
ईरान में विरोध प्रदर्शन चरम पर पहुंच गया है। देश का दुनिया से संपर्क लगभग टूट गया है। इस बीच देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने लोगों को दूसरे देश के हाथों न खेलने की सलाह दी है। पिछले 12 दिनों से लोग अपनी मांगों को लेकर सड़क पर हैं।
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रॉयटर्स के मुताबिक शुक्रवार को अधिकारियों ने अशांति को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं, जबकि वीडियो में कई शहरों की सड़कों पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों में इमारतों और गाड़ियों में आग लगी हुई दिख रही थी।
वहीं, एक टेलीविजन संबोधन में, सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने पीछे न हटने की कसम खाई, और प्रदर्शनकारियों पर प्रवासी विपक्षी गुट और यूनाइटेड स्टेट्स की तरफ से काम करने का आरोप लगाया। वहीं, कुछ मानवाधिकार समूहों ने दक्षिण में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की फायरिंग की रिपोर्ट की।
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खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों की आलोचना की और उन पर “दूसरे देश के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपनी ही सड़कों को बर्बाद करने” का आरोप लगाया। सरकारी टीवी पर इसका प्रसारण किया गया। खामेनेई का निशाना ट्रंप पर है। जिन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि अगर ईरानी शासन प्रदर्शन कर रहे लोगों को निशाना बनाता है, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा।
ईरान खामेनेई के नेतृत्व वाली इस्लामिक सरकार के खिलाफ सड़क पर है। लोगों का यह विरोध प्रदर्शन बढ़ती महंगाई, बदहाल अर्थव्यवस्था और सुरक्षा बलों की दमनकारी कार्रवाइयों के खिलाफ है। ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने गुरुवार और शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार रात 8 बजे प्रदर्शन का आह्वान किया था।
8 जनवरी की रात ईरान में विरोध प्रदर्शन ने रफ्तार पकड़ी, जिसके चलते राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के नेतृत्व वाली ईरान सरकार ने देश में इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन कॉल सेवाएं बंद कर दी थीं।
देश की न्यायपालिका और सुरक्षा बलों के प्रमुख ने लोगों के आजादी-आजाजी के नारों के बीच कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। प्रदर्शन में अब तक 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है।
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