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दुनिया की खबरें: 'होर्मुज बंद होने से खाद्य संकट की ओर बढ़ रही दुनिया' और कांगो में इबोला वायरस से 131 लोगों की मौत

ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेत कूपर ने कहा कि खाड़ी देश उर्वरक के बड़े वैश्विक आपूर्तिकर्ता हैं और ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण समुद्री आवागमन बाधित होने से खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

फोटो: सोशल  मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेत कूपर ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहने की वजह से दुनिया “वैश्विक खाद्य संकट की ओर बढ़ रही है।”

मंगलवार को ग्लोबल पार्टनरशिप्स कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि खाड़ी देश उर्वरक के बड़े वैश्विक आपूर्तिकर्ता हैं और ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण समुद्री आवागमन बाधित होने से खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

उन्होंने विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी, पहली तिमाही) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अगर ईरान संघर्ष इस साल के मध्य तक खत्म नहीं हुआ, तो लगभग 4.5 करोड़ और लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का शिकार हो सकते हैं।

कूपर ने कहा, “दुनिया एक वैश्विक खाद्य संकट की तरफ बढ़ रही है। हम यह जोखिम नहीं उठा सकते कि एक देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग को बाधित कर दे और इसकी वजह से करोड़ों लोग भूखे रहने को मजबूर हो जाएं।”

उन्होंने आरोप लगाया कि होर्मुज को बंद रखने से वैश्विक खाद्य और ईंधन आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। इससे जीवनयापन की लागत भी बढ़ रही है।

ब्रिटेन ने इस जलमार्ग को तुरंत और बिना किसी रोक-टोक के खोलने की मांग दोहराई है। साथ ही “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मल्टीनेशनल मिशन” को आगे बढ़ाने की बात भी कही है, ताकि समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखा जा सके।

उन्होंने कहा कि यह संकट केवल विकासशील देशों को ही नहीं, बल्कि विकसित देशों, निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है। इसके चलते वैश्विक साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय विकास के लिए नई रणनीति की जरूरत महसूस हो रही है।

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इजराइली सुरक्षा बलों ने गाजा नाकेबंदी को चुनौती देने जा रहे कार्यकर्ताओं के एक और जहाज को रोका

गाजा में नाकेबंदी को चुनौती देने जा रहे कार्यकर्ताओं के एक छोटे जहाज को मंगलवार को इजराइली सुरक्षा बलों ने रोक दिया।

छोटे जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली एक वेबसाइट के मुताबिक, जहाज को गाजा से लगभग 82 समुद्री मील (करीब 150 किलोमीटर) की दूरी पर रोका गया।

वेबसाइट पर लाइव प्रसारित किए गए एक वीडियो में इजराइली सुरक्षा बल एक छोटी नौका से ‘एंड्रोस’ नामक जहाज के पास पहुंचते दिखाई दिए, जबकि कार्यकर्ता अपने हाथ ऊपर उठाए हुए नजर आए। इसके बाद स्क्रीन काली हो गई और एक संदेश आया, जिसमें कहा गया कि जहाज को रोक लिया गया है।

मंगलवार दोपहर तक कुछ जहाज गाजा के लगभग 100 समुद्री मील के दायरे में थे और उसकी ओर बढ़ रहे थे। इजराइली नौसेना ने ताजा कार्रवाई साइप्रस के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कार्यकर्ताओं के जहाज के काफिले को रोकने के एक दिन बाद की। यह ‘ग्लोबल सुमूद फ्लोटिला’ की ओर से गाजा पट्टी पर इजराइल की समुद्री नाकेबंदी को चुनौती देने और वहां रह रहे फलस्तीनियों की गंभीर स्थितियों को उजागर करने का एक और प्रयास था।

आयोजकों के अनुसार, पिछले हफ्ते तुर्किये के मारमारिस बंदरगाह से दर्जनों जहाज रवाना हुए, जो गाजा के तट तक उनकी प्रस्तावित यात्रा के अंतिम चरण का हिस्सा थे। सोमवार को लगभग 41 नावों को रोका गया था।

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रूस के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए चीन का दौरा कर रहे हैं पुतिन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा समाप्त होने के एक सप्ताह से भी कम समय के भीतर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीनी नेता शी चिनफिंग से मिलने के लिए चीन आ रहे हैं।

पुतिन मंगलवार और बुधवार को चीन में रहेंगे। चीन एक ओर अमेरिका के साथ स्थिर संबंध बनाना चाहता है, वहीं दूसरी ओर वह रूस के साथ मजबूत संबंध भी बरकरार रखना चाहता है।

क्रेमलिन ने कहा कि पुतिन और शी की योजना दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के साथ-साथ ‘‘प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों’’ पर भी चर्चा करने की है। यह यात्रा 2001 में हस्ताक्षरित चीन-रूस मैत्री संधि की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रही है।

वर्ष 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद चीन रूस का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है और रूसी तेल एवं गैस का सबसे बड़ा ग्राहक भी है। रूस को उम्मीद है कि ईरान में युद्ध से मांग और बढ़ेगी।

