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दुनिया की खबरें: ईरान ने कहा, अमेरिका को बहुत पछताना पड़ेगा और युद्ध में ईरान में 1,230 लोगों की मौत

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी नौसेना पर हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत आईरिस देना पर हमले के लिए ‘समुद्र क्षेत्र में अत्याचार’ का आरोप लगाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘मेरी बात लिखकर ले लो। अमेरिका को अपने किए पर ‘बुरी तरह पछताना’ पड़ेगा।’’

फोटो: सोशल मीडिया
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ईरान ने बृहस्पतिवार सुबह इजराइल और अमेरिका के कई अड्डों पर नये सिरे से हमले किए और धमकी दी कि हिंद महासागर में ईरान के एक युद्धपोत को टॉरपीडो के हमला करके डुबोने के लिए अमेरिका को बहुत पछताना पड़ेगा।

ईरान के एक धार्मिक नेता ने ‘‘ट्रंप का खून बहाने’’ का आह्वान किया, वहीं इजराइल ने कहा कि उसने तेहरान पर व्यापक हमला शुरू कर दिया है।

इजराइल ने कई मिसाइल से हमले होने की घोषणा करते हुए तेल अवीव और यरूशलम में सायरन बजाए। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने कहा कि हमलों में अमेरिकी अड्डों को भी निशाना बनाया गया।

इजराइली सेना ने कहा कि उसने लेबनान में ईरानियों द्वारा समर्थित हिजबुल्ला चरमपंथी समूह से जुड़े 80 ठिकानों पर पिछले 24 घंटे में हमला किया है। उसने कहा कि ईरान पर हमलों में एक बैलिस्टिक मिसाइल लांच स्थल और अन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया गया।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी नौसेना पर हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत आईरिस देना पर हमले के लिए ‘समुद्र क्षेत्र में अत्याचार’ का आरोप लगाया। इस हमले में कम से कम 87 ईरानी मारे गए। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘मेरी बात लिखकर ले लो। अमेरिका को अपने किए पर ‘बुरी तरह पछताना’ पड़ेगा।’’

ईरानी सरकारी टेलीविजन ने ईरान के अयातुल्ला (धर्मगुरु) अब्दुल्ला जवादी अमोली का संदेश बृहस्पतिवार को प्रसारित किया, जिसमें ‘‘इजराइलियों और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप’’ का खून बहाए जाने का आह्वान किया गया।

अयातुल्ला ने कहा, ‘‘इस दौर के इमाम कहते हैं, दमनकारी अमेरिका से लड़ो, उसके खून का जिम्मा मेरे कंधों पर है।’’

इस हमले की इजराइल द्वारा घोषणा किए जाने से कुछ ही समय पहले उसकी सेना ने कहा कि उसने लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्ला चरमपंथी समूह को निशाना बनाते हुए नए हमले शुरू कर दिए हैं।

अमेरिका और इजराइल ने बुधवार को ईरान के सुरक्षा बलों और प्रशासनिक संस्थानों को निशाना बनाते हुए बमबारी तेज कर दी थी।

ईरान पर हमलों की तीव्रता इतनी भीषण थी कि सरकारी टेलीविजन ने घोषणा की कि संघर्ष की शुरुआत में मारे गए ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए आयोजित शोक समारोह को स्थगित करना होगा। अयातुल्ला अली खामेनेई के पूर्ववर्ती अयातुल्ला रुहोल्ला खोमैनी के अंतिम संस्कार में 1989 में लाखों लोग शामिल हुए थे।

अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को ईरान के प्रमुख नेतृत्व, मिसाइल भंडार और परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाते हुए युद्ध की शुरुआत की और यह संकेत दिया कि उनका लक्ष्य ईरान में सरकार को गिराना है। सटीक लक्ष्य और समयसीमा में बार-बार बदलाव के कारण इस युद्ध के अनिश्चित काल तक जारी रहने की आशंका है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध के मोर्चे पर ‘‘शानदार प्रदर्शन’’ के लिए बुधवार को अमेरिकी सेना की प्रशंसा की। वहीं, अमेरिकी सीनेट में उनके सहयोगी रिपब्लिकन सांसदों ने ईरान के मुद्दे पर ट्रंप का साथ दिया और युद्ध रोकने की मांग वाले प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

संघर्ष बढ़ने के साथ ही ईरान ने बहरीन, कुवैत और इजराइल पर हमले किए। तुर्किये ने कहा कि उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की रक्षा प्रणाली ने ईरान से दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को तुर्किये के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही रोक दिया।

अधिकारियों के अनुसार, इस युद्ध में ईरान में 1,000 से अधिक, लेबनान में 70 से अधिक और इजराइल में लगभग 12 लोग मारे गए हैं। युद्ध ने दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति को बाधित कर दिया है, अंतरराष्ट्रीय नौवहन बाधित हुआ है जबकि पश्चिम एशिया में लाखों यात्री फंसे हुए हैं।

ईरान के अर्द्धसैनिक ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ द्वारा ‘‘क्षेत्र के सैन्य और आर्थिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने’’ की धमकी के बाद पड़ोसी देश बृहस्पतिवार को संभावित खतरों को लेकर सतर्क हैं।

कतर के गृह मंत्रालय ने कहा कि अधिकारी दोहा में अमेरिकी दूतावास के पास रहने वाले निवासियों को एहतियात के तौर पर निकाल रहे हैं, हालांकि उन्होंने इस बारे में और अधिक जानकारी नहीं दी।

संयुक्त अरब अमीरात के दुबई शहर में बृहस्पतिवार सुबह लड़ाकू विमानों की आवाज सुनी गई जबकि कुवैत के तट पर हुए एक नए हमले से वाणिज्यिक जहाजों को खतरे की आशंका बढ़ गई है।

