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दुनिया की खबरें: ट्रंप बोले- अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार, ईरान पर कभी भी हो सकते हैं और हमले और ‘200 लोग लापता हैं'

डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना जब चाहे तब ईरान पर नए हमले करने के लिए तैयार है। मंगलवार रात ईरान पर बहुत बड़ा हमला किया गया है और हम जब चाहें, फिर से ऐसा हमला करने के लिए तैयार हैं।

ट्रंप बोले- अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार, ईरान पर कभी भी हो सकते हैं और हमले
ट्रंप बोले- अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार, ईरान पर कभी भी हो सकते हैं और हमले फोटोः IANS

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना जब चाहे तब ईरान पर नए हमले करने के लिए तैयार है। मंगलवार रात ईरान पर बहुत बड़ा हमला किया गया है और हम जब चाहें, फिर से ऐसा हमला करने के लिए तैयार हैं।

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्‍ट्रेट के आसपास ईरान की ओर से हाल ही में लगाए गए या दोबारा तैयार किए गए सभी नए उपकरणों को नष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा, "हमने होर्मुज स्‍ट्रेट के आसपास उनके सभी नए उपकरणों को खत्म कर दिया, जिन्हें वे फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे।"

ईरानी अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि मंगलवार रात हुए अमेरिकी हमले में दक्षिणी ईरान में चल रहे एक शादी समारोह को निशाना बनाया गया। ईरान के अनुसार, इस हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए।

हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि वह इन रिपोर्टों की जांच कर रहा है और अमेरिकी सेना जानबूझकर कभी भी नागरिकों को निशाना नहीं बनाती। जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह वास्तव में होर्मुज स्‍ट्रेट का नाम बदलकर अपने नाम पर रखना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा, "नहीं, नहीं... यह सिर्फ एक सुझाव के तौर पर कहा गया था।"

इससे पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर मजाकिया अंदाज में लिखा था, "अब जब यह अमेरिका के नियंत्रण में है, तो क्या हमें होर्मुज स्‍ट्रेट का नाम बदलकर 'ट्रंप स्ट्रेट' कर देना चाहिए?" उन्होंने पिछले महीने लॉन्ग आइलैंड में एक रैली के दौरान भी कहा था कि ईरान को हराने के बाद वह होर्मुज स्‍ट्रेट को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने पर विचार कर सकते हैं।

ट्रंप ने उस समय कहा था, "जब हम ईरान को पूरी तरह पराजित कर देंगे, तो मैं होर्मुज स्‍ट्रेट को अमेरिका का क्षेत्र घोषित कर सकता हूं।" इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

‘मेरे गांव के करीब 200 लोग लापता हैं', नेपाल में तबाही से बचे लोगों ने सुनाई भयावह दास्तान

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के करीब एक सप्ताह बाद भी तबाही का मंजर लोगों के जेहन में ताजा है। प्रभावित इलाकों से बचाए गए और फिलहाल अस्थायी शिविरों में रह रहे लोगों ने गुरुवार को आईएएनएस से बातचीत में एक दशक से अधिक समय में नेपाल की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक के बाद की भयावह स्थिति बयां की।

मुस्तांग के एक मठ में बने अस्थायी शिविर में रह रहे एक व्यक्ति ने बताया कि उनके गांव का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा तबाह हो चुका है और स्थानीय आबादी के लगभग 200 लोग अब भी लापता हैं।

उन्होंने कहा, “हमारे लोगों को तिमुरे से बड़ी मुश्किल से बचाकर यहां लाया गया। हमारे गांव की स्थानीय आबादी में करीब 200 लोग अभी भी लापता हैं। करीब 80 प्रतिशत लोग गायब हैं और हममें से सिर्फ 20 प्रतिशत ही यहां पहुंच पाए हैं। जो लोग काठमांडू या अन्य जगहों पर रह रहे थे, वे सुरक्षित हैं। हजारों लोग मारे गए हैं या लापता हैं। इस समय हालात बेहद खराब हैं।”

आपदा की भयावहता बताते हुए उन्होंने कहा कि लोग रोजमर्रा के काम में व्यस्त थे, तभी अचानक बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया।

