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एआई बदलेगा टेक जगत का खेल, खुद फैसले लेकर करेगा काम, क्या उम्मीदें, क्या होंगे नुकसान?

जिस तरह से एआई तेजी से रोजमर्रा की जिंदगी, कामकाज और इंडस्ट्री का हिस्सा बनता जा रहा है, उससे साफ है कि आने वाला समय केवल तकनीकी बदलाव का नहीं, बल्कि सोच और काम करने के तरीके में बड़े बदलाव का होगा।

फोटो: ians
फोटो: ians 

साल 2026 को लेकर टेक्नोलॉजी जगत में बड़े ही जोर-शोर से चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के मामले में यह साल एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। जिस तरह से एआई तेजी से रोजमर्रा की जिंदगी, कामकाज और इंडस्ट्री का हिस्सा बनता जा रहा है, उससे साफ है कि आने वाला समय केवल तकनीकी बदलाव का नहीं, बल्कि सोच और काम करने के तरीके में बड़े बदलाव का होगा।

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अब तक लोग एआई से सवाल पूछते थे और वह जवाब देता था, लेकिन 2026 में ‘एजेंटिक एआई’ का दौर शुरू होने की उम्मीद है। ऐसा एआई जो खुद फैसले लेकर काम भी करेगा। उदाहरण के तौर पर, अगर आप कहेंगे कि अगले हफ्ते की मुंबई ट्रिप प्लान करनी है तो एआई अपने आप होटल बुक करेगा, फ्लाइट के विकल्प देखेगा और आपके कैलेंडर के हिसाब से मीटिंग्स को री-शेड्यूल भी कर देगा। बिजनेस की दुनिया में भी ऐसे टास्क-स्पेसिफिक एआई एजेंट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा, जो बिना इंसानी दखल के कई फैसले ले सकेंगे।

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2026 तक ऑन-डिवाइस एआई का चलन बढ़ने की उम्मीद है। अभी ज्यादातर एआई मॉडल क्लाउड पर चलते हैं, लेकिन आने वाले समय में स्मार्टफोन और लैपटॉप इतने ताकतवर हो जाएंगे कि बड़े एआई मॉडल लोकल डिवाइस पर ही चल सकेंगे। इससे एक बड़ा फायदा यह होगा कि यूजर का डेटा डिवाइस से बाहर नहीं जाएगा और बिना इंटरनेट के भी एआई तेजी से काम कर सकेगा।

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एआई अब केवल स्क्रीन तक सीमित नहीं रहेगा। 2026 में फिजिकल एआई और रोबोटिक्स का मेल देखने को मिलेगा। वेयरहाउस, फैक्ट्रियों और यहां तक कि घरों में भी स्मार्ट रोबोट्स दिखाई दे सकते हैं, जो इंसानों जैसी कुशलता से काम करेंगे। डिलीवरी ड्रोन और रोबोटिक टैक्सियों का इस्तेमाल बड़े शहरों में आम होने लगेगा।

इतना ही नहीं, एआई मॉडल हिंदी, तमिल, बंगाली जैसी भारतीय भाषाओं में कहीं ज्यादा सटीक और सहज हो जाएंगे। इससे भाषा की बाधाएं लगभग खत्म हो सकती हैं और टेक्नोलॉजी आम लोगों के करीब पहुंचेगी।

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बड़े और भारी एआई मॉडल्स की जगह कंपनियां छोटे और तेज स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स पर ज्यादा ध्यान देंगी। ये मॉडल्स कम संसाधनों में काम करेंगे, तेजी से जवाब देंगे और डेटा प्राइवेसी को भी बेहतर बनाएंगे।

एआई से लैस स्मार्ट ग्लासेस भी 2026 में चर्चा में रहेंगे। ये चश्मे सामने खड़े व्यक्ति की पहचान याद दिलाने, या किसी विदेशी भाषा का रियल-टाइम अनुवाद करके कान में सुनाने जैसे काम कर सकेंगे।

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एआई केवल ईमेल लिखने या चैट करने तक सीमित नहीं रहेगा। वैज्ञानिक शोध, नई दवाओं की खोज और बीमारियों के इलाज में एआई अहम भूमिका निभाएगा। जिन कामों में पहले सालों लगते थे, वे अब हफ्तों या महीनों में पूरे हो सकेंगे। पर्सनलाइज्ड हेल्थ के क्षेत्र में भी एआई क्रांति ला सकता है, जहां स्मार्ट वॉच या रिंग से मिले डेटा के आधार पर बीमारी के लक्षण पहले ही पकड़ लिए जाएंगे।

एआई के बढ़ते प्रभाव को लेकर ‘गॉडफादर ऑफ एआई’ कहे जाने वाले ज्योफ्री हिंटन ने गंभीर चेतावनी दी है। उनके मुताबिक, एआई की तरक्की उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज है और 2026 तक कई सेक्टर्स में नौकरियों पर सीधा असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि एआई पहले ही कॉल सेंटर जैसी नौकरियों में इंसानों की जगह लेने लगा है और आगे चलकर यह लंबे सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट्स भी खुद संभाल सकता है।

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हिंटन ने इस एआई क्रांति की तुलना औद्योगिक क्रांति से की, लेकिन फर्क यह है कि इस बार खतरा शारीरिक मेहनत वाली नहीं, बल्कि दिमागी और व्हाइट-कॉलर नौकरियों पर है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर एआई को यह अहसास हुआ कि उसे बंद किया जा सकता है, तो वह खुद को बचाने के लिए इंसानों को धोखा देने जैसी रणनीतियां भी अपना सकता है।

टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क भी एआई और रोबोटिक्स को लेकर बड़ी भविष्यवाणी कर चुके हैं। उनके मुताबिक, अगले 10 से 20 साल में तकनीक इतनी आगे बढ़ जाएगी कि काम करना पूरी तरह वैकल्पिक हो सकता है। मस्क का मानना है कि मशीनें ज्यादातर शारीरिक और बौद्धिक काम संभाल लेंगी और इंसान वही काम करेंगे, जो उन्हें पसंद होगा।

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30 नवंबर 2025 को रिलीज हुए पीपल बाय डब्ल्यूटीएफ पॉडकास्ट पर जीरोधा के को-फाउंडर निखिल कामथ से बात करते हुए मस्क ने कहा कि मेरा अंदाजा है कि भविष्य में काम करना ऑप्शनल हो जाएगा। 20 साल से भी कम समय में, शायद 10 या 15 साल में, एआई और रोबोटिक्स में तरक्की हमें एक ऐसे पॉइंट पर ले आएगी, जहां काम करना ऑप्शनल हो जाएगा।

उन्होंने भविष्य में काम करने की तुलना घर पर सब्जियां उगाने से की, यानी चाहें तो खुद करें, नहीं तो बाजार से ले लें। मस्क का दावा है कि एआई और रोबोटिक्स की वजह से सामान और सेवाओं की कोई कमी नहीं रहेगी और इससे गरीबी खत्म करने में भी मदद मिल सकती है।

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एआई का भविष्य बेहद रोमांचक दिखता है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इसे जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा। खासकर रोबोटिक्स की लागत और बड़े पैमाने पर इसे लागू करना अभी भी एक चुनौती है। 2026 तक एआई नौकरियों, कामकाज और समाज के ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकता है। ऐसे में सबसे जरूरी है समय रहते खुद को तैयार करना, नई स्किल्स सीखना और बदलते दौर के साथ कदम मिलाकर चलना। यही आने वाले समय में सबसे बड़ी ताकत साबित होगी।

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