
मिडिल ईस्ट में चल रहे सैन्य संघर्ष का असर अब पूरी दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। भारत समेत कई देश ईंधन आपूर्ति में व्यवधान और कीमतों में तेज बढ़ोतरी का सामना कर रहे हैं। पाकिस्तान, फ्रांस, अमेरिका, जर्मनी, पोलैंड, वियतनाम, बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया जैसे देशों में ईंधन संकट की स्थिति बनती जा रही है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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विशेषज्ञों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव की वजह से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतों में करीब 25 फीसदी तक उछाल दर्ज किया गया है। दुनिया का करीब 31 फीसदी समुद्री कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इसी रास्ते से गुजरता है। इस मार्ग में बाधा आने से वैश्विक ऊर्जा व्यापार अस्थिर हो गया है और कई देशों में सरकारों को आपात कदम उठाने पड़े हैं।
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ईंधन संकट से निपटने के लिए अलग-अलग देशों ने अलग रणनीति अपनाई है। पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में 55 पाकिस्तानी रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। ईंधन बचाने के लिए वहां स्कूल दो हफ्तों के लिए बंद कर दिए गए हैं और सरकारी दफ्तर अब सप्ताह में केवल चार दिन खुल रहे हैं।
बांग्लादेश में ईंधन राशनिंग लागू कर दी गई है, जहां मोटरसाइकिल के लिए रोजाना 2 लीटर और कारों के लिए 10 लीटर की सीमा तय की गई है। पैनिक बाइंग को रोकने के लिए पेट्रोल पंपों पर रसीदों की जांच और अवैध भंडारण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
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फ्रांस और पोलैंड में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जहां लोग भविष्य की चिंता में घबराकर ईंधन भरवा रहे हैं। जर्मनी में भी तेल की कीमतों में उछाल से आम लोगों और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज ने बढ़ती ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंता जताई है।
अमेरिका में भी इसका असर दिखने लगा है। फ्लोरिडा और लुइसियाना जैसे राज्यों में गैस पंपों पर कीमतें अचानक 11 सेंट प्रति गैलन तक बढ़ गई हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
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एशियाई देशों में भी स्थिति चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। वियतनाम ने नागरिकों से ईंधन बचाने की अपील की है और स्थिति से निपटने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाई है। वहीं, श्रीलंका ने पैनिक बाइंग रोकने के लिए ईंधन की कीमतों में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, हालांकि वहां अप्रैल तक पर्याप्त स्टॉक होने का दावा किया गया है।
इंडोनेशिया बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए अपनी B50 बायोडीजल योजना को फिर से लागू करने पर विचार कर रहा है, जिसमें डीजल में पाम ऑयल आधारित बायोडीजल की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट का संघर्ष लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 120 से 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। ऐसे में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ सकता है और कई देशों को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए नए कदम उठाने पड़ सकते हैं।
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