दुनिया

ईरान ने जंग रोकने के लिए रखीं ये 3 शर्तें, क्या मानेंगे अमेरिका-इजरायल?

अमेरिका-इजरायल और ईरान के युद्ध के बीच ईरान ने जंग खत्म करने की तीन शर्तें रखीं हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि अधिकारों की मान्यता, हर्जाना और हमले के खिलाफ गारंटी दी जाए तभी यह जंग खत्म होगा।

फोटो: AI Generated
फोटो: AI Generated 

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर दिखाने लगा है। तेल और गैस की कीमतों में तेजी से उछाल देखा जा रहा है और दुनियाभर के बाजारों में महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है। इसी बीच ईरान ने पहली बार खुलकर बताया है कि वह किन शर्तों पर अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए तैयार है।

Published: undefined

युद्ध खत्म करने के लिए ईरान की तीन शर्तें

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि युद्ध खत्म करने का रास्ता तभी खुलेगा जब ईरान के “वैध अधिकारों” को स्वीकार किया जाए, युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई की जाए और भविष्य में किसी भी हमले के खिलाफ ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए। उनका कहना है कि इन तीनों शर्तों को मान लिया जाता है तो तेहरान जंग खत्म करने के लिए तैयार है।

पेजेशकियन ने यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दिया। उन्होंने लिखा कि रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत के दौरान उन्होंने क्षेत्र में शांति के लिए ईरान की प्रतिबद्धता दोहराई है। उनके मुताबिक, मौजूदा संघर्ष “जायोनी शासन और अमेरिका” की वजह से शुरू हुआ और इसे खत्म करने का एकमात्र रास्ता ईरान के कानूनी अधिकारों को मान्यता देना, हर्जाना देना और भविष्य में हमले के खिलाफ पक्की अंतरराष्ट्रीय गारंटी देना है।

Published: undefined

युद्ध की शुरुआत और बढ़ता तनाव

ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि जब तक इन मुद्दों पर ठोस समझौता नहीं होता, तब तक युद्ध खत्म होना मुश्किल है। तेहरान अपने क्षेत्रीय सहयोगियों और कई देशों के साथ लगातार संपर्क में है और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब संघर्ष दूसरे हफ्ते में पहुंच चुका है और तनाव कम होने के संकेत नहीं दिख रहे।

यह टकराव 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त रूप से एहतियाती हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल के कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इसके अलावा जॉर्डन, इराक और खाड़ी के कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया, जिसके बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव तेजी से बढ़ गया।

Published: undefined

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष का असर सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव और समुद्री गतिविधियों पर असर के कारण तेल और गैस के टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है और आने वाले समय में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।

Published: undefined

Google न्यूज़नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia

Published: undefined