
इस सप्ताह की शुरुआत में ईरान के सरकारी मीडिया ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्र के भीतर बिछे इंटरनेट केबलों के परिचालकों से कथित ईरानी समुद्री क्षेत्र तक पहुंच के लिए शुल्क लेने की योजना का प्रस्ताव रखा।
यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब ईरान ने चेतावनी दी है कि जलडमरूमध्य में मौजूद कई महत्वपूर्ण केबल पश्चिम एशिया की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक संवेदनशील बिंदु हैं।
ईरान की टिप्पणियों ने इंटरनेट और वैश्वीकरण की उस अदृश्य बुनियाद को उजागर किया है, जिसमें समुद्र के भीतर बिछे 500 से अधिक केबलों का जाल शामिल है। इन्हीं के जरिए दुनिया के 95 प्रतिशत से अधिक अंतरराष्ट्रीय डेटा यातायात का संचालन होता है।
हम अक्सर इंटरनेट को एक तरह के आभासी ‘क्लाउड’ के रूप में देखते हैं, लेकिन इसकी वास्तविक भौतिक संरचना बेहद संवेदनशील है और यह संवेदनशीलता अब एक गंभीर भू-राजनीतिक चिंता बनती जा रही है।
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पश्चिम एशिया से होकर दुनिया के कई सबसे महत्वपूर्ण पनडुब्बी केबल मार्ग गुजरते हैं। लाल सागर, बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य, स्वेज नहर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संकरे समुद्री मार्ग ‘‘डिजिटल चोकप्वाइंट’’ के रूप में भी काम करते हैं।
ये समुद्री गलियारे यूरोप, एशिया और अफ्रीका के प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ते हैं। वर्ष 2024 में लाल सागर में समुद्री केबलों से जुड़ी घटनाओं के कारण यूरोप और एशिया के बीच लगभग 25 प्रतिशत इंटरनेट यातायात प्रभावित हुआ था।
पनडुब्बी केबलों के रणनीतिक महत्व से ईरान भी अनजान नहीं है। इन केबलों को होने वाला नुकसान, चाहे वह दुर्घटनावश हो या जानबूझकर, गंभीर परिणाम ला सकता है।
व्यापक परिप्रेक्ष्य में संदेश बिल्कुल स्पष्ट है — डिजिटल अवसंरचना देशों को रणनीतिक बढ़त दे सकती है लेकिन यह खुद भी एक संभावित निशाना बन चुकी है।
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पहले महत्वपूर्ण अवसंरचना का अर्थ तेल पाइपलाइन, बंदरगाह या बिजली ग्रिड हुआ करता था, लेकिन अब डेटा अवसंरचना भी राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है।
समुद्र के भीतर बिछे केबलों की सबसे बड़ी समस्या अवसंरचना का केंद्रीकरण है। कई केबल समुद्र तल पर एक ही मार्ग से गुजरते हैं और कुछ सीमित समुद्री चोकप्वाइंट से होकर निकलते हैं।
इससे ऐसी स्थिति बनती है जहां एक ही स्थान पर विफलता का खतरा पैदा हो जाता है। किसी केबल के कटने से — चाहे वह जानबूझकर हो या दुर्घटनावश — कई क्षेत्रों की कनेक्टिविटी एक साथ प्रभावित हो सकती है।
हालांकि केबल टूटने की घटनाएं असामान्य नहीं हैं, लेकिन उनकी मरम्मत बेहद कठिन होती है, खासकर विवादित या सैन्य गतिविधियों वाले समुद्री क्षेत्रों में। मरम्मत करने वाले जहाजों को सुरक्षित पहुंच, अंतरराष्ट्रीय समन्वय और पर्याप्त समय की आवश्यकता होती है।
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यदि समुद्र के भीतर बिछे केबलों में गंभीर व्यवधान उत्पन्न होता है तो इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। सबसे पहला असर वैश्विक कनेक्टिविटी के टूटने के रूप में सामने आएगा। दुनिया में कहीं भी किसी से भी तुरंत संपर्क करने की सुविधा, जिसे हम सामान्य मानते हैं, गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
वे क्षेत्र जो संवेदनशील केबल मार्गों पर अधिक निर्भर हैं, वहां इंटरनेट की गति धीमी पड़ सकती है, संचार बाधित हो सकता है और वित्तीय अस्थिरता पैदा हो सकती है।
जिन देशों के पास वैकल्पिक अवसंरचना कम है, खासकर अफ्रीका, पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के विकासशील देश, वे सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
वित्तीय बाजार भी इससे अछूते नहीं रहेंगे। अत्यंत तेज और भरोसेमंद डेटा प्रवाह पर उच्च-आवृत्ति व्यापार प्रणाली, वैश्विक भुगतान नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग लेनदेन निर्भर करते हैं।
थोड़े समय का व्यवधान भी बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव, लेनदेन में देरी और निवेशकों के बीच अनिश्चितता पैदा कर सकता है।
चूंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था गहराई से परस्पर जुड़ी हुई है, इसलिए किसी एक क्षेत्र में उत्पन्न डिजिटल अस्थिरता तेजी से पूरी दुनिया में वित्तीय झटके पैदा कर सकती है।
यदि केबलों में व्यवधान होर्मुज जलडमरूमध्य या स्वेज नहर जैसे प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में संघर्ष या अस्थिरता के साथ जुड़ जाए, तो बीमा बाजार, जहाजरानी उद्योग और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाएं भी अनिश्चितता का सामना करेंगी।
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सैन्य और रणनीतिक दृष्टि से समुद्री केबलों में व्यवधान के परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं। आधुनिक सेनाएं सुरक्षित लंबी दूरी के संचार और वास्तविक समय में समन्वय पर निर्भर हैं।
कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से लेकर ड्रोन संचालन और रसद योजना तक लगभग हर व्यवस्था समुद्र के भीतर बिछी केबलों पर आधारित है। इन नेटवर्क को नुकसान पहुंचने से सेनाओं की प्रभावशीलता घट सकती है, सहयोगी देशों के साथ समन्वय कठिन हो सकता है और गलत आकलन की आशंका बढ़ सकती है।
केबलों के साथ छेड़छाड़ को किसी सैन्य ठिकाने पर पारंपरिक हमले की तरह स्पष्ट उकसावा नहीं माना जाता। जैसे बाल्टिक सागर में केबल टूटने की घटनाओं में रूस पर संदेह जताया गया, लेकिन जिम्मेदार पक्ष की पहचान करना मुश्किल रहा। कानूनी स्थिति भी अस्पष्ट रहती है।
यह अस्पष्टता संघर्ष बढ़ने का खतरा पैदा करती है क्योंकि देशों के लिए यह तय करना कठिन हो जाता है कि व्यवधान दुर्घटना है, आपराधिक गतिविधि है या युद्ध जैसी कार्रवाई।
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अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण नये समुद्री केबलों के निर्माण में पहले ही देरी हो चुकी है। यह एक व्यापक सच्चाई को भी उजागर करता है कि डिजिटल दुनिया की बुनियाद वास्तविक और ठोस है लेकिन पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
यदि इन केबलों को जानबूझकर निशाना बनाया गया या इनके साथ तोड़फोड़ की गई, तो इसका असर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव वैश्विक संचार, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा प्रणालियों पर पड़ेगा।
समुद्र का तल अब भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का नया क्षेत्र बन चुका है और किसी भी व्यवधान के परिणाम आने वाले वर्षों तक वैश्विक स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं।
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