
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने एक बार फिर युद्ध के नियमों को दरकिनार करते हुए यूक्रेन के आवासीय क्षेत्रों पर हमला किया है। रूस ने एंबुलेंस स्टेशन, रिसर्च संस्थान, होटल को निशाना बनाया गया। इन हमलों में 13 लोगों की जान चली गई।
जेलेंस्की ने दावा किया कि पूरी रात रूसी ड्रोन ने यूक्रेन में तबाही मचाई। रूस ने यूक्रेन पर 70 से ज्यादा मिसाइलें दागीं। इनमें लगभग आधी बैलिस्टिक मिसाइलें थीं।
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट पर लिखा, ''रूस के हमलों के बाद राहत और बचाव कार्रवाई कीव में अभी भी जारी है। बचाव दल मलबा हटा रहे हैं, लोगों की तलाश कर रहे हैं और जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। शहर में 20 से ज्यादा जगहों पर नुकसान हुआ है, जिनमें से ज्यादातर आम लोगों के रहने वाले घर हैं। इसके अलावा एक एंबुलेंस स्टेशन, एक रिसर्च संस्थान, एक होटल और कई कारोबारों को भी नुकसान पहुंचा है।''
जेलेंस्की ने कहा कि जानकारी के मुताबिक, रूसी हमले में 13 लोगों की जान चली गई। मैं उनके परिवारों और अपने प्रियजनों को खोने वालों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। 90 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। जिन लोगों को इलाज और मदद की जरूरत है, उन्हें हर संभव सहायता दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि खारकीव क्षेत्र में एक बच्चे सहित पांच लोग घायल हुए हैं। वहीं कीव क्षेत्र में भी दो लोग घायल हुए हैं, जहां नागरिक ढांचे को भी निशाना बनाया गया। रात के दौरान रूस ने सूमी, नीपर, जापोरिज्जिया और चेर्कासी क्षेत्रों पर भी हमले किए।
जेलेंस्की ने बताया कि पूरी रात रूस ने यूक्रेन पर 70 से ज्यादा तरह-तरह की मिसाइलें दागीं। इनमें लगभग आधी बैलिस्टिक मिसाइलें थीं। इसके साथ ही करीब 500 हमला करने वाले ड्रोन भी भेजे गए, जिनमें जेट इंजन वाले 'शाहेद' ड्रोन भी शामिल थे। इस हमले का मुख्य निशाना कीव था। हमारी वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया, लेकिन सभी को रोक पाना संभव नहीं हो सका।
उन्होंने कहा कि यूक्रेन के लिए एयर डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति सबसे ज्यादा जरूरी और बेहद अहम है। 'पर्ल' कार्यक्रम के लिए मिलने वाला हर सहयोग बहुत मायने रखता है, क्योंकि इससे सीधे लोगों की जान बचाने में मदद मिलती है। एयर डिफेंस को लेकर हमारे साझेदार देशों के साथ होने वाला हर द्विपक्षीय समझौता वास्तव में बड़ा फर्क पैदा करता है। मैं उन सभी नेताओं का आभारी हूं, जो हमारी मदद कर रहे हैं।
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नेपाल में जून 2026 के दौरान हवाई मार्ग से पहुंचने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या ने नया रिकॉर्ड कायम किया है। अमेरिकी-ईरान युद्ध के कारण वैश्विक यात्रा प्रभावित होने के बीच भारतीयों ने नेपाल के पर्यटन उद्योग को मजबूती प्रदान की है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड (एनटीबी) ने गुरुवार को एक आंकड़ा जारी करते हुए बताया कि जून 2026 में नेपाल में कुल 91,363 विदेशी पर्यटक पहुंचे, जिनमें 41,809 भारतीय थे। यह कुल विदेशी पर्यटकों का लगभग 46 प्रतिशत है और किसी एक महीने में नेपाल पहुंचने वाले भारतीय पर्यटकों की अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।
इससे पहले मई 2026 में 40,782 भारतीय पर्यटक हवाई मार्ग से नेपाल पहुंचे थे, जो उस समय तक का रिकॉर्ड था। जून में यह आंकड़ा उससे भी आगे निकल गया।
नेपाल लंबे समय से भारतीय पर्यटकों का प्रमुख गंतव्य रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में कुल विदेशी पर्यटकों में भारतीयों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है। भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते आउटबाउंड पर्यटन बाजारों में शामिल है। हर वर्ष तीन करोड़ से अधिक भारतीय विदेश यात्रा करते हैं और अगले दशक में इस बाजार का आकार लगभग तीन गुना होने का अनुमान है।
नेपाल के पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बढ़ते बाजार में नेपाल अपनी हिस्सेदारी थोड़ी भी बढ़ा लेता है, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिल सकता है।