चीन ने तटस्थ रुख अपनाते हुए अमेरिका और यूरोप द्वारा लगाए गए आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंधों के बावजूद रूस के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखे हैं।

चीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने मंगलवार को बताया कि पुतिन ने अपनी यात्रा से पहले जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि द्विपक्षीय संबंध ‘‘वास्तव में अभूतपूर्व स्तर’’ पर हैं और यह रिश्ता वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

राष्ट्रपति के सहायक यूरी उशाकोव ने सोमवार को कहा था कि ट्रंप और पुतिन की यात्राओं के बीच कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि रूसी नेता की यह यात्रा पुतिन और शी चिनफिंग के बीच चार फरवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई बातचीत के बाद तय की गई थी।

बीजिंग स्थित थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर चाइना एंड ग्लोबलाइजेशन’ के उप महासचिव वांग ज़िचेन ने कहा, ‘‘ट्रंप की यात्रा का उद्देश्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करना था, वहीं पुतिन की यात्रा एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार को आश्वस्त करने के बारे में है। चीन के लिए, ये दोनों रास्ते एक दूसरे से अलग नहीं हैं।’’

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भारत ने मानवाधिकार हनन के आरोपों को किया खारिज; संवैधानिक मूल्यों का दिया हवाला

भारत ने तीन दिन में दूसरी बार, मानवाधिकार हनन के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए न्याय, स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने संवैधानिक मूल्यों को रेखांकित किया है।

विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने नॉर्वे की पत्रकार हेली लेंग स्वेन्डसेन के एक सवाल का जवाब देते हुए यह टिप्पणी की। हेली ने पूछा था कि भारत के कथित मानवाधिकार हनन के बावजूद उस पर भरोसा क्यों किया जाना चाहिए।

वरिष्ठ राजनयिक सोमवार रात संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे, जिसमें उन्होंने मीडिया को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता की जानकारी दी।

इससे पहले, हेली ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछने की असफल कोशिश की, जब मोदी और स्टोर ने अपने प्रेस वक्तव्य दिये थे। मीडिया को पहले ही बता दिया गया था कि दोनों नेता सवालों के जवाब नहीं देंगे।

इसके बाद, नॉर्वे स्थित भारतीय दूतावास ने इस मुद्दे पर हेली के सोशल मीडिया पोस्ट का जवाब देते हुए कहा कि दूतावास द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उनका ‘‘स्वागत है और वह अपने सवाल पूछ सकती हैं।’’

इसने कहा कि दूतावास आज रात 9:30 बजे रेडिसन ब्लू प्लाज़ा होटल में, प्रधानमंत्री की यात्रा पर संवाददाता सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। आप सभी का स्वागत है और आप वहां आकर अपने सवाल पूछ सकती हैं।

शनिवार शाम को हेग में दो डच पत्रकारों ने जॉर्ज से भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कथित तौर पर कम होने के बारे में इसी तरह के प्रश्न पूछे थे। नीदरलैंड और स्वीडन की यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी ओस्लो पहुंचे थे।

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कांगो में इबोला वायरस के संक्रमण से 131 लोगों की मौत, 513 संदिग्ध मामले आए: स्वास्थ्य मंत्रालय

पूर्वी कांगो में इबोला वायरस के प्रकोप से कम से कम 131 लोगों की मौत हुई है और 500 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं। कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। साथ ही इबोला वायरस से निपटने के संबंध में सरकार की प्रतिक्रिया में देरी को लेकर भी जानकारी सामने आई है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल रोजर कंबा ने कहा, ‘‘प्रभावित क्षेत्रों में 513 संदिग्ध मामले आए हैं और 131 लोगों की संक्रमण से मौत दर्ज की गई है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ये संदिग्ध मौत हैं और यह पता लगाने के लिए जांच जारी है कि वास्तव में इनमें से कौन से कारक इस रोग से जुड़े हैं।’’

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने रविवार को इबोला के प्रकोप को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित किया।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि मौजूदा प्रकोप की पुष्टि शुक्रवार को हुई थी जो इबोला वायरस के ‘बुंडीबुग्यो’ स्वरूप के कारण हुआ है। ‘बुंडीबुग्यो’ इबोला का एक दुर्लभ प्रकार है जिसके लिए कोई स्वीकृत उपचार या टीका उपलब्ध नहीं है।

कांगो और युगांडा में 20 से अधिक बार इबोला के प्रकोप हो चुके हैं, लेकिन ‘बंडीबुग्यो’ वायरस का पता केवल तीसरी बार चला है।

वर्तमान में बुनिया, उत्तरी किवु की विद्रोहियों के कब्जे वाली राजधानी गोमा, मोंगबवालु, बुटेम्बो और न्याकुंडे में मामलों की पुष्टि हो गई है।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने मंगलवार को जिनेवा में कहा कि वह ‘‘महामारी के स्तर और उसके तेजी से बढ़ने को लेकर बेहद चिंतित हैं’’ और संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी मंगलवार को अपनी आपातकालीन समिति की बैठक बुलाएगी ताकि सिफारिशों पर सलाह दी जा सके।

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