
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी पर शिक्षा को 'सांप्रदायिक' नजरिये से देखने का बृहस्पतिवार को आरोप लगाया। उन्होंने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय परिसर में कई इमारतों को ध्वस्त करने के प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाते हुए उसे 'निंदनीय' करार दिया।
अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “बीजेपी को शिक्षा में भी सांप्रदायिकता नजर आती है। शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी और शिक्षा के बाद मिलने वाली नौकरी बीजेपी के एजेंडे में है ही नहीं।”
उन्होंने लिखा, “बीजेपी अपने अपंजीकृत संगी-साथियों के अवैध भवनों को कब ढहाएगी? जब संगी-साथी ही अपंजीकृत हैं, तो उनके भवनों, कार्यालयों और संस्थानों को कैसे वैध माना जा सकता है। निंदनीय!”
अखिलेश यादव की यह टिप्पणी जेल में बंद सपा नेता आजम खान की ओर से स्थापित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय परिसर की 38 इमारतों को ध्वस्त करने के रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के आदेश के एक दिन बाद आई है। आदेश में कहा गया है कि इन इमारतों का निर्माण भवन योजना को मंजूरी के बिना किया गया था।
वहीं, विश्वविद्यालय का तर्क है कि जब इमारतों का निर्माण किया गया था, तो यह इलाका आरडीए के अधिकार क्षेत्र से बाहर था। हालांकि, प्राधिकरण ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि निर्माण के समय सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन अनिवार्य था।
साल 2006 में स्थापित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय कथित भूमि अतिक्रमण और पट्टे के उल्लंघन को लेकर हाल के वर्षों में कई कानूनी विवादों के केंद्र में रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति के बड़े हिस्से को पुनः प्राप्त कर लिया है। इस साल की शुरुआत में आजम और उनके परिवार ने औपचारिक रूप से विश्वविद्यालय के शासी ट्रस्ट से किनारा कर लिया।
इससे पहले बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने विश्वविद्यालय परिसर से गुजरने वाली तीन किलोमीटर लंबी चार-लेन सड़क को सार्वजनिक सड़क घोषित कर दिया। उसने वहां साइनबोर्ड लगाते हुए कहा कि यह सड़क सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए उपलब्ध है।
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