
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को कहा कि निर्वाचन आयोग को पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर के तहत मसौदा मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद हटाए गए 58.20 लाख नामों में से अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की संख्या का खुलासा करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि 2021 में राज्य में तृणमूल कांग्रेस के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद से केंद्र द्वारा बंगाल को चुनिंदा रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि एजेंडा राज्य के लोगों को परेशान करना है।
अभिषेक बनर्जी ने कहा, "मैं 31 दिसंबर को दिल्ली में ज्ञानेश कुमार से पर्सनली मिलूंगा और एसआईआर लिस्ट की डिटेल्स पर बात करूंगा। चुनाव आयोग सही लिस्ट क्यों छिपा रहा है? आप भारत का इलेक्शन कमीशन हैं, बीजेपी का इलेक्शन कमीशन नहीं। अगर आपके पास बांग्लादेशियों की लिस्ट थी, तो लिस्ट जारी करें, नहीं तो, बंगाल के लोगों से माफी मांगें। सीमा खन्ना कौन हैं, जो चुनाव आयोग का ऐप मैनेज कर रही हैं? हमारे पास उनके चुनाव आयोग ऐप में कमियां मानने के स्क्रीनशॉट हैं। अगर हमें 31 दिसंबर तक चुनाव आयोग से जवाब नहीं मिला, तो हम आयोग का घेराव करेंगे।"
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तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ने यह भी कहा कि बंगाल की जनसंख्या 10.05 करोड़ है और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में मतदाता सूची से हटाए गए नामों की संख्या 58.20 लाख है। अभिषेक बनर्जी ने कहा, ‘‘यह जनसंख्या का मात्र 5.79 प्रतिशत है, जो उन सभी राज्यों में सबसे कम है जहां एसआईआर आयोजित किया जा रहा है।’’ उन्होंने मांग की कि निर्वाचन आयोग को हटाए गए 58.20 लाख नामों में से बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की संख्या का खुलासा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीजेपी का बांग्लादेशी-रोहिंग्या घुसपैठ का मुद्दा पूरी तरह से फेल हो गया है।
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वहीं तृणमूल कांग्रेस ने शनिवार को निर्वाचन आयोग पर आरोप लगाया कि उसने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की मदद के लिए एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से लाखों वैध मतदाताओं के नाम हटा दिए। टीएमसी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल से उनके कार्यालय में मुलाकात की और अपनी शिकायतों को सूचीबद्ध करते हुए एक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, शशि पांजा, अरूप बिस्वास, मानस भुइयां और मलय घटक शामिल थे।
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भट्टाचार्य ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम अन्य राज्यों की तुलना में बंगाल में विभिन्न नियमों और तौर-तरीकों को लागू होते देख रहे हैं। ‘अनुपस्थित, स्थानांतरित और नाम में दोहराव वाले’ मतदाताओं की जांच के नाम पर निर्वाचन आयोग ने लगभग 58 लाख वास्तविक मतदाताओं को ‘अनमैप्ड’ बताकर हटा दिया।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई बीजेपी को बार-बार खारिज करने वाले राज्य के लोगों को दंडित करने के लिए मतदाता सूची से दो करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने की बड़ी साजिश का हिस्सा लगती है।
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बिस्वास ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग द्वारा पेश किया गया मोबाइल ऐप्लिकेशन ‘अनमैप्ड’ मतदाताओं को फॉर्म छह और सात के अनुलग्नकों के माध्यम से अपेक्षित विवरण जमा करने की अनुमति नहीं देता है, जिससे वे अपने मतदान के अधिकार से वंचित हो जाते हैं। बिस्वास ने कहा, ‘‘‘जब हमने इस बारे में बताया तो अग्रवाल ने कहा कि वह शिकायत दिल्ली भेज रहे हैं।’’
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