उन्होंने बताया, “लोग अपना सामान्य काम कर रहे थे। बाढ़ इतनी भयानक थी कि पूरा गांव महज दो मिनट के भीतर बह गया। वहां से करीब आठ से दस लोगों को ही बचाया जा सका, बाकी सभी बह गए।”

उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मदद की अपील करते हुए कहा, “हम शून्य पर पहुंच गए हैं। हमारा घर, रोजी-रोटी का साधन, सब कुछ खत्म हो गया।”

नेपाल के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल त्रिशूली में एक स्थानीय निवासी ने बताया कि आपदा में उसका घर और दुकान पूरी तरह बर्बाद हो गए।

कुवैत ने ईरानी हमलों को बताया, 'संप्रभुता का खुला उल्लंघन'

कुवैत के विदेश मंत्रालय ने देश पर ईरान की ओर से किए गए लगातार हमलों की कड़ी निंदा की है। मंत्रालय ने गुरुवार तड़के हुए हमले को कुवैत की संप्रभुता का खुला उल्लंघन और देश की सुरक्षा एवं स्थिरता के लिए सीधा खतरा बताया।

मंत्रालय ने कहा कि गुरुवार को हुए हमलों ने नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा को निशाना बनाया तथा यह अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है।

एक बयान में मंत्रालय ने कहा, “इन निर्लज्ज हमलों का जारी रहना शत्रुतापूर्ण रवैये को दर्शाता है और यह एक खतरनाक वृद्धि है, जो क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा पैदा करती है।”

कुवैत ने कहा कि ऐसे हमले तनाव कम करने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए चल रहे राजनयिक प्रयासों को व्यवस्थित रूप से कमजोर कर रहे हैं।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कुवैत अपनी संप्रभुता की रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी हमले या खतरे से अपने क्षेत्र तथा महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का पूरा अधिकार सुरक्षित रखता है।

अमेरिकी सेना के मंगलवार को ईरान के खिलाफ हमले फिर से शुरू करने के बाद, ईरान ने जॉर्डन, कुवैत, इराक और बहरीन स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन हमले किए।

इस बीच, ईरान की समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में अमेरिका की ओर से किए गए नए हमलों में ईरानी नौसेना के छह जवान मारे गए हैं।

नेपाल-तिब्बत बाढ़: चीनी अधिकारी ने और ग्लेशियर टूटने, सिलसिलेवार आपदाओं की चेतावनी दी

चीन के एक वरिष्ठ जलवायु अधिकारी ने चेतावनी दी है कि तिब्बती पठार पर मौजूद हिमनद के और अस्थिर होने की आशंका है और इससे तिब्बत-नेपाल सीमा पर हाल में आई अचानक बाढ़ जैसी और आपदा आ सकती है।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन होने के कारण आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई, जिससे सैकड़ों लोगों की मौत हो गई।

चीन सरकार की आधिकारिक संस्था, 'राष्ट्रीय जलवायु केंद्र' के उप निदेशक गाओ रोंग ने कहा, ‘‘पिछले 60 साल में तिब्बती पठार पर हिमनद क्षेत्र लगभग 24 प्रतिशत सिकुड़ गया है और करीब 7,000 छोटे हिमनद पूरी तरह खत्म हो गए हैं।’’

हांगकांग के 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' के अनुसार, गाओ ने कहा कि भविष्य में तिब्बती पठार पर हिमनद की संरचनात्मक स्थिरता और कम हो जाएगी। हिमनद से जुड़ी आपदाएं और भी आ सकती हैं और इनके क्रमिक प्रभावों के कारण तबाही और प्रभावित क्षेत्र का दायरा भी बढ़ सकता है।

बुधवार को चीनी अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, नेपाल सीमा से सटे तिब्बत के ग्यारोंग पोर्ट पर पिछले हफ्ते आई अचानक बाढ़ में 21 लोगों की मौत हो गई और 541 लोग लापता हो गए।

सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ ने तिब्बत के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि 30 अगस्त को जारी आंकड़ों के अनुसार, लापता लोगों में 261 विदेशी शामिल हैं, जिनमें भारत और 22 अन्य देशों के 49 लोग भी हैं।

नेपाल में, प्रभावित इलाकों से और शव मिलने के बाद मृतक संख्या बृहस्पतिवार को बढ़कर 1,252 हो गई।

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