
सुनीता विलियम्स समेत अंतरिक्ष में फंसे नासा के चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर ‘स्पेसएक्स’ का यान धरती के लिए रवाना हो गया है। बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स और अन्य ने ‘स्पेसएक्स’ यान में सवार होकर अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को अलविदा कहा, जो पिछले वसंत से उनका घर था। यान तड़के ही ‘अनडॉक’ (अंतरिक्ष स्टेशन से अलग) हो गया और अगर मौसम अनुकूल रहता है तो अमेरिकी समय के अनुसार मंगलवार शाम तक इसके फ्लोरिडा के तट पर उतरने की संभावना है।
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नासा के अनुसार, सुनीता विलियम्स और अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर आने वाला अंतरिक्ष यान कुछ ही घंटों में आईएसएस अलग होगा और मंगलवार शाम 5:57 बजे (अमेरिकी समयानुसार) फ्लोरिडा के समुद्र में उतरेगा। भारतीय समय के अनुसार, यह बुधवार तड़के करीब 3 बजे धरती पर पहुंचेगा। नासा अपने स्पेसएक्स कार्यक्रम के तहत इस वापसी यात्रा का सीधा प्रसारण करेगा। यह नासा और एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स का संयुक्त मिशन है, जिसे "स्पेसएक्स क्रू 9" कहा जाता है।
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विल्मोर और विलियम्स बोइंग के नए स्टारलाइनर कैप्सूल से पांच जून को केप कैनवेरल से रवाना हुए थे। दोनों एक सप्ताह के लिए ही गए थे लेकिन अंतरिक्ष यान से हीलियम के रिसाव और वेग में कमी के कारण वे लगभग नौ माह से अंतरिक्ष स्टेशन में फंसे हुए थे। रविवार को विल्मोर और विलियम्स के स्थान पर अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को तैनात करने के लिए ‘स्पेसएक्स’ का यान अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंच गया था।
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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र से रवाना हुए अंतरिक्ष यात्रियों के नए दल में नासा से ऐनी मैक्लेन और निकोल एयर्स शामिल हैं। वे दोनों सैन्य पायलट हैं। इनके अलावा जापान के ताकुया ओनिशी और रूस के किरिल पेस्कोव भी रवाना हुए हैं और दोनों विमानन कंपनियों के पूर्व पायलट हैं।
विल्मोर ने रविवार को अंतरिक्ष स्टेशन का ‘हैच’ खोला और इसके बाद एक के बाद एक चारों नए यात्री अंदर आए। अंतरिक्ष में पहले से मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने नए साथियों का स्वागत उनसे गले मिलकर और हाथ मिलाकर किया। विलियम्स ने ‘मिशन कंट्रोल’ से कहा, ‘‘यह एक शानदार दिन है। अपने दोस्तों को यहां देखकर बहुत खुशी हुई।’’
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सुनीता विलियम्स, जो इस साल सितंबर में 60 वर्ष की हुईं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध भारतीय मूल की दूसरी अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री हैं। उनसे पहले कल्पना चावला यह उपलब्धि हासिल कर चुकी थीं, लेकिन 2003 में कोलंबिया स्पेस शटल दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी। सुनीता विलियम्स का जन्म 1965 में हुआ था। उनके पिता दीपक पांड्या गुजरात से हैं, जबकि उनकी मां उर्सुलाइन बोनी पांड्या (जालोकर) स्लोवेनिया से हैं। सुनीता ने पहली बार 2006 में "डिस्कवरी" स्पेस शटल के जरिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा की थी।
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