
केंद्र सरकार ने मंगलवार को NEET-PG 2025 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ को काफी कम कर दिया है। इस फैसले से मेडिकल कॉलेजों में 9 हजार से अधिक खाली पड़ी PG मेडिकल सीटों को भरने का रास्ता साफ हो गया है। यह निर्णय तब लिया गया है जब देश में डॉक्टरों की भारी कमी महसूस हो रही है और मेडिकल ट्रेनिंग क्षमता का एक बड़ा हिस्सा खाली पड़ा हुआ है।
संशोधित कट-ऑफ मानदंड
नए फैसले के तहत सामान्य और EWS उम्मीदवारों के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल को 50th से घटाकर 7th पर्सेंटाइल कर दिया गया है, जबकि बेंचमार्क विकलांगता वाले जनरल कैटेगरी (PwBD) के लिए यह पर्सेंटाइल 45th से घटाकर 5th कर दिया गया है। वहीं, SC, ST और OBC उम्मीदवारों के लिए पर्सेंटाइल 40 से घटाकर 0 कर दिया गया है। इसमें संबंधित कट-ऑफ स्कोर 800 में से -40 (नेगेटिव मार्किंग की वजह) तय किया गया है।
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इस बदलाव के कारण मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़ी सीटों को भरने में मदद मिलेगी। NEET-PG 2025 में कुल 2.4 लाख उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था, लेकिन उच्च कट-ऑफ के कारण हजारों सीटें खाली रह गईं। देशभर में 65,000 से 70,000 PG मेडिकल सीटें हैं, और अगर इन सीटों को भरा नहीं जाता है, तो टीचिंग अस्पतालों पर दबाव बढ़ सकता है, खासकर सरकारी संस्थानों में जहां रेजिडेंट डॉक्टरों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
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इस बदलाव की मांग इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने 12 जनवरी को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को लिखे एक पत्र में की थी। IMA ने लिखा था कि बड़ी संख्या में खाली पड़ी सीटों को भरने के लिए कट-ऑफ में संशोधन किया जाए। NBEMS के अधिकारियों ने इस पर प्रतिक्रिया दी कि प्रवेश परीक्षा का उद्देश्य मेरिट लिस्ट बनाना है, न कि उन डॉक्टरों की योग्यता का फिर से मूल्यांकन करना, जिन्होंने पहले ही MBBS और यूनिवर्सिटी परीक्षा पास की है।
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