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दुनिया की खबरें: होर्मुज में UAE के दो तेल टैंकरों पर ड्रोन हमला, अमेरिकी बॉर्डर पर 15 महीनों से कोई रिहाई नहीं

अबू धाबी की सरकारी तेल एवं गैस कंपनी एडीएनओसी के स्वामित्व वाले दो टैंकरों पर बृहस्पतिवार की शाम होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय हमला किया गया। यूएई ने बताया कि हमले में कोई घायल नहीं हुआ और ‘‘स्थिति पर काबू पा लिया गया है।’’

फोटो: IANS
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संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ईरान पर सरकारी स्वामित्व वाली तेल कंपनी द्वारा संचालित दो टैंकरों पर होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र से गुजरते समय ड्रोन हमला करने का आरोप लगाया है।यूएई ने शुक्रवार को कहा कि ये हमले समुद्री डकैती की घटनाएं थीं।

इन हमलों में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन इनसे उस महत्वपूर्ण जलमार्ग से माल ले जाने वाले जहाजों के सामने मौजूद खतरा उजागर हुआ। यह जलमार्ग फारस की खाड़ी से खुले समुद्रों तक जाता है, जबकि ईरान इस मार्ग पर अपना मजबूत नियंत्रण बनाए हुए है।

अबू धाबी की सरकारी तेल एवं गैस कंपनी एडीएनओसी के स्वामित्व वाले दो टैंकरों पर बृहस्पतिवार की शाम होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय हमला किया गया। यूएई ने बताया कि हमले में कोई घायल नहीं हुआ और ‘‘स्थिति पर काबू पा लिया गया है।’’

ब्रिटिश सेना के ‘यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर’ ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय ड्रोन हमलों में दो जहाजों को मामूली नुकसान होने की सूचना मिली। इसने इन जहाजों की पहचान एडीएनओसी के जहाजों के रूप में नहीं की।

यूएई के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि ये ‘‘संयुक्त राष्ट्र के नौवहन की स्वतंत्रता के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन’’ हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने दी चेतावनी, अल-कायदा बांग्लादेश में आतंकवादी सेल बनाने की कोशिश कर रहा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने चेतावनी दी है कि भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (एक्यूआईएस) बांग्लादेश को आधार बनाकर आतंकवादी सेल स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

यह निष्कर्ष संयुक्त राष्ट्र की विश्लेषणात्मक सहायता एवं प्रतिबंध निगरानी टीम की 38वीं रिपोर्ट में सामने आया है। यह रिपोर्ट इस्लामिक स्टेट, अल-कायदा और उससे जुड़े संगठनों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की समिति को सौंपी गई है।

बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, रिपोर्ट में कहा गया है कि नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले पर हुआ हमला एक्यूआईएस से जुड़ा था। साथ ही, संगठन द्वारा बांग्लादेश को आतंकवादी नेटवर्क खड़ा करने के आधार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिशों पर चिंता जताई गई है। इस पृष्ठभूमि में निगरानी टीम ने चेतावनी दी है कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद का खतरा और अधिक बढ़ गया है।

लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को उस जनविद्रोह के बाद देश छोड़कर निर्वासन में जाना पड़ा था, जिसमें इस्लामवादी तत्वों की प्रमुख भूमिका बताई गई थी। इसके बाद से यह आशंका बढ़ गई है कि आतंकवादी संगठनों को वहां अपनी गतिविधियां फैलाने के लिए अनुकूल जमीन मिल सकती है।

एक्यूआईएस की स्थापना वर्ष 2014 में अल-कायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी ने की थी। रिपोर्ट में कहा गया है, एक्यूआईएस एक बिखरे हुए समूह से विकसित होकर एक क्षेत्रीय आतंकवादी संगठन का रूप लेता जा रहा है।" इसमें आगे कहा गया कि संगठन ने लॉजिस्टिक्स और वित्तीय नेटवर्क स्थापित कर लिए हैं तथा अब वह बड़े संगठित ढांचों के बजाय छोटे, विकेंद्रीकृत और बिखरे हुए सेल के माध्यम से काम कर रहा है।

