अमेरिकी सेना ने कैरेबियन सागर में एक और तेल टैंकर को जब्त कर लिया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस टैंकर का संबंध वेनेजुएला से है।
माना जा रहा है कि यह लातिन अमेरिकी देश के तेल भंडार पर नियंत्रण हासिल करने के लिए अमेरिका द्वारा व्यापक पैमाने पर की जा रही कोशिशों का हिस्सा है।
अमेरिका की गृह मंत्री क्रिस्टी नोएम ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया मंच पर एक पोस्ट में बताया, ‘‘मोटर टैंकर वेरोनिका पहले वेनेजुएला के जलक्षेत्र से गुजर चुका था, और वह कैरेबियन में प्रतिबंधित जहाजों के लिए राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा निर्धारित क्षेत्र का उल्लंघन कर रहा था।’’
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रूस ने ब्रिटिश डिप्लोमैटिक स्टाफ के एक सदस्य को जासूसी के आरोप में देश से निकालने का आदेश दिया। बता दें कि रूस का यह आदेश अमेरिका के रूसी टैंकर पर कब्जा करने में ब्रिटेन के साथ देने के बाद सामने आया है। डिप्लोमैट पर ब्रिटेन इंटेलिजेंस के लिए काम करने का आरोप है।
फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (एफएसबी) ने गुरुवार को कहा कि मॉस्को में ब्रिटिश दूतावास में सेक्रेटरी गैरेथ सैमुअल डेविस, ब्रिटेन सीक्रेट सर्विस के लिए काम करते हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने ब्रिटेन के चार्ज डी'अफेयर्स, डाने ढोलकिया को समन भेजा है, ताकि उनके सामने औपचारिक विरोध किया जा सके और संदिग्ध जासूस को दो हफ्ते के अंदर रूस से जाने की मांग की जा सके।
रूसी विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा, “मॉस्को रूसी इलाके में ब्रिटिश स्पेशल सर्विस के बिना बताए एजेंट की एक्टिविटी को बर्दाश्त नहीं करेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में सरकार की जीरो-टॉलरेंस की नीति है।"
ब्रिटिश मिशन की डिप्टी हेड ने दिन में पहले रूसी विदेश मंत्रालय की बिल्डिंग में आने और जाने के दौरान पत्रकारों से बात करने से मना कर दिया। ब्रिटेन और रूस के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण रिश्ते रहे हैं, जिसकी वजह से जासूसी के शक में अक्सर डिप्लोमैटिक स्टाफ को आपसी तौर पर निकाला गया।
रूस ने कहा कि ब्रिटिश सरकार जानबूझकर रूस का सामना करने के लिए दुश्मनी को लंबा खींचने की कोशिश कर रही है। रूसी अधिकारियों का दावा है कि ब्रिटेन दशकों से इसी रणनीति पर काम कर रहा है।
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच भी तनाव जारी है। इस बीच, हाल ही में अमेरिका ने ब्रिटेन की मदद से रूसी टैंकर पर कब्जा कर लिया। हालांकि, टैंकर में तेल नहीं था। इसके अलावा, अमेरिका ने रूस के जब्त जहाज मैरिनेरा पर सवार क्रू के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का दावा किया। वहीं, रूसी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि वह अमेरिकी कर्मियों के जहाज पर सवार होने की खबरों पर करीबी नजर रखे हुए है।
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पाकिस्तान की सरकारी कंपनियों को राजनीतिक दखल, खराब शासन और अव्यवस्था की वजह से भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। एक पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि हालात ऐसे हैं कि सरकारी कंपनियां बहुत कम कीमतों पर प्रोडक्ट्स और सर्विस बेचने के लिए मजबूर हैं।
पाकिस्तान के एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार शासन में सुधार करने के बजाय, एक के बाद एक आने वाली सरकारें मुश्किल फैसले टालती रहती हैं। सरकारी कंपनियों को खराब परफॉर्मेंस, राजनीतिक हस्तक्षेप और कमजोर उत्तरदायित्व के बावजूद नियमित तौर पर बनाए रखा जाता है। जब वे भारी नुकसान और बहुत ज्यादा कर्ज जमा कर लेती हैं, तभी अचानक निजीकरण को हल मान लिया जाता है।
