ईरान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि ईरान ने उसके क्षेत्र की ओर मिसाइलें दागी थीं।
यूएई ने मंगलवार को दावा किया था कि उसे ईरान से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों का पता चला। इसके बाद ईरान की ओर से यह प्रतिक्रिया सामने आई।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने ने ईरान पर लगाए आरोपों पर खेद जताते हुए कहा, " यूएई का यह कदम अच्छे पड़ोसी के सिद्धांत के विपरीत है और क्षेत्रीय देशों के बीच विश्वास कायम करने तथा पश्चिम एशिया में असुरक्षा बढ़ने से रोकने के प्रयासों को नुकसान पहुंचाता है।"
उन्होंने क्षेत्रीय देशों से ईरान के खिलाफ ‘‘बेबुनियाद’’ आरोप लगाने से बचने की अपील की। बघाई ने कहा, " क्षेत्र में पहले से ही अमेरिका और इजरायल की उन गतिविधियों के कारण जटिल स्थिति बनी हुई है, जिन्हें ईरान क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए नुकसानदायक मानता है।" उन्होंने कथित फॉल्स-फ्लैग अभियानों के इतिहास का भी हवाला दिया।
चीन की समाचार एजेंसी सिंहुआ के अनुसार, यूएई के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को बताया था कि दोनों में से पहली मिसाइल देश के क्षेत्रीय जल से बाहर गिरी, जबकि दूसरी उसके क्षेत्रीय जल के भीतर गिरी। मंत्रालय ने कहा था कि देश हाई अलर्ट पर है और अपनी सुरक्षा, संप्रभुता तथा स्थिरता को प्रभावित करने वाले किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
यूएई ने कहा था कि मिसाइलों का निशाना समुद्री यातायात था। हालांकि, घटना में अब तक किसी के हताहत होने या नुकसान की सूचना नहीं है।
इस बीच, यूएई के विदेश मंत्रालय ने बुधवार तड़के सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि उसने ईरान के साथ अगले आदेश तक सभी व्यापार, वाणिज्यिक आदान-प्रदान और वित्तीय लेनदेन निलंबित कर दिए हैं।
रूस में एक भारतीय छात्र बुधवार को ड्रोन हमले में मामूली रूप से घायल हो गया। मास्को स्थित भारतीय दूतावास ने यह जानकारी दी।
दूतावास ने बताया कि घायल भारतीय नागरिक ऊफा स्थित बश्किर स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी का छात्र है और उसका अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। हालांकि, भारतीय मिशन ने छात्र का नाम और अन्य विवरण साझा नहीं किए।
हर साल हजारों भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए रूस जाते हैं, जिनमें से ज्यादातर चिकित्सा पाठ्यक्रमों की पढ़ाई करने जाते हैं।
मिशन ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि दूतावास छात्र और स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है तथा हर जरूरी सहायता मुहैया करा रहा है।
रूस की सरकारी मीडिया के अनुसार, एक ड्रोन ने ऊफा स्थित तेल रिफाइनरी को भी निशाना बनाया, जबकि स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि शहर पर हमला हुआ है।
कांगो में इबोला वायरस संक्रमण के मामलों की संख्या 5,000 से अधिक हो गई है। स्वास्थ्यकर्मियों ने संक्रमण के बढ़ने को लेकर चेतावनी दी है।
बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक देश के दूरदराज के क्षेत्रों में यह संक्रमण इतनी तेजी से फैल रहा है कि इसे रोकने की तमाम कोशिशें अब नाकाफी साबित हो रही हैं।
कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अब तक इबोला वायरस संक्रमण के 5,021 मामले सामने आए हैं और रविवार तक 2,378 लोगों की मौत हो चुकी है।
कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक रविवार तक 5,021 मामले सामने आए थे जिनमें 2,378 लोगों की मौत हो चुकी है।
यह संक्रमण इतिहास में किसी भी अन्य संक्रमण की तुलना में अधिक तेजी से फैला है। वर्ष 2014 से 2016 के बीच इस संक्रमण का प्रकोप अब तक का सबसे घातक था जिसमें 11,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच दूरी को पाटना चाहते हैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दूसरी ओर सोल भी चाहता है कि प्योंगयांग से रिश्ते सामान्य हों लेकिन नॉर्थ कोरिया फिलहाल इन बातों की फिक्र नहीं कर रहा है। उसने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ (यूएफएस) की आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के अधिकार का इस्तेमाल करेगा।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश के बाद अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने सैन्य अभ्यास की अवधि और दायरा कम करने का फैसला किया है।
योनहाप ने बताया कि उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए के अनुसार, प्योंगयांग ने अभ्यास को दुश्मन देशों की ओर से किए जा रहे आक्रामक सैन्य अभ्यास करार दिया और कहा कि वह अपने खिलाफ सैन्य खतरे को पूरी तरह निष्प्रभावी करने के लिए कदम उठाएगा।
उत्तर कोरिया ने ट्रंप के हालिया आदेश का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया। अमेरिका और दक्षिण कोरिया का वार्षिक सैन्य अभ्यास सोमवार से शुरू हुआ था और इसे 27 अगस्त तक चलना था। अब दोनों देशों ने इसे शुक्रवार को ही समाप्त करने का फैसला किया है। इसके अलावा, अभ्यास के तहत होने वाले कुछ मैदानी प्रशिक्षणों में भी कटौती की जाएगी।
ट्रंप ने रविवार को सोशल मीडिया पर कहा था कि अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास महंगे हैं और उत्तर कोरिया के प्रति गलत संदेश देते हैं। उन्होंने अपने और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के बीच अच्छे संबंधों का भी हवाला दिया था। उत्तर कोरिया लंबे समय से इन सैन्य अभ्यासों को अपने खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी के तौर पर देखता रहा है।
प्योंगयांग का कहना है कि अभ्यासों का स्वरूप लगातार अधिक वास्तविक युद्ध की तैयारी जैसा होता जा रहा है। इस बीच, दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने अभ्यास में कटौती के बावजूद अपनी संयुक्त रक्षा क्षमता और सैन्य समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया है।
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