
ईरान और अमेरिका के वार्ताकार शुक्रवार को उच्चस्तरीय वार्ता के लिए तैयारी करते नजर आए, जबकि उनके बीच युद्धविराम की स्थिति अब भी डांवाडोल है। इस बीच, इजराइल और हिजबुल्ला ने एक-दूसरे पर गोलीबारी जारी रखी और तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखा।
अब भी कई ऐसे मुद्दे हैं जो युद्धविराम को पटरी से उतार सकते हैं, साथ ही युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए व्यापक समझौते पर बातचीत को भी प्रभावित कर सकते हैं।
रिवोल्यूशनरी गार्ड की करीबी और ईरान की अर्धसरकारी समाचार एजेंसी ‘तसनीम’ ने दावा किया कि शनिवार को होने वाली वार्ता तब तक नहीं होगी जब तक इजराइल लेबनान पर अपने हमले बंद नहीं कर देता। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान जलडमरूमध्य से जहाजों के निर्बाध आवागमन को रोककर ‘‘बहुत ही गलत काम’’ कर रहा है, जिससे कभी दुनिया के 20 प्रतिशत तेल का व्यापार होता था।
इस बीच, कुवैत ने कहा कि बृहस्पतिवार रात उसके यहां ड्रोन हमला हुआ, जिसके लिए उसने ईरान और क्षेत्र में उसके मिलिशिया सहयोगियों को जिम्मेदार ठहराया।
हालांकि, ईरान के अर्धसैनिक बल ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने कोई भी हमला करने से इनकार किया है, लेकिन उसने अतीत में पश्चिम एशिया में ऐसे हमले किए हैं जिनकी जिम्मेदारी उसने नहीं ली।
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उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से वार्ता के लिए इस्लामाबाद रवाना होने से पहले तेहरान को आगाह किया कि वह अमेरिका के साथ ‘खेल’ न खेले।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने करीबी लोगों में से उस व्यक्ति को यह जिम्मेदारी सौंपी है, जो ईरान के साथ संघर्ष का सबसे अनिच्छुक समर्थक प्रतीत हो रहे हैं।
लेकिन अब वेंस को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह छह सप्ताह पहले शुरू हुए इस युद्ध का समाधान ढूंढ़े और अमेरिकी राष्ट्रपति की ईरान की ‘पूरी सभ्यता’ को नष्ट करने की चौंकाने वाली धमकी को चरितार्थ न होने दें।
वेंस विदेशी सैन्य हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं हैं। वह संघर्ष वाले क्षेत्रों में सैनिकों को भेजने के पक्ष में नहीं रहे हैं।
वेंस पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान के साथ मध्यस्थता वार्ता का नेतृत्व करने के लिए शुक्रवार को रवाना होंगे।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को युद्धविराम की घोषणा की और इसके बाद तुरंत उम्मीद जगी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही जल्द सामान्य हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरान ने युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी।
अगली सुबह भी जलडमरूमध्य में यातायात बेहद सीमित रहा। कुछ ही पोत, जो मुख्य रूप से ईरान से जुड़े थे, वहां से गुजरे, जबकि खाड़ी में इंतजार कर रहे अधिकतर जहाज वहीं रुके रहे। इसके तुरंत बाद ईरान ने घोषणा की कि वह लेबनान पर इजराइल के हमलों के कारण प्रभावी रूप से इस जलडमरूमध्य को बंद करेगा।
वास्तविकता यह है कि जलडमरूमध्य कभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ। इसे “खुला” या “बंद” बताना वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता। जहाजों को रोका नहीं जा रहा है, बल्कि उन्हें वहां से गुजरने को लेकर हतोत्साहित किया जा रहा है।
हाल के हफ्तों में ईरान ने वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने की अपनी क्षमता और मंशा दोनों प्रदर्शित की हैं। जहाजों पर हमलों और खतरों के कारण रोजाना गुजरने वाले पोतों की संख्या लगभग 130 से घट गई है। जब तक यह जोखिम बना रहेगा, जहाजों की वहां बड़ी संख्या में आवाजाही नहीं होगी।
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि ईरान युद्ध के दौरान यूक्रेनी सेना ने पश्चिम एशिया के कई देशों में ईरानी डिजाइन वाले ‘शाहेद’ ड्रोनों को मार गिराया।
जेलेंस्की ने कहा कि ये अभियान एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत यूक्रेन अपने सहयोगी देशों को उन हथियारों से निपटने में मदद कर रहा है जिनका इस्तेमाल रूस उसके खिलाफ कर रहा है।
राष्ट्रपति ने इन अभियानों की पहली बार सार्वजनिक रूप से पुष्टि बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में की, जिसे शुक्रवार को सार्वजनिक किया गया।
उन्होंने कहा कि यूक्रेनी बलों ने देश में विकसित और युद्ध में परखे गए ‘इंटरसेप्टर’ ड्रोन का उपयोग करते हुए विदेशों में सक्रिय अभियानों में भाग लिया।
जेलेंस्की ने कहा, “यह किसी प्रशिक्षण मिशन या अभ्यास का मामला नहीं था, बल्कि एक ऐसे आधुनिक वायु रक्षा तंत्र के निर्माण में सहयोग देने की बात थी, जो वास्तव में प्रभावी ढंग से काम कर सके।’’
ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच इस सप्ताह अस्थायी युद्धविराम तय होने से पहले यूक्रेन ने रक्षात्मक अभियानों में हिस्सा लिया था।
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इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक सख्त बयान में कहा कि इजरायल अपने खिलाफ किसी भी हमले या विरोध के सामने चुप नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि जो देश इजरायल और उसकी सेना, आईडीएफ की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, वे भविष्य में हमारे साझेदार नहीं होंगे।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बयान में कहा कि हम इजरायल या हमारी सेना पर हमला करने वालों के सामने चुप नहीं रहेंगे। स्पेन ने हमारे हीरो (आईडीएफ) सैनिकों को बदमान किया है, जो पूरी दुनिया की सबसे नैतिक सेना के सैनिक हैं, इसलिए मैंने स्पेन के प्रतिनिधियों को किरयात गत में कोऑर्डिनेशन सेंटर से हटाने का निर्देश दिया है। नेतन्याहू कहा कि स्पेन ने बार-बार इजरायल के खिलाफ खड़े होने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि जो लोग क्रूर शासन के बजाय इजरायल राज्य पर हमला करते हैं, वे इस क्षेत्र के भविष्य के लिए हमारे पार्टनर नहीं होंगे। मैं इस दिखावे और दुश्मनी को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हूं। मेरा इरादा किसी भी देश को, बिना तत्काल कोई कीमत चुकाए, हमारे खिलाफ कूटनीतिक युद्ध छेड़ने की अनुमति देने का नहीं है।
इससे पहले बेंजामिन नेतन्याहू पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ को भी सख्त चेतावनी जारी कर चुके हैं।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने पाकिस्तान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि हम इजरायल के विनाश की बात को बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। पीएम नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का इजरायल को खत्म करने का आह्वान बहुत बुरा है। यह ऐसा बयान नहीं है जिसे किसी भी सरकार से बर्दाश्त किया जा सके, खासकर उस सरकार से जो शांति के लिए न्यूट्रल आर्बिटर होने का दावा करती है।"
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