
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ बैठकें रद्द कर दी हैं और प्रदर्शनकारियों से कहा है कि “मदद भेजी जा रही है”। राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को हालांकि यह विवरण नहीं दिया कि मदद का स्वरूप क्या है।
ईरान में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या मंगलवार को बढ़कर कम से कम 2,000 हो गई, क्योंकि अधिकारियों द्वारा दमनकारी कार्रवाई के दौरान संचार व्यवस्था ठप कर दिए जाने के बाद ईरानियों ने कई दिन में पहली बार विदेशों में फोन किया। ईरान में इस पैमाने पर हिंसा दशकों में नहीं देखी गयी है।
Published: undefined
ईरान में दो हफ्ते से ज्यादा बीतने के बाद भी विरोध प्रदर्शन खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अलग-अलग समाचार आउटलेट मृतकों का जो आंकड़ा बता रहे हैं, वो बहुत खौफनाक है। यूरोपीय यूनियन ने इन आंकड़ों पर चिंता जताई है।
यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे खौफनाक बताते हुए ईरानी सुरक्षा बलों की आलोचना की है। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, "ईरान में बढ़ती मौतों की संख्या डरावनी है। मैं बल के अत्यधिक इस्तेमाल और आजादी पर लगातार पाबंदियों की कड़ी निंदा करती हूं।"
लेयेन ने पाबंदियों की बात कही। बोलीं, "यूरोपियन यूनियन ने पहले ही इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को पूरी तरह से अपने मानवाधिकार प्रतिबंधों की लिस्ट में डाल दिया है।"
उन्होंने आगे कहा कि यूरोपीय संघ की उच्च प्रतिनिधि और विदेश मामलों एवं सुरक्षा नीति की उपाध्यक्ष काया कलास के साथ मिलकर, दमन के लिए जिम्मेदार लोगों पर और प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव जल्द ही दिया जाएगा।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि ईयू आम ईरानी लोगों के साथ खड़ा है। उन्होंने पोस्ट के आखिर में लिखा, "हम ईरान के लोगों के साथ खड़े हैं जो अपनी आजादी के लिए बहादुरी से मार्च कर रहे हैं।" इस बीच रॉयटर्स ने ईरानी अधिकारी के हवाले से दावा किया है कि दो हजार लोग मारे गए हैं।
Published: undefined
फ्रांस में किसानों ने अपनी कम आय और दक्षिण अमेरिका के साथ यूरोपीय संघ (ईयू) के व्यापार समझौते के विरोध में मंगलवार को 350 ट्रैक्टर के साथ संसद तक मार्च किया। किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौते से उनकी आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।
पुलिस सुरक्षा के बीच, ट्रैक्टरों ने व्यस्त समय के दौरान चैंप्स-एलिसी और पेरिस की अन्य सड़कों से गुजरते हुए यातायात को अवरूद्ध कर दिया और फिर वे सीन नदी को पार करके नेशनल असेंबली तक पहुंचे।
फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों में किसानों का आक्रोश कई चुनौतियों के चलते बढ़ गया है। मंगलवार को हुए विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे किसान संघों ने कहा कि वे फ्रांस की खाद्य सुरक्षा की रक्षा के लिए ठोस और तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
फ्रांसीसी किसानों ने कहा कि ईंधन, उर्वरक और पशुओं के चारे की बढ़ती लागत के साथ-साथ पर्यावरण संबंधी कड़े नियमों और शक्तिशाली खुदरा विक्रेताओं और खाद्य कंपनियों द्वारा मूल्य को लेकर दबाव बनाये जाने के कारण उनकी आय घट रही है।
यूरोपीय संघ के अन्य देशों के किसानों की तरह ही फ्रांसीसी किसान भी लंबे समय से ब्राजील, अर्जेंटीना, बोलीविया, पैराग्वे और उरुग्वे जैसे मर्कोसुर देशों के साथ यूरोपीय संघ के प्रस्तावित व्यापार समझौते का विरोध कर रहे हैं।
उनका तर्क है कि इस समझौते से दक्षिण अमेरिकी बीफ, पॉल्ट्री, चीनी और अन्य कृषि उत्पादों का सस्ता आयात बाजार में भर जाएगा, जो अलग-अलग मानकों के तहत उत्पादित होते हैं। इससे यूरोपीय उत्पादकों को नुकसान होगा तथा कीमतें और भी गिरेंगी।
Published: undefined
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट यह फैसला सुनाता है कि उनके पास व्यापक शुल्क लगाने की एकतरफा शक्ति नहीं है, तो ‘‘बहुत बड़ी गड़बड़ हो जाएगी, और हमारे देश के लिए उन पैसों को चुकाना लगभग असंभव हो जाएगा’’, जो अमेरिका ने व्यापक ‘टैरिफ’ से एकत्र किए हैं।
उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अगर अदालत उनके द्वारा लगाए गए ‘टैरिफ’ को रद्द कर देती है, तो ‘‘हम बुरी तरह फंस जाएंगे’’।
ट्रंप ने अदालत के आसन्न फैसले के बारे में सोशल मीडिया पर लगातार पोस्ट किए हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी जिक्र किया कि सरकार के लिए पैसा वापस करना कितना मुश्किल हो सकता है।
उन्होंने शुल्क का पैसा वापस करने के बारे में कहा, ‘‘यह संभव नहीं हो सकता।’’
ट्रंप ने कहा कि लेकिन, ‘‘अगर ऐसा हुआ, तो यह इतनी बड़ी रकम होगी कि यह पता लगाने में कई साल लग जाएंगे कि हम किस संख्या की बात कर रहे हैं और यहां तक कि किसे, कब और कहां भुगतान करना है।’’
Published: undefined
Google न्यूज़, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia
Published: undefined