
मिडिल ईस्ट संकट की वजह से तेल की बढ़ी कीमतों ने दुनिया को परेशान कर रखा है। कई देश ईंधन की खपत को कम करने के उपाय ढूंढ रहे हैं। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि तेल की कीमत बढ़ने से "हम (यूएस) बहुत पैसा बना रहे हैं।"
ट्रंप ईरान तेल की बढ़ती कीमतों और बाजार में उतार-चढ़ाव को कम करके दिखाने की कोशिश में ऐसा करते दिख रहे हैं। उन्होंने अमेरिका के फायदे की बात ट्रुथ पर कही।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है इसलिए जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो हमें भी काफी फायदा होता है। फिर भी मेरे लिए सबसे अहम बात यह है कि एक ‘खतरनाक शक्ति’ ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जाए, क्योंकि इससे मिडिल ईस्ट और पूरी दुनिया को खतरा हो सकता है।”
उन्होंने दावा किया, “मैं ऐसा कभी होने नहीं दूंगा।” ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) ने चेतावनी दी है कि ईरान के बढ़ते हमलों की वजह से दुनिया को तेल की सप्लाई में इतिहास की सबसे बड़ी रुकावट का सामना करना पड़ सकता है।
बुधवार को ओहियो में ट्रंप ने गैस की बढ़ती कीमतों पर कहा, "मैं कहूंगा कि यह हमारी सोच से थोड़ी कम बढ़ी है।" फिर भरोसा दिलाते हुए कहा, "यह इतनी कम हो जाएगी कि कोई भी समझ नहीं पाएगा।"
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मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और संभावित आपूर्ति संकट की आशंकाओं के बीच नेपाल सरकार ने रसोई गैस (एलपीजी) की राशनिंग शुरू करने का फैसला किया है। सरकारी तेल कंपनी नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन ने कहा है कि देश में गैस की उपलब्धता को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए अब उपभोक्ताओं के खाली सिलेंडरों में केवल आधी मात्रा में गैस भरी जाएगी।
यह व्यवस्था शुक्रवार से लागू की जाएगी। उनके अनुसार यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया जा रहा है ताकि मौजूदा गैस भंडार अधिक समय तक चल सके और देश में अचानक किल्लत पैदा न हो।
कॉर्पोरेशन ने कहा कि नया नियम घरेलू और होटल और रेस्टोरेंट यूजर्स दोनों पर लागू होगा। साथ ही, यह भी कहा कि इस कदम का मकसद ऊर्जा बचाना है, हालांकि आयात पर कोई असर नहीं पड़ा है।
द काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन की बोर्ड मीटिंग में गुरुवार को यह फैसला लिया गया। इसमें 2015 और 2020 के दौर को याद किया गया। फिर उस समय अपनाए गए उपायों को दोहराया गया जब देश में कुकिंग गैस की बहुत ज्यादा कमी हो गई थी।
नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन के डिप्टी डायरेक्टर मनोज कुमार ठाकुर ने कहा, “इंडस्ट्री मिनिस्ट्री और कॉर्पोरेशन के अधिकारियों ने हफ्तों तक कुकिंग गैस सिलेंडर न मिलने की कस्टमर्स की शिकायतें बढ़ने के बाद चर्चा की। कॉर्पोरेशन ने शुक्रवार से आम 14.2 किलोग्राम के बजाय 7.1 किलोग्राम कुकिंग गैस बेचने का फैसला किया है।”
सरकार ने कई बार यह भरोसा दिलाया है कि नेपाल के पास फिलहाल एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति है, लेकिन इसके बावजूद लोगों में कमी की आशंका के कारण घबराहट देखी जा रही है। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग खाली सिलेंडर लेकर गैस भरवाने के लिए रिफिलिंग प्लांटों के बाहर पहुंच रहे हैं।
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संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) के अनुसार, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण अब तक करीब 32 लाख लोग ईरान के भीतर ही विस्थापित हो चुके हैं।
एजेंसी ने कहा कि यह आंकड़ा देशभर में विस्थापित परिवारों के शुरुआती आकलन के आधार पर तैयार किया गया है। यूएनएचसीआर के मुताबिक अगर संघर्ष जारी रहा तो विस्थापितों की संख्या और बढ़ सकती है, जिससे मानवीय संकट और गहरा जाएगा।
अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद 28 फरवरी से ईरान में युद्ध जारी है, जिसके कारण लाखों लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों की ओर जाने को मजबूर हुए हैं।
