दुनिया

भारत पर अमेरिका ने लगाया 10% टैरिफ, जबरन श्रम से जुड़े नियमों का दिया हवाला

अमेरिका ने भारत को 12.5% की बजाय 10% टैरिफ श्रेणी में रखा है। विदेश व्यापार नीति में बदलाव और बंधुआ मजदूरी पर रोक के फैसले का भारत को फायदा मिला।

फोटोः IANS
फोटोः IANS 

अमेरिका ने वस्तुओं के उत्पादन में बंधुआ मजदूरी के इस्तेमाल पर रोक लगाने के प्रयासों के तहत भारत और 16 अन्य देशों से आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया है।

पिछले महीने 12.5% टैरिफ लगाने का किया था ऐलान

अमेरिका ने पिछले महीने व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखते समय भारत को 12.5 प्रतिशत शुल्क वाले देशों की श्रेणी में रखा था, लेकिन उसने बंधुआ मजदूरी से तैयार वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने के लिए भारत द्वारा अपनी विदेश व्यापार नीति में किए गए संशोधन का संज्ञान लिया और शुल्क को घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को इस संबंध में जारी एक ज्ञापन में कहा, ‘‘इन कदमों के परिणामस्वरूप व्यापार प्रतिनिधि ने मुझे सलाह दी है कि ऐसे प्रतिबंधों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए इन अर्थव्यवस्थाओं को प्रोत्साहित करने के वास्ते उनकी वस्तुओं पर 10 प्रतिशत की दर से शुल्क लगाया जाना चाहिए।’’

60 देशों पर नया टैरिफ, 17 देशों को 10% शुल्क

अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने सभी देशों पर लागू 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क की अवधि समाप्त होने से एक दिन पहले बृहस्पतिवार को व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत 60 देशों पर नए शुल्क की घोषणा की।

चीन, ब्रिटेन और जापान जैसे जिन देशों में बंधुआ मजदूरी से तैयार वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने वाले कानून नहीं हैं, उन्हें 12.5 प्रतिशत शुल्क का सामना करना पड़ेगा।

बंधुआ मजदूरी से संबंधित ये शुल्क उन कच्चे माल पर लागू नहीं होंगे, जिन पर शुल्क लगाने से घरेलू बाजार में उनकी आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा पूरी अर्थव्यवस्था में व्यवधान पैदा करने वाले उत्पादों और अमेरिका में पर्याप्त मात्रा में उत्पादित या पैदा नहीं की जा सकने वाली वस्तुओं को भी इससे छूट दी गई है।

शुल्क का सामना करने वाले 60 देशों में भारत, कनाडा, ब्रिटेन, बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत 17 देशों पर 10 प्रतिशत की दर लागू होगी। शेष 43 देशों को 12.5 प्रतिशत शुल्क देना होगा।

भारत के फैसले का USTR ने लिया संज्ञान

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) के बयान में कहा गया कि ग्रीर ने राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत उन 60 अर्थव्यवस्थाओं पर शुल्क लगाने की अंतिम कार्रवाई की जो ‘‘बंधुआ मजदूरी से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रहे हैं।’’

नए शुल्क शुक्रवार रात 12 बजकर एक मिनट से प्रभावी होंगे। उसी समय अस्थायी 10 प्रतिशत आयात शुल्क की अवधि समाप्त होगी। यह अस्थायी शुल्क फरवरी में उच्चतम न्यायालय के उस फैसले के बाद लगाया गया था, जिसमें अप्रैल 2025 में लागू किए गए राष्ट्रपति के ‘‘लिबरेशन डे’’ शुल्कों को अमान्य करार दिया गया था।

ग्रीर ने यहां एक बयान में कहा कि यह कार्रवाई मानवाधिकारों के उल्लंघन और व्यापार को विकृत करने वाली गतिविधियों में सुधार की शुरुआत करेगी तथा दुनियाभर के श्रमिकों के कल्याण में मदद करेगी।

भारत ने 14 जून को बदली थी विदेश व्यापार नीति

इस संबंध में जारी एक संघीय नोट में प्रस्तावित शुल्कों की जून में घोषणा के बाद जबरन श्रम से तैयार वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने के भारत के फैसले का उल्लेख किया गया।

भारत ने 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन करके बंधुआ मजदूरी से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था।

अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है। वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का व्यापार करीब 141 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 87.3 अरब अमेरिकी डॉलर था।

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