अमेरिका से बढ़ते तनाव और बातचीत के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने ईरानियों से खास अपील की। 1979 की इस्लामिक क्रांति की 47वीं सालगिरह से पहले एकजुटता दिखाने और "दुश्मन को निराश करने" की अपील की।
टेलीविजन पर प्रसारित संबोधन में, खामेनेई ने कहा कि राष्ट्रीय शक्ति मिसाइलों और विमानों जैसे मिलिट्री हार्डवेयर के बजाय "दृढ़ संकल्प और मुंह तोड़ जवाब देने" पर ज्यादा निर्भर करती है। उनकी यह टिप्पणी तब आई है जब ईरान इस्लामिक क्रांति की जीत का जश्न मनाने के लिए बुधवार को देश भर में रैलियां आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। खामेनेई ने कहा, "जब तक दुश्मन निराश नहीं होता, एक राष्ट्र उत्पीड़न का शिकार होता है।"
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने ईरानी सुप्रीम लीडर के हवाले से बताया कि "दुश्मन को निराश होना ही होगा।" उन्होंने सालाना मार्च को सम्मान का प्रदर्शन बताया जो विदेशी शक्तियों को ईरानी मामलों में दखल देने की महत्वाकांक्षाओं से "पीछे हटने" के लिए मजबूर करता है।
मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य जमावड़े और तेहरान के खिलाफ लगातार धमकियों के बीच खामेनेई के ये शब्द यूएस के साथ बढ़े तनाव को दर्शाते हैं।
शुक्रवार को ओमान के मस्कट में ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडलों के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता के बावजूद तल्खी बरकरार है, जिससे समझौते की संभावना अनिश्चित बनी हुई है।
खामेनेई ने उम्मीद जताई कि इस साल की वर्षगांठ "अन्य राष्ट्रों, सरकारों और शक्तियों को ईरानी लोगों के प्रति विनम्रता और सम्मान दिखाने" के लिए मजबूर करेगी।
Published: undefined
एक छोटा सा देश लेकिन हठ ऐसी है कि दुनिया के बड़े-बड़े कुछ कहने-सुनने से पहले सोचते विचारते हैं। इस देश का नाम है डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) और जिसे हम उत्तर कोरिया के नाम से जानते हैं। 10 फरवरी 2005 को इस देश ने पहली बार आधिकारिक रूप से यह स्वीकार किया कि इसके पास परमाणु हथियार हैं।
यह घोषणा प्योंगयांग की सरकारी समाचार एजेंसी के माध्यम से सामने आई और तत्काल ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई। शीत युद्ध के बाद के दौर में यह बयान वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था, क्योंकि इससे परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) और कूटनीतिक प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।
उत्तर कोरिया की यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय में आई जब वह अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनावपूर्ण वार्ताओं में उलझा हुआ था। छह-पक्षीय वार्ता, जिसमें अमेरिका, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, रूस और उत्तर कोरिया शामिल थे, का उद्देश्य कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करना था। लेकिन 2005 की इस घोषणा ने साफ कर दिया कि उत्तर कोरिया अब केवल परमाणु तकनीक पर काम करने का संकेत नहीं दे रहा, बल्कि स्वयं को एक परमाणु संपन्न राष्ट्र के रूप में पेश कर रहा है।
अमेरिका ने इस बयान को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सीधी चुनौती माना। वाशिंगटन का तर्क था कि उत्तर कोरिया का परमाणु हथियार रखना न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाएगा, बल्कि अन्य देशों को भी परमाणु हथियार विकसित करने के लिए प्रेरित करेगा। जापान और दक्षिण कोरिया में भी इस घोषणा के बाद सुरक्षा चिंताएं तेज हो गईं, क्योंकि दोनों देश उत्तर कोरिया की मिसाइल क्षमता की जद में आते हैं।
चीन, जिसे उत्तर कोरिया का पारंपरिक सहयोगी माना जाता है, इस घोषणा के बाद असहज स्थिति में दिखा। बीजिंग ने संयम और वार्ता पर जोर दिया, क्योंकि उसे आशंका थी कि कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ने से क्षेत्रीय स्थिरता और उसकी आर्थिक व कूटनीतिक प्राथमिकताएं प्रभावित होंगी। रूस ने भी परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की आवश्यकता पर बल दिया, लेकिन साथ ही सैन्य टकराव से बचने की सलाह दी।
Published: undefined
अमेरिका में ब्रिटिश राजदूत रहे पीटर मैंडलसन और अपराधी जेफ्री एप्स्टीन के संबंधों का खुलासा होने के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर की कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है। वह लेबर पार्टी को मनाने की कोशिश कर रहे हैं कि वह महज डेढ़ साल के कार्यकाल के बाद उन्हें पद से न हटाए।
रविवार को स्टार्मर के मुख्य सचिव को पद से हटा दिया गया। इसके अलावा वह लेबर पार्टी के सांसदों का समर्थन भी खोते जा रहे हैं।
वह पार्टी में अपनी खोई हुई साख को फिर से हासिल करने के लिए सोमवार को लेबर पार्टी के सांसदों को संबोधित करेंगे।
यह राजनीतिक विवाद एस्प्टीन से संबंध होने की बात जानते हुए भी मैंडलसन को 2024 में राजनयिक रूप से सबसे अहम देश माने जाने वाले अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त करने के स्टार्मर के फैसले से जुड़ा है।
स्टार्मर ने कुछ ईमेल के जरिये मैंडलसन की एप्स्टीन से दोस्ती की बात सामने आने के बाद सितंबर में उन्हें पद से हटा दिया था। ये ईमेल 2008 के यौन उत्पीड़न मामलों में एप्स्टीन को दोषी ठहराए जाने के बाद प्रकाशित हुए थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि स्टार्मर को समझ से काम लेते हुए 72 वर्षीय मैंडेलसन को नियुक्त नहीं करना चाहिए था, जिनका नाम पहले ही कई विवादों और घोटालों में सामने आ चुका था।
अमेरिका में जारी की गईं नयी एप्स्टीन फाइल में दोनों के संबंधों से जुड़े और अधिक विवरण सामने आए हैं, जिसके बाद स्टार्मर पर दबाव बढ़ गया है। स्टार्मर ने “मैंडलसन के झूठ पर यकीन करने” के लिए पिछले ससप्ताह माफी मांगी थी।
उन्होंने मैंडलसन की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज जारी करने का वादा किया था। सरकार का कहना है कि इन दस्तावेजों से पता चलेगा कि मैंडलसन ने किस तरह अधिकारियों को एप्स्टीन से अपने संबंधों के बारे में गुमराह किया था।
स्टार्मर के मुख्य सचिव मॉर्गन मैकस्वीनी ने मैंडलसन की नियुक्ति की जिम्मेदारी लेते हुए रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने कहा, “मैंने प्रधानमंत्री को वह नियुक्ति करने की सलाह दी थी और मैं उस सलाह की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं।”
साल 2020 में स्टार्मर के लेबर पार्टी के नेता बनने के बाद से मैकस्वीनी उनके सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी रहे हैं। वह जुलाई 2024 में लेबर पार्टी की बड़ी चुनावी जीत के प्रमुख रणनीतिकार माने जाते हैं। हालांकि, पार्टी के अंदर कुछ लोग इसके बाद हुईं कई चूक के लिए उन्हें जिम्मेदार मानते हैं।
Published: undefined