एजेंसी के अनुसार, देश के रिफ्यूजी परिवारों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ा है, जिनमें ज्यादातर अफगान हैं। उनकी पहले से ही हालत काफी दयनीय है। बढ़ती असुरक्षा और जरूरी सेवाओं तक सीमित पहुंच के कारण परिवार प्रभावित इलाकों को छोड़ रहे हैं। एजेंसी ने अंतर्राष्ट्रीय नियमों के तहत बॉर्डर क्रॉस कर दूसरी जगह जाने को तत्पर लोगों के लिए स्थिति अनुकूल करने की वकालत की है। कहा है कि ऐसे लोग जो सुरक्षित रहना चाहते हैं उनके लिए बॉर्डर खोल दिए जाने चाहिए।
वहीं, इस सैन्य संघर्ष में कई लोगों की जान भी जा रही है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं। तसनीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरान सरकार की प्रवक्ता फतेमेह मोहजेरानी ने एक वीडियो इंटरव्यू में आंकड़ों की जुबानी बदहाली की कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि हमलों में कुल 216 महिलाएं, 18 साल से कम उम्र के 198 किशोर और पांच साल से कम उम्र के 11 बच्चे मारे गए। सबसे कम उम्र का शिकार आठ महीने का बच्चा था, जबकि सबसे कम उम्र का घायल व्यक्ति चार महीने का शिशु है।
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ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का पहला संदेश गुरुवार को सरकारी टेलीविजन पर पढ़कर सुनाया गया। इस संदेश में उनके तल्ख तेवर साफ दिखे। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि अमेरिकी हवाई अड्डों पर हमला ईरान नहीं बंद करेगा, वहीं पड़ोसी देशों के साथ मित्रता भी बनाए रखेगा। अपनी सेना की हिम्मत को सलाम करते हुए, उन्होंने ईरान से कहा कि देश शहीदों के खून का बदला जरूर लेगा।
अपनी सेना की हिम्मत की प्रशंसा करते हुए खामेनेई ने कहा, देश की मिलिट्री का शुक्रिया जिसने ईरान को बंटने से रोका और जंग जैसे हालात के बीच किसी को खुद पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने कहा, “मैं उन बहादुर लड़ाकों को धन्यवाद देना चाहता हूं जो ऐसे समय में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं जब हमारा देश दबाव में है और उस पर हमला हो रहा है।”
उन्होंने कहा कि ईरान जवाबी हमला जारी रखेगा। मोजतबा ने पड़ोसी देशों से रिश्ता बेहतर करने पर भी बल दिया। कहा, हमें अपने पड़ोसियों से संबंध बेहतर करने होंगे।
नए ईरानी सुप्रीम लीडर ने दावा किया कि यमन और इराक के हथियारबंद लड़ाके भी उनकी मदद को तैयार हैं। खामेनेई ने कहा कि यमन भी हमारे साथ है और इराक में हथियारबंद ग्रुप भी इस्लामिक क्रांति में "मदद करने को तैयार हैं"।
पहले संदेश में मोजतबा खामेनेई ने देश से एकजुट होने की अपील करते हुए दावा किया कि ईरान के दुश्मनों पर दबाव बनाने के लिए होर्मुज स्ट्रेट बंद रहेगा। ईरान पड़ोसियों से दोस्ती में विश्वास करता है और सिर्फ यूएस बेस को निशाने पर ले रहा है और ऐसा करना वो जारी रखेगा।
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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के दबाव का इस्तेमाल किया जाना चाहिए और खाड़ी अरब के पड़ोसियों पर ईरान के हमले जारी रहेंगे।
उनके शीर्ष पद संभालने के बाद उनका पहला बयान बृहस्पतिवार को सरकारी टेलीविजन पर एक समाचार प्रस्तोता द्वारा पढ़ा गया। खामेनेई कैमरे पर नहीं दिखे, और इजराइली आकलन से पता चलता है कि युद्ध की शुरुआती गोलीबारी में वह घायल हो गए थे।
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दक्षिणी इथियोपिया के तीन जिलों में एक सप्ताह तक हुई भारी बारिश के बाद भूस्खलन के कारण कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई और 125 लापता हैं। एक स्थानीय अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
गामो जोन के आपदा प्रतिक्रिया निदेशक मेसफिन मनुका के अनुसार, भूस्खलन गामो जोन में हुआ और तीन जिले गाचो बाबा, कम्बा और बोंके प्रभावित हुए।
उन्होंने बताया कि बचाव अभियान के दौरान एक व्यक्ति को कीचड़ से जिंदा बाहर निकाला गया। गाचो बाबा जिले के संचार प्रमुख अबेबे अगेना ने बताया कि मरने वालों में से ज्यादातर के शव कीचड़ में दबे हुए पाये गये। उन्होंने बताया कि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि भूस्खलन से कितने मकान प्रभावित हुए हैं।
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