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कोलकाता में स्टेडियम के बाहर ममता बनर्जी की डिजाइन की गई फुटबॉल मूर्ति तोड़ी गई, 2017 में लगाई गई थी प्रतिमा

राज्य की बीजेपी सरकार के खेल मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने पिछले दिनों घोषणा की थी कि उक्त प्रतिमा को स्टेडियम परिसर से हटा दिया जाएगा। प्रमाणिक ने कहा था कि यह एक विचित्र और बेढंगी प्रतिमा है, जिसमें कटे हुए पैरों पर फुटबॉल रखी हुई दिखाई गई है।

कोलकाता में स्टेडियम के बाहर ममता बनर्जी की डिजाइन की गई फुटबॉल मूर्ति तोड़ी गई, 2017 में लगाई गई थी प्रतिमा
कोलकाता में स्टेडियम के बाहर ममता बनर्जी की डिजाइन की गई फुटबॉल मूर्ति तोड़ी गई, 2017 में लगाई गई थी प्रतिमा फोटोः PTI

कोलकाता के पास साल्ट लेक स्टेडियम के वीवीआईपी गेट के बाहर स्थित एक फुटबॉल प्रतिमा को पश्चिम बंगाल सरकार के निर्देशों के बाद शनिवार सुबह ध्वस्त कर दिया गया। बताया जाता है कि प्रतिमा की डिजाइन की परिकल्पना पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की थी और इसे साल 2017 में स्टेडियम के गेट पर स्थापित किया गया था।

साल्ट लेक स्टेडियम को विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन के नाम से भी जाना जाता है। राज्य की बीजेपी सरकार के खेल मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने घोषणा की थी कि उक्त प्रतिमा को स्टेडियम परिसर से हटा दिया जाएगा। सॉल्ट लेक स्टेडियम में 17 मई को आयोजित मोहन बागान और ईस्ट बंगाल के डर्बी मुकाबले में शामिल हुए प्रमाणिक ने प्रतिमा की कड़ी आलोचना की थी।उन्होंने कहा था, “यह एक विचित्र और बेढंगी प्रतिमा है, जिसमें कटे हुए पैरों पर फुटबॉल रखी हुई दिखाई गई है। कई लोगों का मानना ​​था कि जब से इसे स्थापित किया गया था, तब से पिछली सरकार के लिए चीजें बिगड़ने लगीं।”

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खेल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के साथ परामर्श के बाद और “फुटबॉल प्रेमियों के बीच स्टेडियम परिसर की मजबूत पहचान बहाल करने” की योजनाओं के अनुरूप प्रतिमा को हटाने का फैसला लिया गया। अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया, “पूरे पश्चिम बंगाल में फुटबॉल प्रशंसकों का साल्ट लेक स्टेडियम के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव है। हमारा उद्देश्य स्टेडियम के बाहर एक सुंदर और सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक खेल प्रतीक का निर्माण करना है।”

अधिकारी के मुताबिक, ध्वस्तीकरण के बाद स्टेडियम के बाहर प्रतिमा के दोनों पैर और उन पर रखी हुई फुटबॉल बची हुई हैं। उन्होंने बताया कि पुराने ढांचे की जगह किसी प्रसिद्ध फुटबॉलर की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर पहले से ही चर्चा की जा रही है। अधिकारी के अनुसार, “हम एक ऐसा प्रतीक चाहते हैं, जो वास्तव में पश्चिम बंगाल की फुटबॉल विरासत को दर्शाता हो और युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करता हो।”

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यह प्रतिमा 2017 में साल्ट लेक स्टेडियम के नवीनीकरण के दौरान स्थापित की गई थी। इसमें धड़ का निचला हिस्सा दिखाया गया था, जिसके ‍ऊपर एक फुटबॉल रखी हुई थी, जिस पर ‘बिस्व बांग्ला’ का लोगो बनाया गया था। प्रतिमा के दोनों पैरों के ऊपर भी फुटबॉल रखी गई थी, जिनमें से एक पर ‘जॉयी’ शब्द लिखा हुआ था।

यह प्रतिमा अपनी स्थापना के बाद से ही फुटबॉल प्रशंसकों और दर्शकों के बीच बहस का विषय बनी हुई थी। कई लोगों ने देश के प्रमुख फुटबॉल स्थलों में से एक के बाहर इसकी स्थापना के औचित्य पर सवाल उठाया है। कई फुटबॉल प्रेमियों ने इस प्रतिमा को अजीब और अर्थहीन बताकर इसकी आलोचना की थी।

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मूर्ति का टूटना राज्य की राजनीति और खेल जगत दोनों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। शनिवार सुबह जब लोग स्टेडियम पहुंचे तो प्रतिमा टूटी हुई मिली। इसके बाद सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं। कुछ लोगों ने इसे लंबे समय से चले आ रहे विवाद का अंत बताया। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि इससे स्टेडियम की पुरानी पहचान खत्म हो गई।

प्रतिमा को लेकर शुरू से मतभेद रहे हैं। जनता का एक वर्ग इसे आधुनिक कला का नमूना मानता है, तो फुटबॉल प्रशंसकों के एक वर्ग का मानना है कि देश के सबसे बड़े फुटबॉल स्टेडियमों में से एक के बाहर ऐसी प्रतिमा उपयुक्त नहीं लगती। मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। मूर्ति तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान बनी थी और ममता बनर्जी द्वारा डिजाइन की गई थी। इस वजह से मूर्ति टूटने के बाद तृणमूल कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन उग्र हो सकता है। मूर्ति को तृणमूल कांग्रेस सरकार का प्रतीक भी माना जाता रहा है।

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