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‘नोटबंदी’ के बाद देश ‘वोटबंदी’ का सामना कर रहा है... सचिन पायलट ने एसआईआर को बताया असंवैधानिक

पायलट ने कहा कि कानून के अनुसार तीनों निर्वाचन आयुक्तों के बीच फैसले आम सहमति या बहुमत से लिए जाने चाहिए। लेकिन ज्ञानेश कुमार ने मनमाने ढंग से मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं। एसआईआर का इस्तेमाल चुनिंदा तरीके से मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया जा रहा है।

‘नोटबंदी’ के बाद देश ‘वोटबंदी’ का सामना कर रहा है... सचिन पायलट ने एसआईआर को बताया असंवैधानिक
‘नोटबंदी’ के बाद देश ‘वोटबंदी’ का सामना कर रहा है... सचिन पायलट ने एसआईआर को बताया असंवैधानिक फोटोः IANS

सचिन पायलट ने एसआईआर को बताया असंवैधानिक

देश नोटबंदी के बाद अब वोटबंदी का सामना कर रहा है

ज्ञानेश कुमार ने लाखों मतदाताओं के नाम हटाए

कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने शुक्रवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को ‘‘असंवैधानिक’’ करार दिया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लाखों मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से हटाने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश नोटबंदी के बाद अब ‘‘वोटबंदी’’ का सामना कर रहा है।

निर्वाचन आयोग के कामकाज में पारदर्शिता नहीं

पणजी में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए हैं, जिनमें गोवा के 1.7 लाख मतदाता शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन आयोग के कामकाज में पारदर्शिता नहीं है।

पायलट ने एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली में हाल में किए गए बदलावों से मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यालय निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की पारंपरिक भूमिका को दरकिनार करते हुए सीधे नाम जोड़ने या हटाने में सक्षम हो गया है।

देश अब ‘‘वोटबंदी’’ का सामना कर रहा है

सचिन पायलट ने आरोप लगाया, ‘‘कानून के अनुसार तीनों निर्वाचन आयुक्तों के बीच फैसले आम सहमति या बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए। हालांकि, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने मनमाने ढंग से मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं।’’ उन्होंने दावा किया कि एसआईआर का इस्तेमाल चुनिंदा तरीके से मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया जा रहा है और इस प्रक्रिया की तुलना नोटबंदी से करते हुए कहा कि देश अब ‘‘वोटबंदी’’ का सामना कर रहा है।

गोवा की बीजेपी सरकार पर साधा निशाना

सचिन पायलट ने बीजेपी नीत गोवा सरकार पर भी निशाना साधते हुए कानून-व्यवस्था चरमराने का आरोप लगाया और राजनेताओं, बिल्डरों तथा भूमि सिंडिकेट के बीच गठजोड़ का दावा किया। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि राज्य की भूमि नीतियों में बार-बार बदलाव कर प्रभावशाली लोगों के हितों को लाभ पहुंचाया गया, जिससे ऐसी दोहरी कानून व्यवस्था बन गई है, जिसमें आम नागरिकों के साथ भेदभाव होता है जबकि प्रभावशाली लोगों को तरजीह दी जाती है।

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