
अल कादिर ट्रस्ट केस में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को इस्लामाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। इमरान खान को हाईकोर्ट ने दो सप्ताह के लिए जमानत दे दी है। इसके साथ ही इमरान खान को सभी मामलों में भी जमानत दे दी गई है। कोर्ट ने 7 मई के बाद के किसी भी मामले पर इमरान खान की 17 मई तक गिरफ्तारी ना करने का आदेश दिया है। इमरान खान ने हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया कि उनकी जान को खतरा है। उनके साथ आतंकियों जैसा बर्ताव किया जा रहा है।
Published: undefined
इमरान खान पर अल-कादिर ट्रस्ट मामले में धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज है। यह पूरा मामला 2019 में सूफीवाद के लिए अल-कादिर यूनवर्सिटी की स्थापना से जुड़ा हुआ है। दरअसल, पूर्व पीएम इमरान खान, उनकी पत्नी बुशरा बीवी और उनके करीबी सहयोगी जुल्फिकार बुखारी और बाबर अवान ने अल-कादिर प्रोजेक्ट ट्रस्ट का गठन किया था। जिसका मकसद पंजाब के झेलम जिले की सोहावा तहसील में हाई लेवल की शिक्षा प्रदान करने के अल-कादिर नाम से यूनिवर्सिटी का स्थापना करना था। आरोप है कि दान की गई जमीन के कागजात में हेराफेरी की गई।
यूनिवर्सिटी के नाम पर दान की गई इस जमीन को इमरान खान और उनकी बीवी ने गैर कानूनी तरीके से हड़प लिया। आरोप है कि प्रधानमंत्री रहने के दौरान इमरान खान ने पाकिस्तान के सबसे अमीर कारोबारी मलिक रियाज को गिरफ्तारी का डर दिखाकर धमकाया और फिर अरबों रुपये की जमीन को अपने नाम करा लिया। कागजातों में ट्रस्ट का पता बानी गाला हाउस, इस्लामाबाद लिखवाया गया। बाद में इस बुशरा बीवी ने जमीन को लीगल तरीके से पाने के लिए एक निजी रियल एस्टेट फर्म बहरिया टाउन से संपर्क किया और उससे दान देने के लिए फर्जी ज्ञापन छपवाया।
Published: undefined
रियल एस्टेट फर्म बहरिया टाउन दान के नाम पर अल-कादिर ट्रस्ट को 458 कनाल, 4 मरला, 58 वर्ग फुट जमीन कर दी। गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह के मुताबिक इस जमीन में इमरान खान ने अपना अलग से हिस्सा तय किया और 458 कनाल जमीन में से 240 कनाल बुशरा बीवी की करीबी दोस्त फराह गोगी के नाम ट्रांसफर करा दी। सनाउल्लाह का दावा है कि यूनिवर्सिटी के नाम पर इमरान खान ने अरबों रुपये की जमीन का अपना हिस्सा प्राप्त किया। इमरान ने इसके लिए रियल एस्टेट टाइकून मलिक रियाज को लगभग 190 मिलियन पाउंड दिए।
इस्लामाबाद पुलिस ने महानिरीक्षक (IG) अकबर नासिर खान का आरोप है कि इमरान खान और उनकी पत्नी ने 50 अरब रुपये को वैध बनाने के लिए एक रियल एस्टेट फर्म से अरबों रुपये प्राप्त किए। यह घोटाला तब सामने आया जब पाकिस्तानी मीडिया ने बताया कि ट्रस्ट द्वारा 180 मिलियन पाकिस्तानी रुपये प्राप्त किए गए, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में सिर्फ 8।52 मिलियन पाकिस्तानी रुपये दिखाया गया। इस दौरान सवाल ये उठा कि जब संस्थान को एक ट्रस्ट के रूप में स्वीकार किया गया था तो संस्थान छात्रों से शुल्क क्यों ले रहा है।
Published: undefined
Google न्यूज़, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia
Published: undefined