
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए रविवार को दावा किया कि सरकार द्वारा नियुक्त पेशेवर एजेंसियां उन चुनिंदा बूथों को निशाना बना रही हैं, जहां उनकी पार्टी ने चुनाव जीता है।
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अखिलेश यादव ने पत्रकार वार्ता में कहा, ‘‘सरकार ने कुछ एजेंसियों को नियुक्त किया है जिनमें दिल्ली, लखनऊ और देशभर के अन्य स्थानों से काम कर रहे पेशेवर लोग शामिल हैं। उनके पास पूरी मतदाता सूची का डेटा उपलब्ध है और इसके माध्यम से वे उन बूथों की पहचान कर रहे हैं जहां समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की है।’’
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‘फॉर्म-सात’ का उपयोग किसी के नाम को मतदाता सूची में शामिल करने या सूची से हटाने के लिए किया जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया ने पहले ही चुनाव परिणामों को प्रभावित किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘एसआईआर के जरिए ही वे बिहार चुनाव जीतने में सफल हुए हैं। इसमें एसआईआर की अहम भूमिका रही है।’’ अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह के प्रयास जारी हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘बीजेपी पश्चिम बंगाल में भी यही करने की कोशिश कर रही है। इसलिए वहां की सरकार और मुख्यमंत्री बार-बार कह रही हैं कि निर्वाचन आयोग भाजपा का आयोग बन गया है।’’
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उच्चतम न्यायालय में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खुद पैरवी करने का जिक्र करते हुए यादव ने कहा, ‘‘उन्हें भाजपा के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में पेश होने के लिए काला कोट पहनने को मजबूर किया गया। इससे पता चलता है कि किस तरह का भेदभाव हो रहा है और निर्वाचन आयोग भाजपा का ‘सहयोगी दल’ बन गया है।’’
सपा प्रमुख ने कहा कि कई पार्टी कार्यकर्ताओं और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के ‘प्रहरियों’ ने संदिग्ध प्रपत्रों पर आपत्ति जताई थी।
उन्होंने कहा, ‘‘समय-समय पर हमारे संगठन, पीडीए के प्रहरियों और जिम्मेदार नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने हमें पहले से भरे हुए प्रपत्र सौंपे हैं।’’ अखिलेश यादव ने कुछ विशिष्ट मामलों का जिक्र भी किया गया।
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उन्होंने कहा, ‘‘दशरथ और नंदलाल से जुड़ा मामला अब सामने आया है। नंदलाल आज हमारे साथ हैं। मुझे खुशी है कि बहादुर नंदलाल हमारे साथ खड़े हैं।’’
फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप लगाते हुए अखिलेश यादव ने कहा, ‘‘यह वही नंदलाल हैं जिनके हस्ताक्षर कथित तौर पर बीजेपी द्वारा लिए गए थे। नंदलाल अंगूठे का निशान इस्तेमाल करते हैं।’’
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