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दुनिया की खबरें: ईरान ने ब्रिटेन के दावे को किया खारिज, कहा, 'आरएएफ फेयरफोर्ड से उसका कोई लेना-देना नहीं'

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने गुरुवार को ब्रिटिश सरकार के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड में अमेरिकी वायु सेना के बेस, रॉयल एयर फोर्स (आरएएफ) फेयरफोर्ड के पास हाल ही में घटी संदिग्ध गतिविधि में ईरान की "भूमिका" रही है।

फोटो: IANS
फोटो: IANS 

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने गुरुवार को ब्रिटिश सरकार के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड में अमेरिकी वायु सेना के बेस, रॉयल एयर फोर्स (आरएएफ) फेयरफोर्ड के पास हाल ही में घटी संदिग्ध गतिविधि में ईरान की "भूमिका" रही है।

सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को ब्रिटिश पुलिस ने एयर बेस के पास ग्लूसेस्टरशायर के ग्रामीण इलाके में 20-29 साल की उम्र के पांच संदिग्धों को "विस्फोटक और आतंकवाद से जुड़े अपराध" के शक में हिरासत में लिया था। उन्हें सूचना मिली थी कि तीन वैन बेस की ओर जा रही थीं।

अराघची ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन आरोपों का खंडन किया। इससे एक दिन पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने बीबीसी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, "इस बात के पुख्ता संकेत हैं कि आरएएफ फेयरफोर्ड में सप्ताहांत पर जो हुआ, उसमें ईरान की भूमिका थी, लेकिन बेशक यह अभी भी एक जटिल और गहन जांच का विषय है।"

सोमवार को, वैन में मिली चीजों की जांच और लंदन में उनसे जुड़े पतों की पड़ताल के बाद उन पांचों लोगों को पुलिस जमानत पर रिहा कर दिया गया।

अरागची ने कहा, "पीएम बर्नहम का कहना है कि यूके सरकार 'इस बात की पुष्टि कर सकती है कि हमारा मानना ​​है कि आरएएफ फेयरफोर्ड की घटना में ईरान की भूमिका थी।" उन्होंने आगे कहा, "मैं ईरान के इस विचार की पुष्टि कर सकता हूं कि विदेशी देशों के लिए काम करने वाले तथाकथित आतंकवादियों को रिहा करना ही सब कुछ बयां करता है। आप गलत दिशा में प्रयास कर रहे हैं।"

संदिग्धों को जमानत देने के ब्रिटेन के फैसले की अमेरिकी प्रशासन, जिनमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल थे, ने आलोचना की। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि वे इस कदम से "परेशान" थे।

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका बहुत जल्द ईरान से जीत जाएगा। उन्होंने दावा किया कि तेहरान की सैन्य क्षमताएं कमजोर हो गई हैं और वाशिंगटन ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज पर "लगभग पूर्ण नियंत्रण" स्थापित कर लिया है।

अमेरिका ने पाकिस्तानी कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध, ईरान से कथित संबंधों का आरोप

अमेरिका ने विभिन्न देशों के 10 लोगों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इन पर ईरान के रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बल लॉजिस्टिक्स (एमओडीएएफएल) के लिए हथियार और सैन्य उपकरण खरीदने में मदद करने का आरोप है। एक रिपोर्ट के मुताबिक इनमें पाकिस्तानी कंपनियों का भी जिक्र है।

'द मीडिया लाइन' ने अपने विश्लेषण के आधार पर दावा किया कि जिन लोगों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनमें एक पाकिस्तानी व्यवसायी और उससे जुड़ी तीन कंपनियां शामिल हैं।

इसके अलावा, यह व्यवसायी पाकिस्तान स्थित 'कैवेलियर ग्रुप' का चेयरमैन है। ये एक प्राइवेट डिफेंस कंपनी है जो पाकिस्तान और अन्य देशों में काम करती है।

अमेरिका का आरोप है कि इस व्यक्ति और कंपनी ने ईरानी रक्षा मंत्रालय के लिए बिचौलिए का काम किया और हथियारों की खरीद-फरोख्त में मदद की।

रिपोर्ट के अनुसार, यह व्यवसायी पाकिस्तान में 'कैवेलियर डायनामिक्स प्राइवेट लिमिटेड' का मुख्य शेयरधारक और चीफ एग्जीक्यूटिव है। वह सऊदी अरब और तुर्की की उन सहयोगी कंपनियों से भी जुड़ा है जिन पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।

दावा किया गया है कि सऊदी अरब स्थित 'कैवेलियर डायनामिक्स फॉर टेक्नोलॉजीज' के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई में सऊदी ने मदद की।

अमेरिका का आरोप है कि व्यवसायी ने एमओडीएएफएल को वित्तीय, सामग्री और तकनीकी सहायता मुहैया कराई या किसी तरह पहुंचाने की कोशिश की। एमओडीएएफएल ईरान के सशस्त्र बलों के लिए हथियारों के रिसर्च, उत्पादन और खरीद का काम देखता है।

अमेरिकी सरकार ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम में शामिल संगठनों पर भी नजर रखती है।

इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वाशिंगटन उन लोगों और संस्थाओं को निशाना बनाना जारी रखेगा जो ईरान को मदद पहुंचाते हैं। यह 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत किया जाएगा, जिसे अगस्त में ईरानी सरकार के आर्थिक नेटवर्क को बाधित करने के लिए शुरू किया गया था।

ट्रंप ने इराक से अमेरिकी सेना की वापसी की सराहना की

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को इराक से अंतिम तौर पर अमेरिकी सैनिकों की वापसी का की सराहना करते हुए कहा कि यह “नरक की बेहद महंगी यात्रा के अंत” का प्रतीक है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह एक लंबा समय रहा है। शुरुआत में हमें खराब फैसले लेने के कारण इस मुश्किल स्थिति में उलझना पड़ा था, लेकिन जल्द ही यह इतिहास का हिस्सा होगा।’’

उन्होंने कहा कि यह बदलाव अमेरिका और इराक के लिए जीत है तथा इस्लामिक स्टेट समूह पर जीत का भी संकेत है, जिसके खिलाफ अमेरिकी सैनिक एक दशक से अधिक समय से लड़ रहे थे।

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