ब्रिटेन की सेना द्वारा संचालित ‘यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर’ के अनुसार, बृहस्पतिवार तड़के इलाके में एक धमाका हुआ। केंद्र ने बताया कि एक टैंकर पर हमला हुआ था लेकिन उन्होंने हमले का कारण नहीं बताया। ईरान पूर्व में जहाजों पर लिम्पेट माइंस लगाकर हमला कर चुका है।

ईरान के हमलों के कारण ओमान और होर्मूज जलडमरूमध्य से यातायात बाधित होने से तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और इसके कारण वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई है।

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अमेरिका-इजराइल युद्ध में ईरान में 1,230 लोगों की मौत

अमेरिका-इजराइल के साथ जारी युद्ध में ईरान में मरने वालों की संख्या कम से कम 1,230 हो गई है। ईरान की एक सरकारी एजेंसी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

‘ईरान्स फाउंडेशन ऑफ मार्टर्स एंड वेटरन्स अफेयर्स’ ने आंकड़े जारी करते हुए कहा कि इस संघर्ष में 1,230 लोगों के मारे जाने की सूचना है।

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अमेरिका, उसके सहयोगी शाहेद ड्रोन का मुकाबला करने में यूक्रेन की मदद चाहते हैं: जेलेंस्की

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि अमेरिका और पश्चिम एशिया में उसके सहयोगी ईरान के शाहेद ड्रोन का मुकाबला करने में यूक्रेन की मदद चाहते हैं।

जेलेंस्की ने बुधवार देर रात कहा कि अमेरिका समेत कई देशों ने ईरानी ड्रोन हमलों से बचाव के लिए यूक्रेन से मदद मांगी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हाल के दिनों में संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, जॉर्डन और कुवैत के नेताओं से संभावित सहयोग के बारे में बात की है।

रूस ने लगभग चार साल पहले अपने पड़ोसी देश यूक्रेन पर हमला करने के बाद से उस पर हजारों शाहेद ड्रोन दागे हैं। ईरान ने भी अमेरिकी-इजराइली संयुक्त हमलों के जवाब में इसी प्रकार के ड्रोन दागे हैं।

जेलेंस्की ने कहा कि ईरान के ड्रोन हमलों का मुकाबला करने में यूक्रेन की सहायता तभी प्रदान की जायेगी जब इससे यूक्रेन की अपनी सुरक्षा कमजोर न हो और इससे रूसी आक्रमण को रोकने के लिए कीव के राजनयिक प्रयासों को बल मिले।

उन्होंने कहा, ‘‘हम उन लोगों को युद्ध से बचाने में मदद करते हैं जो हमारी मदद करते हैं, यूक्रेन को रूस के साथ युद्ध का न्यायपूर्ण अंत करने में मदद करते हैं।’’

जेलेंस्की ने कहा कि ईरान युद्ध ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप के सबसे बड़े संघर्ष से अंतरराष्ट्रीय ध्यान हटा दिया है और इस सप्ताह रूस और यूक्रेन के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में होने वाली वार्ता के एक नए दौर को स्थगित करना पड़ा।

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ईरान पर हमलों के बाद लेबनान में शांति पर संकट, हिजबुल्ला से बढ़ा तनाव

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों में मौत और फिर देश पर लगातार हो रहे हमलों ने लेबनान में बड़ी मुश्किल से बहाल शांति को और अधिक खतरे में डाल दिया है।

विश्लेषकों का कहना है कि ईरान समर्थित शिया अर्धसैनिक संगठन हिजबुल्ला की प्रतिक्रिया देश को एक बार फिर बड़े संघर्ष और अस्थिरता की ओर धकेल सकती है।

खामेनेई की मौत के बाद लेबनान से सक्रिय हिजबुल्ला ने उत्तरी इजराइल की ओर रॉकेट दागे। इसके जवाब में इजराइल ने दक्षिणी लेबनान, बेरूत और पूर्वी बेका घाटी में संगठन के ठिकानों पर नए हवाई हमले किए। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही हिजबुल्ला अब पहले जितना शक्तिशाली नहीं रहा, फिर भी उसके कदम लेबनान को गंभीर संकट में डाल सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, हिजबुल्ला फिलहाल अमेरिका और इजराइल के खिलाफ ईरान के युद्ध में प्रभावी सैन्य सहयोगी बनने की स्थिति में नहीं है, लेकिन उसकी गतिविधियां लेबनान को अस्थिर कर सकती हैं। इसके साथ ही यह आशंका भी जताई जा रही है कि हिजबुल्ला की प्रतिक्रिया को बहाना बनाकर इजराइल या सीरिया लेबनान में जमीनी अभियान शुरू कर सकते हैं।

हिजबुल्ला की स्थापना 1985 में 1979 की ईरानी क्रांति से प्रेरित होकर की गई थी। संगठन ने ईरान के क्रांतिकारी नेता अयातुल्ला रुहोल्ला खोमैनी के प्रति निष्ठा जताई थी और इजराइल के खिलाफ संघर्ष को अपना प्रमुख उद्देश्य बताया था। पिछले चार दशकों में इस संगठन ने लेबनान की राजनीति और विदेश नीति पर गहरा प्रभाव बनाए रखा।

हालांकि अक्टूबर 2023 के बाद इजराइल के लगातार हमलों में उसके कई शीर्ष नेता मारे गए, जिससे उसकी ताकत कमजोर पड़ी। इसके बाद कई लोगों को उम्मीद थी कि लेबनान में हिजबुल्ला का प्रभाव कम हो जाएगा।

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