यह पैटर्न सभी क्षेत्रों में एक जैसा दिखता है। व्यवसायिक मैनेजमेंट की जगह धीरे-धीरे राजनीतिक नियुक्ति ले लेती है, और कमर्शियल अनुशासन खत्म हो जाता है। सालों की अनदेखी और पब्लिक फंड डालने के बाद ऐसी कंपनियों को बेचने से नुकसान सामाजिक हो जाता है और फायदे प्राइवेट हो जाते हैं।
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अफगानिस्तान में 4.2 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस हुए हैं। जानकारी के अनुसार भूकंप गुरुवार दोपहर करीब 01.08 बजे (स्थानीय समय 4.30) पर अश्कशाम, बदख्शां में महसूस किया गया। भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान से 33 किलोमीटर (21 मील) दूर है। हालांकि, इस भूकंप में जानमाल का कितना नुकसान हुआ है, इसकी जानकारी नहीं है।
इस भूकंप की गहराई 100 किलोमीटर (62 मील) थी। इससे पहले बुधवार को 3.8 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस हुए थे, जिसकी गहराई 90 किलोमीटर थी। बीते कुछ दिनों से अफगानिस्तान में लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं।
मंगलवार को भी 4.1 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया, जो 10 किलोमीटर की कम गहराई पर आया। इसकी वजह से वहां आफ्टरशॉक्स का खतरा बढ़ गया। गहरे भूकंपों के मुकाबले कम गहरे भूकंप आम तौर पर ज्यादा खतरनाक होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कम गहरे भूकंपों से आने वाली सीस्मिक लहरें सतह तक कम दूरी तय करती हैं, जिससे जमीन ज्यादा हिलती है, ढांचों को ज्यादा नुकसान होता है, और ज्यादा मौतें भी हो सकती हैं। अफगानिस्तान में अक्सर भूकंप आते हैं, खासकर हिंदू कुश इलाके में, जो बहुत ज्यादा सक्रिय सीस्मिक जोन में आता है।
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पाकिस्तान में बढ़ती खाद्य असुरक्षा अब केवल सामाजिक क्षेत्र की समस्या नहीं रही, बल्कि यह एक गंभीर जनस्वास्थ्य और आर्थिक जोखिम का रूप ले चुकी है। जब देश की लगभग एक-चौथाई आबादी मध्यम या गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है, तो इसके परिणाम स्वास्थ्य खर्चों में वृद्धि, श्रम उत्पादकता में गिरावट और पीढ़ी-दर-पीढ़ी बढ़ती गरीबी के रूप में सामने आएंगे। यह बात कराची स्थित प्रकाशन बिजनेस रिकॉर्डर में प्रकाशित एक संपादकीय में कही गई है।
संपादकीय में कहा गया है कि ‘हाउसहोल्ड इंटीग्रेटेड इकोनॉमिक सर्वे (एचआईईएस) 2024–25’ में शामिल फूड इनसिक्योरिटी एक्सपीरियंस स्केल के निष्कर्ष, इस्तेमाल की गई भाषा की तुलना में कहीं अधिक चिंताजनक वास्तविकता पेश करते हैं। रिपोर्ट में जहां “महत्वपूर्ण प्रगति के साथ लगातार चुनौतियों” की बात कही गई है, वहीं आंकड़े खाद्य सुरक्षा की स्थिति में स्पष्ट और लगातार गिरावट दर्शाते हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर मध्यम या गंभीर खाद्य असुरक्षा 2018–19 में 15.92 प्रतिशत थी, जो 2024–25 में बढ़कर 24.35 प्रतिशत हो गई है। आबादी के लिहाज से इसका अर्थ है कि लगभग 6.1 करोड़ पाकिस्तानी ऐसे घरों में रह रहे हैं, जहां भोजन तक पहुंच अनिश्चित है।
गंभीर खाद्य असुरक्षा की स्थिति और भी भयावह है। यह आंकड़ा 2.37 प्रतिशत से बढ़कर 5.04 प्रतिशत हो गया है, यानी करीब 1.26 करोड़ लोग अत्यधिक अभाव की स्थिति में हैं। संपादकीय के अनुसार, ये आंकड़े प्रगति नहीं बल्कि बढ़ती असुरक्षा और कमजोरियों की ओर इशारा करते हैं।
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