अमेरिकी सीनेट के दो वरिष्ठ सदस्यों ने रविवार को चेतावनी देते हुए कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन में एक नए सैन्य हमले की तैयारी करते हुए शांति वार्ता में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगले दो सप्ताह उस युद्ध के भविष्य को आकार दे सकते हैं जिसके कारण कई शहर पहले ही तबाह हो गये हैं और लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं।
रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात करने तथा रूस की बमबारी से तबाह हुए इलाकों का दौरा करने के बाद पेरिस में एसोसिएटेड प्रेस से बात की।
पेरिस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ वार्ता के लिए पहुंचे सीनेटरों ने चेतावनी दी कि नए हमले को रोकने का अवसर समाप्त हो रहा है।
ग्राहम ने पुतिन के बारे में कहा, ‘‘इस यात्रा से मुझे पता चला कि वह और अधिक युद्ध की तैयारी कर रहे हैं।’’
ब्लूमेंथल ने कानून में प्रस्तावित प्रतिबंधों को कठोर बताया और कहा कि यह रूस की अर्थव्यवस्था को ‘‘एक व्यापार द्वीप’’ बना देगा।
उन्होंने कहा, ‘‘यह पुतिन और विश्व के लिए कठिन समय है, क्योंकि रूस एक नया आक्रमण शुरू कर रहा है।’’
वह द्विदलीय प्रतिबंध विधेयक की बात कर रहे थे, जिसे लगभग पूरी अमेरिकी सीनेट का समर्थन प्राप्त है, लेकिन वाशिंगटन में इसे अब भी अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।
यह उन देशों पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने की बात करता है जो रूस से तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य चीजें खरीद रहे हैं। यह चीन और भारत जैसे देशों को लक्षित करेगा जिनका रूस के साथ लगभग 70 प्रतिशत ऊर्जा व्यापार होता है और जिनसे मॉस्को को अधिक धन मिलता है।
ग्राहम ने कहा, ‘‘सीनेट में यह मेरे जीवन का अब तक का सबसे कठोर विधेयक है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया के पास पुतिन के खिलाफ कार्रवाई करने के अनेक उपाय हैं। हम उनकी युद्ध मशीन को सहारा दे रहे चीन और भारत को लक्षित करने जा रहे हैं।’’
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मलेशिया की यात्रा पर पहुंचे सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की भारत की नीति पर जोर देते हुए कहा कि “पानी और खून एक साथ नहीं बह सकता।” कुआलालंपुर स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोमवार को यह जानकारी दी।
उच्चायोग ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में बताया कि जनता दल यूनाइटेड (जदयू) सांसद संजय कुमार झा के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कानून एवं संस्थागत सुधार विभाग में उप मंत्री वाईबी एम. कुला सेगरन के नेतृत्व वाले डेमोक्रेटिक एक्शन पार्टी के प्रतिनिधियों और ‘पार्टी केदिलन राक्यत इन मलेशिया’ के सदस्यों से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृष्टिकोण और राष्ट्रीय संकल्प से अवगत कराया गया।
पोस्ट के मुताबिक, “चर्चा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ प्रतिक्रिया पर केंद्रित थी। आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की भारत की नीति पर जोर दिया गया और यह स्पष्ट किया गया कि पानी और खून एक साथ नहीं बह सकता।”
प्रतिनिधिमंडल की यह प्रतिक्रिया पहलगाम आतकंवादी हमले के बाद भारत के सिंधु जल संधि को स्थगित करने के सिलसिले में थी। नयी दिल्ली ने दो टूक कहा है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को शह देना बंद नहीं करता, तब तक संधि स्थगित रहेगी।
विश्व बैंक की मध्यस्थता में 1960 में हुई इस संधि में सिंधु और इसकी पांच सहायक नदियों-सतलुज, व्यास, रावी, झेलम और चिनाब- के पानी के इस्तेमाल के लिए दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच जल बंटवारे और सूचनाओं के आदान-प्रदान के खाके को परिभाषित किया गया है।
उच्चायोग ने बताया कि संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने वाईबी सिम त्जे त्जिन के नेतृत्व वाले पार्टी केडिलन राक्यत के प्रतिनिधिमंडल के साथ “रचनात्मक वार्ता” की।
उसने पोस्ट किया, “आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की भारत की नीति को रेखांकित किया गया और सीमा पार खतरों के खिलाफ हमारी राष्ट्रीय एकता की पुष्टि की गई।”
उच्चायोग ने कहा, “केडिलन के प्रतिनिधियों ने प्रतिनिधिमंडल की ओर से दिए गए विस्तृत स्पष्टीकरण की सराहना की और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में आगे की राह तथा प्रत्येक राष्ट्र की जिम्मेदारियों पर रचनात्मक चर्चा की।”
