
आपने सुब्रत रॉय सहारा का नाम तो सुना होगा। धीरूभाई अंबानी के बारे में भी आप जानते होंगे। ये दोनों उद्योग जगत के आकाश पर सूर्य और चंद्रमा के समान माने जाते हैं, और दोनों में एक बहुत बड़ी समानता पाई जाती है। सुब्रत रॉय ने जहां अपने कैरियर की शुरुआत लैम्ब्रेटा स्कूटर पर नमकीन बेचने से की थी, वहीं धीरूभाई अंबानी ने जब अपना कारोबार शुरू किया तो उनकी जेब में मात्र 500 रुपये थे। यानी दोनों ही गरीब परिवार से संबंध रखते थे, लेकिन अपनी मेहनत और बुद्धिमत्ता के दम पर सफलता का ऐसा परचम लहराया कि दुनिया देखती रह गई। औद्योगिक दुनिया में ऐसे लोगों की एक बड़ी संख्या है, जिन्होंने अपने निरंतर संघर्ष से खुद को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाया। ये लोग उद्योग जगत के आकाश पर सूर्य और चंद्रमा भले न हों, लेकिन सितारे जरूर हैं। इन सितारों में कुछ अत्यंत चमकीले हैं, तो कुछ मंद। इन्हीं सितारों में एक नाम आफताब आलम है, जिनका शॉपिंग कॉम्प्लेक्स ‘आलम मार्ट’ सफलता की एक आकर्षक कहानी समेटे हुए है।
आफताब आलम एक खुशमिजाज व्यक्तित्व के मालिक हैं। होंठों पर हमेशा मुस्कान तैरती रहती है। वह जब किसी से मिलते हैं तो हंसमुख चेहरे के साथ और अत्यंत दोस्ताना अंदाज में। अक्सर सफल कारोबारियों में घमंड का तत्व देखने को मिलता है, लेकिन आफताब आलम में ये घमंड दूर-दूर तक दिखाई नहीं देता। उनके कठोर परिश्रम का फल ‘आलम मार्ट’ दिल्ली में ओखला के जामिया नगर की शान माना जाता है। यह शॉपिंग कॉम्प्लेक्स अबुल फजल एन्क्लेव में कालिंदी कुंज रोड पर ठोकर नंबर 3 में स्थित है, जहां हर तरह के इलेक्ट्रॉनिक घरेलू सामान उपलब्ध हैं। फ्रिज, एसी, इंडक्शन, चिमनी, पंखे, कूलर, टीवी, सिलाई मशीन, मिक्सर, गैस चूल्हा, आयरन, कुकर, माइक्रोवेव, वाटर प्यूरीफायर, वॉशिंग मशीन, इन्वर्टर... घरेलू सामानों की एक बड़ी संख्या यहां दिखाई देती है, जो प्रसिद्ध और उच्च गुणवत्ता वाली कंपनियों के हैं।
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जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया, ‘आलम मार्ट’ कठोर परिश्रम और निरंतर प्रयास का फल है। यानी आफताब आलम वर्तमान समय में जिस ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं, वहां तक पहुंचने का रास्ता एक परीक्षा के समान था। आफताब बताते हैं कि 70 के दशक में उनके माता-पिता ने परिवार सहित अपने पैतृक स्थान उत्तर प्रदेश के बिजनौर से दिल्ली पलायन किया। पहली निवास-स्थली त्रिलोकपुरी रही, जहां पिता फल बेचते थे। आफताब आलम की उम्र लगभग 17 वर्ष रही होगी, जब उन्होंने आजीविका के लिए हेल्पर के रूप में काम करना शुरू किया। साथ ही उन्होंने बैटरी की सप्लाई भी शुरू की, जिसने उन्हें प्रगति का एक मार्ग दिखाया। आफताब आलम का कहना है कि उन्होंने इलेक्ट्रिशियन का काम भी सीखा हुआ है और वाहन सर्विसिंग, मरम्मत के अलावा ऑटो भी चलाया। 1997 उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ सिद्ध हुआ, जब सभी भाइयों ने मिलकर अबुल फजल में अपना घर ले लिया। यहां इन्वर्टर बैटरी का कारोबार जारी रखा और वाहन सर्विसिंग आदि में अपनी ईमानदारी से लोगों के बीच एक अलग पहचान बनाई।
