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तीन बड़े तेल रास्ते बंद, दुनिया पर मंडराया नया ऊर्जा संकट, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच होर्मुज, बाब-अल-मंदेब और सऊदी तेल पाइपलाइन में रुकावट से वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।

फोटोः IANS
फोटोः IANS 

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर संकट और गहरा गया है। होर्मुज स्ट्रेट पहले से बंद है, जो दुनिया की कुल तेल जरूरत का करीब 20 फीसदी हिस्सा पूरा करने वाले प्रमुख समुद्री रास्तों में शामिल है। इसके साथ ही हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण बाब-अल-मंदेब पर भी संकट बढ़ गया है। अब सऊदी अरब की करीब 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमलों के बाद उसका प्राथमिक बाईपास ऑयल रूट भी बंद हो गया है। तेल के इन तीन अहम रास्तों में रुकावट से पहले से प्रभावित वैश्विक तेल-गैस सप्लाई पर दबाव और बढ़ने की आशंका है।

सऊदी अरब के पास कितना तेल स्टॉक बचा?

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के बंद होने के बाद दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश के पास उपलब्ध तेल निर्यात रिजर्व अब केवल 5 से 7 दिनों के लिए बचा है। रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि मौजूदा संकट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 4 फीसदी हिस्सा प्रभावित हो सकता है।

सऊदी अरब की यह पाइपलाइन अरब प्रायद्वीप के पार तेल को लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है। इसकी रोजाना करीब 40 लाख बैरल तेल पहुंचाने की क्षमता है। आपात स्थिति में इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव और बढ़ गया है। यानबू के पास करीब 3.5 करोड़ बैरल की अनुमानित तेल क्षमता में से केवल पांच से सात दिनों का निर्यात स्टॉक बचा है। मिस्र के ऐन सुखना और सिदी केरीर बंदरगाहों पर सऊदी अरब के अतिरिक्त रिजर्व से भी कुछ अतिरिक्त दिनों का ही बफर उपलब्ध है। हालांकि, रियाद ने अभी नुकसान की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, जिससे ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है।

सऊदी तेल उत्पादन भी 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर

11 सितंबर को ओपेक को ब्रिटेन की ओर से उपलब्ध कराए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, सऊदी अरब के तेल उत्पादन में महीने-दर-महीने करीब 19 लाख बैरल प्रतिदिन की बड़ी गिरावट आई है। जुलाई में उत्पादन 81 लाख बैरल प्रतिदिन था, जबकि जून में यह 71 लाख बैरल प्रतिदिन दर्ज किया गया था। इस गिरावट ने जून में उत्पादन में हुई अल्पकालिक बढ़ोतरी को भी खत्म कर दिया है।

अगस्त में सऊदी अरब का कच्चे तेल का उत्पादन घटकर 62.40 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो 1990 के बाद का सबसे निचला स्तर बताया गया है। इसके पीछे बड़ी वजह अमेरिका-ईरान युद्ध के बढ़ने के बाद पूरे क्षेत्र में प्रमुख ऊर्जा स्रोतों के व्यवस्थित रूप से बाधित होने को माना जा रहा है।

कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर सीधा असर

तेल के तीनों प्रमुख रास्तों में रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखाई देने लगा है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 109 डॉलर प्रति बैरल, डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 103 डॉलर और मर्बन क्रूड करीब 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं, नेचुरल गैस की कीमतों में भी करीब 2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

होर्मुज और बाब-अल-मंदेब में रुकावट के बाद सऊदी अरब का वैकल्पिक तेल मार्ग भी बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। इससे वैश्विक ईंधन लागत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने की स्थिति बनी है, जिसका असर महंगाई पर पड़ सकता है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड भी 2008 के वित्तीय संकट के बाद से अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुकी है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी का अनुमान है कि इस साल वैश्विक तेल आपूर्ति में रोजाना 57 लाख बैरल की कमी हो सकती है। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत तेल आयात पर निर्भर देशों में रणनीतिक तेल भंडार की गंभीर कमी के बीच यह स्थिति बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर भी दबाव बढ़ा सकती है।