उच्चायोग के अनुसार, संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने पार्टी केडिलन राक्यत के साथ बैठक के दौरान राष्ट्रीय एकता के लिए उप मंत्री वाईबी सरस्वती कंडासामी के साथ भी बातचीत की।
एक बयान के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ कतई बर्दाश्त न करने के भारत के सिद्धांतबद्ध और अडिग रुख को रेखांकित किया।
बयान के अनुसार, यहां प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ बातचीत में प्रतिनिधिमंडल ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ रुख का जिक्र किया और इस बात पर जोर दिया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भविष्य में आतंकवादी हमलों का जवाब देने और उन्हें नाकाम करने के भारत के अधिकार का प्रदर्शन था।
बयान में कहा गया है कि भारतीय मूल के मलेशियाई मुसलमानों सहित सभी प्रवासी भारतीयों ने आतंकवाद की स्पष्ट रूप से निंदा की।
इसमें कहा गया है कि संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने कुआलालंपुर में रामकृष्ण मिशन का दौरा किया और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।
बयान के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने पंचवटी प्रार्थना कक्ष और निवेदिता हाउस का भी दौरा किया।
इसमें कहा गया है कि संसदसीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (एनडीसी), नयी दिल्ली के 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भी बातचीत की, जो मौजूदा समय में मलेशिया के अध्ययन दौरे पर है।
बयान के अनुसार, संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने तोरण द्वार का भी दौरा किया, जो भारत के लोगों की ओर से मलेशिया को दिया गया एक उपहार है। इसका उद्घाटन 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मलेशिया यात्रा के दौरान किया गया था।
भारतीय उच्चायोग ने कहा कि कुआलालंपुर के ‘लिटिल इंडिया’ में स्थित तोरण द्वार न सिर्फ एकता, बल्कि भारत और मलेशिया के बीच मजबूत एवं लगातार जारी दोस्ती का प्रतीक है।
प्रतिनिधिमंडल में झा के अलावा सांसद अपराजिता सारंगी, अभिषेक बनर्जी, बृज लाल, जॉन ब्रिटास, प्रदान बरुआ, हेमांग जोशी, पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद और पूर्व राजदूत मोहन कुमार शामिल हैं।
यह प्रतिनिधिमंडल उन सात बहुदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडलों में से एक है, जिन्हें भारत ने दुनिया के 33 देशों की राजधानी की यात्रा कर आतंकवाद से पाकिस्तान के संबंधों को उजागर करने का जिम्मा सौंपा है।
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तिब्बत में भूस्खलन के बाद तीन लोगों की मौत हो गई और सात अन्य लापता हो गए। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
जल एवं प्राकृतिक संसाधन विभाग के विशेषज्ञों ने बताया कि रविवार रात तिब्बत के कामदो शहर के मुता कस्बे में भूस्खलन के बाद लगभग दो लाख घन मीटर मिट्टी और चट्टानें अपनी जगह से खिसक गईं।
एक अधिकारी ने बताया कि भूस्खलन के कारण दो लोग घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि लगभग 500 बचावकर्मी, चिकित्साकर्मी और दमकलकर्मी राहत एवं बचाव अभियान में शामिल हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि क्षेत्र में फिर से भूस्खलन होने का खतरा है।
शहर प्रशासन ने आपातकालीन आपदा राहत के लिए 50 लाख युआन (लगभग 696,000 अमेरिकी डॉलर) आवंटित किए हैं।
आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय ने भौगोलिक आपदाओं के लिए स्तर-चार आपातकालीन प्रतिक्रिया शुरू की है और स्थानीय बचाव प्रयासों में सहायता के लिए एक टीम भेजी है।
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सिंगापुर में भारतीय मूल के दो नागरिकों समेत नौ लोगों पर सोमवार को जालसाजों को कथित तौर पर अपने बैंक खातों का इस्तेमाल करने की अनुमति देने के आरोप लगाए गए।
‘द स्ट्रेट्स टाइम्स’ की खबर के मुताबिक, आरोपियों में युवन थिरुमारन (24) और अमरजीत सिंह जुगिंदर सिंह (50) समेत छह पुरुष और तीन महिलाएं शामिल हैं।
इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने आपराधिक गिरोह को धन शोधन में मदद करने के लिए अपने बैंक खाते बेच दिए।
सिंगापुर में आपराधिक आचरण या धोखाधड़ी से लाभ कमाने में किसी अन्य व्यक्ति की मदद करने के दोषी व्यक्ति को तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा देने का प्रावधान है।
सिंगापुर में जालसाजों ने 2024 में लोगों को 1.1 अरब सिंगापुर डॉलर की चपत लगाई, जो 2023 के 65.18 करोड़ सिंगापुर डॉलर के आंकड़े से 70 प्रतिशत अधिक है। यह दिखाता है कि देश में जालसाजी के मामले में काफी बढ़ रहे हैं।
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