‘आलम मार्ट’ की स्थापना आफताब आलम के जीवन का दूसरा महत्वपूर्ण मोड़ था। वह बताते हैं कि लगभग 11 वर्ष पहले इलेक्ट्रॉनिक घरेलू सामानों की बिक्री शुरू की। उस समय ओखला हेड पर छोटी सी दुकान थी। दिलचस्प बात यह है कि इस दुकान को शुरू करने के लिए आफताब आलम को बहुत अधिक कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने बताया कि ‘आलम मार्ट’ एक तरह से बिना पूंजी लगाए अस्तित्व में आने वाली कंपनी है। ऐसा इसलिए क्योंकि वाहन सर्विसिंग और बैटरी कारोबार में किसी पूंजी निवेश की आवश्यकता नहीं होती। इन्हीं व्यवसायों से प्राप्त धन को धीरे-धीरे इलेक्ट्रॉनिक घरेलू सामान खरीदने और बेचने में लगाया गया। ईश्वर की कृपा हुई कि सफलता मिलती चली गई और आज एक शानदार शॉपिंग कॉम्प्लेक्स अस्तित्व में आ चुका है। ओखला हेड वाली जगह छोटी पड़ गई तो ‘आलम मार्ट’ को अबुल फजल में ही ठोकर नंबर 4 पर स्थानांतरित किया गया, और फिर अधिक विस्तार की आवश्यकता पड़ी तो ठोकर नंबर 3 पर दुकान किराये पर लेकर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का रूप दे दिया गया। इस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में आफताब आलम ने आधा दर्जन से अधिक लोगों को रोजगार दिया है, साथ ही कई होम एप्लायंस और वित्त से जुड़ी कंपनियों ने भी अपने कर्मचारी यहां तैनात कर रखे हैं।
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आफताब आलम अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहते हैं कि कठिनाईयों का सामना अवश्य करना पड़ा, लेकिन कभी भी मेहनत से पीछे नहीं हटे। एक ओर अपने व्यवसाय को एकाग्रता के साथ आगे बढ़ाते रहे, और दूसरी ओर अपने बच्चों को शिक्षा से सुसज्जित कर उन्हें अच्छा जीवन दिया। उनकी बड़ी बेटी 21 वर्ष की है, जो बीबीए कर रही है। दूसरी बेटी बारहवीं की परीक्षा उत्कृष्ट अंकों से उत्तीर्ण कर चुकी है और एक बेटा (जो सबसे छोटा है) हिफ्ज करने के बाद स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रहा है। आफताब आलम इस समय 52 वर्ष के हो चुके हैं और ईश्वर के प्रति कृतज्ञ नजर आते हैं, जिसने उन्हें व्यवसाय में सफलता दी और बच्चों के बेहतर पालन-पोषण में भी सुविधा प्रदान की। इस सफलता के बाद भी वह अपना परिश्रम जारी रखे हुए हैं। वह सुबह से रात तक ‘आलम मार्ट’ में उपस्थित रहते हैं, ताकि ग्राहकों की समस्याओं का समाधान कर सकें और यदि कर्मचारियों को किसी प्रकार की कठिनाई हो तो उसका भी हल निकाल सकें। उनके भीतर की विनम्रता सराहनीय है। यह बताना रोचक होगा कि मैं अपने सहकर्मी क़ाज़ी मोहम्मद राग़िब के साथ जब ‘आलम मार्ट’ पहुंचने वाला था, तो लगभग 10 मिनट पहले फोन पर इसकी सूचना आफताब साहब को दी। जब हम दोनों वहां पहुंचे, तो अभी बैठे भी नहीं थे और चाय हाज़िर थी। इसे विनम्रता नहीं कहेंगे तो और क्या कहेंगे!
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