
अमेरिका समर्थित नाटो बलों की वापसी और तालिबान के हाथों में अफगानिस्तान का नियंत्रण आने के बाद विभिन्न वैश्विक शक्तियों और दिग्गजों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखी गई हैं, क्योंकि वे तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार की स्थापना को मान्यता देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
यह सीमित या कोई अन्य विकल्प के साथ आगे बढ़ने का एकमात्र तरीका प्रतीत होता है।
काबुल के पतन और अफगान तालिबान द्वारा अधिग्रहण पर एक तरफ अन्य देशों से बेचैनी की प्रतिक्रिया देखी गई है, जो अभी भी अशरफ गनी सरकार और अफगान बलों के चौंकाने वाले पतन को समझने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्होंने सचमुच बहुत जल्दी तालिबान के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और उनके हाथों में अफगानिस्तान का नियंत्रण सौंप दिया।
इसके बाद से भ्रमित और अनिश्चित चिंतन हर कहीं जारी है, मगर अफगानिस्तान में हालिया घटनाक्रम को लेकर ऐसा लगता है कि यह पाकिस्तान में एक स्वागत योग्य समाचार के रूप में आया है। कई पाकिस्तानी काबुल के पतन का जश्न मना रहे हैं और इस पर उनका कहना है कि पाकिस्तान को अस्थिर करने के लिए कथित भारतीय प्रयासों की हार हुई है, इसलिए वह खुश हैं।
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पंजशीर के विद्रोही गुट ने तालिबान की ओर से प्रांत पर कब्जा करने के दावे का खंडन किया है। नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट (एनआरएफ) ने एक ट्वीट में कहा, तालिबान का पंजशीर पर कब्जा करने का दावा झूठा है। एनआरएफ बल लड़ाई जारी रखने के लिए घाटी में सभी रणनीतिक पदों पर मौजूद हैं। हम अफगानिस्तान के लोगों को आश्वस्त करते हैं कि तालिबान और उनके सहयोगियों के खिलाफ संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक न्याय और स्वतंत्रता नहीं मिलती।
दावा किया गया है कि तालिबानी लड़ाकों ने आखिरी होल्डआउट पंजशीर प्रांत पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है।
खामा न्यूज ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि कार्यवाहक संस्कृति और सूचना मंत्री एवं तालिबान के प्रवक्ता, जबीउल्लाह मुजाहिद ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रव्यापी सुरक्षा की स्थापना के उनके प्रयास सफल रहे हैं और प्रांत को अल्लाह की मदद और लोगों के समर्थन से हासिल कर लिया गया है।
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लीबिया के अधिकारियों ने देश के दिवंगत नेता मुअम्मर गद्दाफी के बेटे सादी गद्दाफी को रिहा कर दिया है। अटॉर्नी जनरल के कार्यालय के एक सूत्र ने समाचार एजेंसी सिन्हुआ को बताया कि सादी पर 2005 में एक फुटबॉल खिलाड़ी और लीबिया की राष्ट्रीय टीम के कोच की हत्या में कथित संलिप्तता के आरोप में मुकदमा चल रहा था। उस अब रिहा कर दिया गया है।
उन्हें अप्रैल 2018 में इस मामले में बरी कर दिया गया था।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, 27 वर्षीय सादी अपनी रिहाई के तुरंत बाद तुर्की के लिए रवाना हो गए, और अपने परिवार के कुछ सदस्यों के साथ मिस्र जाने की योजना बना रहे है।
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अफगानिस्तान में अशरफ गनी सरकार को हटाने और तालिबान द्वारा तेजी से अधिग्रहण करने से निश्चित रूप से वैश्विक शक्तियां सदमे की स्थिति में आ गई हैं। तालिबान ने एक आक्रामक तरीके से अफगानिस्तान पर नियंत्रण कर लिया है, जिसमें न केवल विदेशी बलों को देश से बाहर करने के लिए 20 दिनों से भी कम समय लगा, बल्कि गनी सरकार और उसके सुरक्षा बलों को खदेड़ते हुए काबुल में भी धावा बोल दिया गया और बिना किसी उल्लेखनीय प्रतिरोध के उन्होंने विद्रोहियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
तालिबान ने अफगानिस्तान में नियंत्रण करने के बाद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के कई वरिष्ठ नेताओं सहित सभी तालिबान कैदियों को मुक्त कर दिया है। इसने पाकिस्तानी तालिबान आतंकवादियों को अपने स्लीपर सेल को फिर से सक्रिय करने और पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में फिर से उभरने का मौका दिया है, जिनमें से अधिकांश अफगानिस्तान के साथ लगती सीमा पर हैं।
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मानवीय मामलों के अवर महासचिव मार्टिन ग्रिफिथ्स को तालिबान नेतृत्व के साथ बातचीत के लिए काबुल भेजा है। विश्व निकाय के एक शीर्ष अधिकारी ने इसकी पुष्टि की। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने गुटेरस के प्रवक्ता स्टेफन दुजारिक के हवाले से कहा, "महासचिव के अनुरोध पर, मार्टिन ग्रिफिथ्स इस समय काबुल में हैं। आज (रविवार) की अपनी यात्रा के दौरान, ग्रिफिथ्स ने मानवीय मुद्दों पर अधिकारियों के साथ बातचीत करने के लिए काबुल में मुल्ला बरादर और तालिबान के नेतृत्व से मुलाकात की।"
बयान में कहा गया है कि इस बैठक में ग्रिफिथ्स ने लाखों लोगों को निष्पक्ष और स्वतंत्र मानवीय सहायता और सुरक्षा प्रदान करने के लिए मानवीय समुदाय की प्रतिबद्धता को दोहराया।
बयान के अनुसार, ग्रिफिथ्स ने सहायता प्रदान करने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया और सभी पक्षों से उनके अधिकारों, सुरक्षा और कल्याण को सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
आईएएनएस के इनपुट के साथ
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