
उत्तर प्रदेश के आगरा में श्रावण मास में ताजमहल में आरती करने के शिवसेना के ऐलान के बाद पुरातत्व विभाग की स्मारक के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा की मांग को जिला प्रशासन ने अपनी सहमति दे दी है। अधीक्षण पुरातत्वविद बसंत स्वर्णकार ने जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार को इस संबंध में पत्र लिखकर कहा है कि ताज में पहले कभी भी कोई पूजा अर्चना और महाआरती नहीं हुई है।
बता दें कि बीते दिनों शिवसेना के प्रदेश उपप्रमुख वीनू लवानिया ने कहा था कि ताजमहल, तेजो महालय है और हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है। इसको देखते हुए श्रावण मास के चारों सोमवार को ताजमहल में आरती की जाएगी। इस संबंध में पुरातत्व विभाग ने 18 जुलाई को जिलाधिकारी को लिखे पत्र में कहा था कि प्राचीन स्मारक और पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के खंड 5 (6) एवं नियम 19598 (एफ) के प्रावधानों के अनुसार, संरक्षित स्मारक में किसी भी प्रकार का धार्मिक आयोजन एवं नई परंपरा की शुरुआत करना नियमों के विरुद्ध है।
अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) क़ेपी़ सिंह ने कहा कि शहर में कानून और व्यवस्था की स्थिति को बिगाड़ने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। एएसआई के अनुरोध के अनुसार उचित व्यवस्था की जाएगी। शिवसेना के वीनू लवानिया ने 17 जुलाई को जिला प्रशासन और पुलिस को चुनौती दी कि उन्हें और उनके सहयोगियों को ताजमहल में आरती करने से रोक कर दिखाएं।
लवानिया ने कहा था, “ताजमहल एक मकबरा नहीं, बल्कि तेजो महालय है, जो भगवान शिव का मंदिर है। हम सावन के प्रत्येक सोमवार को तेजो महालय में आरती करेंगे।” आगरा सर्कल के एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद् वसंत स्वर्णकार ने कहा कि ताजमहल में कभी भी कोई आरती या पूजा नहीं की गई है। हमने जिला अधिकारियों से ताजमहल के बाहर उचित सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब दक्षिणपंथी समूहों ने ताजमहल के अंदर पूजा करने को लेकर विवाद खड़ा करने का प्रयास किया है। पिछले साल, दक्षिणपंथी संगठनों की महिलाओं के एक समूह ने ताजमहल के अंदर मस्जिद में पूजा की थी, ताकि साबित किया जा सके कि स्मारक मूलरूप से एक शिव मंदिर था। 2008 में, शिवसेना के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने ताजमहल में घुसकर, हाथ जोड़कर परिक्रमा कर धार्मिक अनुष्ठान किया था, और जब पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो वे हाथापाई पर उतारू हो गए थे, जिसके कारण पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए