
देश आज 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह के साथ मना रहा है। राजधानी दिल्ली में कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड ने एक बार फिर दुनिया को भारत की सैन्य क्षमता, सांस्कृतिक विविधता और तकनीकी प्रगति की झलक दिखाई। करीब 97 मिनट तक चले इस विशेष आयोजन में आसमान से लेकर जमीन तक भारत की शक्ति का प्रदर्शन हुआ।
इस साल का गणतंत्र दिवस समारोह खास तौर पर ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ को समर्पित रहा, जिसने पूरे कार्यक्रम को ऐतिहासिक और भावनात्मक रंग दिया।
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कर्तव्य पथ पर परेड की शुरुआत ‘सर्वत्र सुरक्षा’ नामक विशेष सैन्य फॉर्मेशन से हुई। इस संयुक्त मार्च में भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना और अर्धसैनिक बलों के जवान शामिल थे। अनुशासन, तालमेल और सटीक कदमताल के साथ यह फॉर्मेशन देश की सुरक्षा तैयारियों और ऑपरेशनल क्षमता का प्रतीक बना।
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गणतंत्र दिवस समारोह का सबसे भावनात्मक क्षण तब देखने को मिला, जब ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर आधारित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया।
करीब 2,500 कलाकारों ने संगीत और नृत्य के माध्यम से इस ऐतिहासिक गीत की यात्रा को जीवंत किया। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक भारत तक ‘वंदे मातरम्’ की भूमिका को मंच पर सशक्त रूप में दर्शाया गया।
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कर्तव्य पथ पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक नृत्यों और लोक कलाओं की प्रस्तुति हुई। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे कलाकारों ने भारत की विविध सांस्कृतिक पहचान को एक मंच पर पेश किया। यह प्रस्तुति भारत की “एकता में विविधता” की भावना को मजबूती से दर्शाती नजर आई।
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सीमा सुरक्षा बल (BSF) का ऊंट बैंड परेड के दौरान खास आकर्षण रहा। ‘हम हैं सीमा सुरक्षा बल’ की देशभक्ति धुन के साथ जब सजे-धजे ऊंट कर्तव्य पथ पर आगे बढ़े, तो दर्शकों ने तालियों से उनका स्वागत किया। इस अनोखे प्रदर्शन ने बीएसएफ की सांस्कृतिक पहचान और सीमाओं पर उनकी अहम भूमिका को उजागर किया।
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भारतीय वायुसेना ने आकाश में ‘सिंदूर’ फॉर्मेशन का शानदार प्रदर्शन किया। इस फॉर्मेशन में 2 राफेल, 2 सुखोई-30 एमकेआई, 2 मिग-29, 1 जगुआर शामिल थे। यह मिश्रित फॉर्मेशन वायुसेना की आधुनिक लड़ाकू क्षमता और उच्च स्तर के समन्वय को दर्शाता है।
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परेड के दौरान भारतीय नौसेना का बैंड ‘जय भारती’ की जोशीली धुन पर मार्च करता नजर आया। बैंड की सधी हुई चाल और संगीत ने समारोह में जोश भर दिया और दर्शकों से खूब सराहना बटोरी।
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इस बार परेड में स्वदेशी एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) ध्रुव भी आकर्षण का केंद्र रहे। लंबी दूरी के रडार और दिन-रात काम करने वाले कैमरों से लैस ये हेलीकॉप्टर घने छलावरण में भी लक्ष्य पहचानने में सक्षम हैं।
इन पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का झंडा लगा था, जिसे कर्नल विजय प्रताप (सेना मेडल) ने उड़ाया।
सूर्यअस्त्र और ब्रह्मोस ने दिखाया भारत का मिसाइल सामर्थ्य
गणतंत्र दिवस परेड में भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक की झलक भी देखने को मिली।
सूर्यअस्त्र: उन्नत एंटी-रेडिएशन मिसाइल, जो दुश्मन के रडार सिस्टम को नष्ट करने में सक्षम है।
ब्रह्मोस: भारत-रूस द्वारा विकसित दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक, जो लंबी दूरी तक सटीक हमला कर सकती है।
इन प्रणालियों ने भारत की रणनीतिक ताकत और आत्मनिर्भर रक्षा नीति को रेखांकित किया।
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कर्तव्य पथ पर बख्तरबंद वाहन, तोपें, मिसाइल सिस्टम और स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं को प्रदर्शित किया गया। इसके साथ ही वायुसेना के फ्लाईपास्ट और हेलीकॉप्टर फॉर्मेशन ने भारत के सैन्य आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रही प्रगति को सामने रखा।
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समारोह के अंतिम चरण में अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों का बेड़ा कर्तव्य पथ के ऊपर से गुजरा। समन्वित फॉर्मेशन में उड़ते इन हेलीकॉप्टरों ने सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता और युद्ध तैयारियों का प्रभावशाली संदेश दिया।
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