढ़ोतरी होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर होर्मुज के बाद बाब-अल-मंडेब भी प्रभावित होता है, तो दुनिया की 30 प्रतिशत से अधिक तेल-गैस सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और तेल की कीमतों में तेज उछाल की आशंका है।
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बाब-अल-मंडेब क्षेत्र पहले से ही अस्थिर बना हुआ है, जहां ईरान समर्थित हूती विद्रोही कई बार व्यापारिक जहाजों पर हमले कर चुके हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में रेड सी में इन हमलों को रोकने के लिए पश्चिमी देशों को अरबों डॉलर खर्च करने पड़े, फिर भी चार बड़े मालवाहक जहाज डूब गए। ऐसे में अगर ईरान सीधे तौर पर इस क्षेत्र में सक्रिय होता है, तो यह पश्चिमी देशों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है और वैश्विक शिपिंग पर इसका असर और गहरा हो सकता है।
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