
अफगानिस्तान की पंजशीर घाटी अभी भी तालिबान के हाथों से बाहर है। बीबीसी की एक ताजा रिपोर्ट में वहां ताजा लड़ाई का दावा किया गया है। घाटी में विद्रोही गुट के नेताओं में से एक पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने उन रिपोर्ट को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि तालिबान ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है।
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बीबीसी को भेजे गए एक वीडियो संदेश में अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति सालेह ने स्वीकार किया कि तालिबान की ओर से फोन, इंटरनेट और बिजली लाइनों को बंद करने से स्थितियां कठिन हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के लोग हताहत हुए हैं। उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि हम एक मुश्किल स्थिति में हैं। हम पर तालिबान का हमला हुआ है। लेकिन हमारी सेना आत्मसमर्पण नहीं करेगी।
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हालांकि पंजशीर के विद्रोही गुट के नेताओं ने माना कि कुछ जिले तालिबान के हाथ में आ गए हैं। जबकि तालिबान समर्थक सोशल मीडिया ने लड़ाकों को कब्जा किए गए टैंक और अन्य हथियारों के साथ एक क्लिप में दिखाया था। जिसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि तालिबान ने पंजशीर पर कब्जा कर लिया है और काबुल और अन्य शहरों में जश्न के तौर पर गोलियां भी चलाई जा रही हैं।
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बता दें कि तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा तो कर लिया है, मगर वह अभी भी पंजशीर घाटी पर अपना नियंत्रण स्थापित नहीं कर पाया है। पंजशीर घाटी में विद्रोही गुट तालिबान से लगातार लोहा ले रहे हैं। विद्रोही गुट के नेताओं का कहना है कि अगर सरकार का गठन हो रहा है तो उसमें सभी समुदाय का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। उन्होंने तालिबान के सामने आत्मसमर्पण करने से मना कर दिया है।
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