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अखिलेश यादव बोले- SIR लोगों के लिए 'मुसीबत का सबब', चुनाव आयोग से की ये मांग

अखिलेश यादव ने कहा कि एसआईआर में कम समय में ज्यादा काम का बोझ और ऊपर से अधिकारियों द्वारा दी जाने वाली धमकियों से बीएलओ की एक बड़ी जमात बहुत परेशान, हताश है और कुछ तो अवसाद में आत्महत्या तक कर चुके हैं।

फोटो: Getty Images
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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लोगों के लिए 'मुसीबत का सबब' करार देते हुए निर्वाचन आयोग से उत्तर प्रदेश में यह कवायद पूरी करने की अवधि कम से कम तीन महीने तक बढ़ाने की मांग की है।

अखिलेश यादव ने रविवार को एक बयान में कहा कि एसआईआर लोगों के लिए 'मुसीबत का सबब' बन गया है।

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उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में एक महीने के भीतर लगभग 16 करोड़ मतदाताओं की गणना और सत्यापन संभव नहीं है। बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) पर काम का अतिरिक्त दबाव है, जिसका असर उनकी शारीरिक-मानसिक स्थिति पर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

अखिलेश यादव ने कहा कि ऐसे में निर्वाचन आयोग ने एसआईआर का समय चार दिसंबर से 11 दिसंबर तक बढ़ाकर कोई अपेक्षित काम नहीं किया है।

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उन्होंने कहा, ‘‘समाजवादी पार्टी ने एसआईआर की समयावधि तीन महीने बढ़ाने की मांग की थी। इस व्यावहारिक और उचित मांग पर निर्वाचन आयोग ने कोई ध्यान नहीं दिया। लगता है कि निर्वाचन आयोग संवेदनाशून्य हो गया है। निर्वाचन आयोग को मतदाताओं की परेशानियों से कोई लेना देना नहीं है।’’

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "इन स्थितियों में यह आशंका होती है कि निर्वाचन आयोग को अपनी साख, चुनाव की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता की परवाह नहीं रह गई है? वह भाजपा सरकार के इशारे पर काम करने वाली संस्था बन गई है।"

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अखिलेश यादव ने कहा, "निर्वाचन आयोग की अगर स्वतंत्र और निष्पक्ष ढंग से एसआईआर कराने में रूचि है तो उसे उत्तर प्रदेश के करोड़ों मतदाताओं की एसआईआर की समय सीमा कम से कम तीन महीने होनी चाहिए।"

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में एसआईआर के कारण लाखों लोग मताधिकार से वंचित रह गए। शक यही होता है कि कहीं उत्तर प्रदेश में भी होने वालों चुनावों के मद्देनजर विपक्षियों के वोट काटने की साजिश तो नहीं हो रही है? लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ यह खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता है।

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अखिलेश यादव ने कहा कि एसआईआर में कम समय में ज्यादा काम का बोझ और ऊपर से अधिकारियों द्वारा दी जाने वाली धमकियों से बीएलओ की एक बड़ी जमात बहुत परेशान, हताश है और कुछ तो अवसाद में आत्महत्या तक कर चुके हैं।

उन्होंने दावा किया कि अभी तक उत्तर प्रदेश में आधा दर्जन से ज्यादा बीएलओ की मौत हो चुकी है। दुःखद यह है कि मृतक बीएलओ को सेवामुक्त दिखाकर उनको सरकारी मदद से भी वंचित रखने की साजिशें हो रही हैं।

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समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा कि उत्तर प्रदेश के करोड़ों मतदाताओं का एसआईआर सही से हो और निर्वाचन आयोग को मतदाताओं के वोट के अधिकार की रक्षा करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार वोट डालने से वंचित न रहें इसके लिए निर्वाचन आयोग को भाजपा की किसी भी साजिश से सावधान रहना चाहिए, नहीं तो संदेह की उंगली आयोग पर भी उठेगी। इसमें कोई शक नहीं है।

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