भारतीय पर्यटकों के लिए सेवाएं देने वाली एक ट्रैवल एजेंसी के सेल्स एवं मार्केटिंग अधिकारी किरण नेउपाने ने कहा कि अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद लंबी दूरी की उड़ानों का किराया ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण महंगा हो गया है। ऐसे में भारतीय पर्यटक अपेक्षाकृत कम खर्च वाले गंतव्य के रूप में नेपाल को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई के तदफीन यानी अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। 4 जुलाई से 9 जुलाई के बीच रस्म अदायगी होगी। स्थानीय मीडिया के अनुसार, अपने नेता को आखिरी विदाई देने से पहले तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसी परिसर में देश-विदेश से आने वाले लोगों और प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी में खामेनेई को श्रद्धांजलि दी जाएगी
न्यूज एजेंसी तसनीम ने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का संदेश जारी किया। इसमें उन्होंने कहा, "खामेनेई की मौत ने साबित किया है कि ईरान की व्यवस्था आस्था, आदर्शों और देश की जनता की मजबूत इच्छाशक्ति पर टिकी हुई है।"
उन्होंने सभी ईरानियों से, चाहे उनका जातीय, धार्मिक या राजनीतिक मतभेद से परे हो जनाजे में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने ईरान की एकजुटता दिखाना जरूरी है।
ईरानी प्रसारक प्रेस टीवी के अनुसार, ईरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के परिवार के पांच सदस्यों के ताबूत एक साथ रखे गए। इनमें खामेनेई, उनकी बेटी, बहू, पोते और दामाद के ताबूत शामिल हैं।
इन सभी का अंतिम संस्कार खामेनेई के राजकीय कार्यक्रम के तहत किया जाएगा। ईरान में जनाजे या तजफीन की रस्में कई दिनों तक चलेंगी, जिनमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोगों और प्रतिनिधिमंडलों के शामिल होने का अनुमान है।
भारत की ओर से भी नुमाइंदगी पेश की जा रही है। भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा इसमें शामिल होंगे। वहीं, पीडीपी की महबूबा मुफ्ती भी इसमें शिरकत करेंगी। ईरान भाजपा, कांग्रेस और पीडीपी के नेताओं के अलावा जैन संत आचार्य लोकेश मुनि को भी न्योता भेज चुका है।
खामेनेई के तदफीन को देखते हुए ही कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच हुई अप्रत्यक्ष वार्ता को फिलहाल रोक दिया है। कतर ने कहा कि “सकारात्मक प्रगति” दर्ज की गई जिसके बाद दोनों पक्षों ने आगे भी बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है।
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि इस वार्ता के दौरान कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने अलग-अलग बैठकों में अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों से बातचीत की।
उन्होंने कहा कि चर्चा “इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन” से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रही और यह बातचीत “लेक ल्युर्सन शिखर सम्मेलन” के परिणामों पर आधारित थी।
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पाकिस्तान ने बृहस्पतिवार को कहा कि कतर एवं पाक के मध्यस्थों ने दोहा में अमेरिका एवं ईरान के वार्ताकारों के साथ अलग-अलग बैठकें और इनमें समझौता ज्ञापन के विभिन्न पहलुओं पर ‘सकारात्मक प्रगति’’हुई । पाकिस्तान ने कहा कि इस मामले में दोनों पक्ष आगे भी बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए।
अमेरिका और ईरान ने 18 जून को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में शांति बहाल करना है। इसके बाद 21 जून को स्विट्जरलैंड में तकनीकी स्तर की वार्ता हुई, जिसमें पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने आज दोहा में अमेरिका और ईरान के वार्ताकारों के साथ अलग-अलग बैठकें संपन्न कीं। लेक ल्यूसर्न शिखर सम्मेलन के आधार पर आगे बढ़ते हुए इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के विभिन्न पहलुओं से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है।’’
हालांकि अगली बैठक की तारीख की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन यह तय हुआ कि ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद वार्ता का अगला दौर आयोजित किया जाएगा।
विदेश कार्यालय ने कहा, ‘‘सभी पक्ष आने वाले समय में बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं। अगली बैठक की तारीख ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यथाशीघ्र तय की जाएगी।’’
तीन दशकों तक ईरान का नेतृत्व करने वाले खामेनेई 28 फरवरी को तेहरान पर अमेरिका और इजराइल के व्यापक हवाई हमलों के पहले दिन ही मारे गए थे।
उनके अंतिम संस्कार की रस्में पांच से सात जुलाई के बीच तेहरान में और क़ोम में आयोजित की जाएंगी, जबकि अंतिम रुप से खामेनेई को नौ जुलाई को मशहद शहर में दफनाया जायेगा। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी कुछ घंटे पहले यही बयान जारी किया।
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