संयुक्त राष्ट्र के आकलन में इस घटनाक्रम को दक्षिण एशिया के सुरक्षा माहौल में व्यापक गिरावट से जोड़ा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक आतंकवादी खतरे का स्तर कुल मिलाकर लगभग समान बना हुआ है, लेकिन साहेल क्षेत्र और दक्षिण एशिया में इसमें वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार हमले जारी रहने से क्षेत्रीय तनाव ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। इसमें तालिबान प्रशासन पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को समर्थन जारी रखने का आरोप लगाया गया है। टीटीपी ने पाकिस्तान के खिलाफ हमले बढ़ा दिए हैं, जिससे दोनों पक्षों के बीच सैन्य टकराव की स्थिति पैदा हुई है।

तालिबान लगातार आतंकवादी संगठनों को शरण देने के आरोपों से इनकार करता रहा है। हालांकि, सदस्य देशों को चिंता है कि यह संघर्ष चरमपंथी संगठनों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों को बढ़ा सकता है।

15 महीनों से अमेरिकी बॉर्डर पर कोई रिहाई नहीं: ट्रंप प्रशासन

सीमा पर सख्त सुरक्षा उपायों और सीमा पार करने की घटनाओं में आई ऐतिहासिक गिरावट की वजह से अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर अवैध रूप से प्रवेश करने वाले प्रवासियों को रिहा किए जाने का सिलसिला लगातार 15वें महीने भी शून्य रहा। ट्रंप प्रशासन ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (डीएचएस) और अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन ने बताया कि जुलाई में बॉर्डर पेट्रोल एजेंटों ने दक्षिण-पश्चिम सीमा पर 9,295 लोगों को पकड़ा। यह संख्या जून की तुलना में 6 प्रतिशत कम थी।

एजेंसियों ने बताया कि पूरे देश में बॉर्डर पेट्रोल द्वारा पकड़े गए लोगों की संख्या पिछले महीने की तुलना में 1 प्रतिशत घटकर 11,298 हो गई।

डीएचएस सेक्रेटरी मार्कवेन मुलिन ने कहा, "इस महीने भी नतीजे साफ हैं। राष्ट्रपति ट्रंप का बॉर्डर सिक्योरिटी एजेंडा व्यवस्था बहाल कर रहा है और अमेरिकी लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।"

उन्होंने कहा, "डीएचएस हमारे इमिग्रेशन कानूनों को लागू करने, सीमा को सुरक्षित करने और यह सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है कि जो लोग हमारे देश में अवैध रूप से प्रवेश करते हैं, उन्हें तुरंत वापस भेजा जाए।"

ट्रंप प्रशासन ने बताया कि जुलाई में दक्षिण-पश्चिमी सीमा पर पकड़े गए लोगों की संख्या बाइडेन प्रशासन के दौरान दर्ज किए गए मासिक औसत से 94 प्रतिशत कम थी। यह संख्या दिसंबर 2023 के सबसे ज्यादा स्तर से 96 प्रतिशत कम थी और जुलाई 2024 के छह दिनों में दर्ज की गई संख्या से भी कम थी।

जारी बयान के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष में जुलाई तक दक्षिण-पश्चिमी सीमा पर पकड़े गए लोगों की कुल संख्या 1992 से 2024 के वित्त वर्षों के दौरान किसी एक महीने के औसत से भी कम थी।

अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (सीबीपी) कमिश्नर रॉडनी एस. स्कॉट ने कहा, "साफ नीति, सख्त कार्रवाई और समर्पित फ्रंटलाइन कर्मचारी हमारी सीमाओं पर अच्छे नतीजे दे रहे हैं।"

स्कॉट ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप और सेक्रेटरी मुलिन के सहयोग से सीबीपी हमारे देश को अवैध रूप से सीमा पार करने वालों, खतरनाक लोगों और गैर-कानूनी ड्रग्स से सुरक्षित रख रहा है, साथ ही वैध व्यापार और यात्रा को भी जारी रखे हुए है। ये नतीजे दिखाते हैं कि जब सीमा सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता माना जाता है, तो क्या कुछ हासिल किया जा सकता है।"

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