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वीबी-जी राम जी अधिनियम को लागू करने की घोषणा सुर्खियां बटोरने की कवायद, जिसमें मोदी सरकार माहिर: कांग्रेस

जयराम रमेश ने कहा कि यह कहने के अलावा कोई विवरण सामने नहीं आया है कि उन्हें जल्द ही जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि मनरेगा के स्थान पर लाए गए कानून को एक जुलाई, 2026 से लागू किया जाना है, तो सभी परिचालन विवरण अब तक उपलब्ध होने चाहिए थे।

वीबी-जी राम जी अधिनियम को लागू करने की घोषणा सुर्खियां बटोरने की कवायद, जिसमें मोदी सरकार माहिर: कांग्रेस
वीबी-जी राम जी अधिनियम को लागू करने की घोषणा सुर्खियां बटोरने की कवायद, जिसमें मोदी सरकार माहिर: कांग्रेस फोटोः सोशल मीडिया

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मनरेगा के स्थान पर लाए गए ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ के लागू करने को घोषणा को सोमवार को सुर्खियां बटोरने की कवायद करार दिया और आरोप लगाया कि ग्रामीण भारतीय परिवारों के काम करने के संवैधानिक अधिकार की चोरी की जा रही है।

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केंद्र सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (मनरेगा) के स्थान पर नया ‘विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) अधिनियम एक जुलाई से पूरे देश में लागू हो जाएगा।इसमें कहा गया है कि नए अधिनियम में एक नया ढांचा होगा जो ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का वैधानिक वैतनिक रोजगार देने का वादा करता है।

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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से आज की प्रेस विज्ञप्ति में कुछ ऐसा नहीं है जो पहले ज्ञात न हो। यह उस सरकार द्वारा सुर्खियां बटोरने की एक और कवायद है जो इस तरह की कवायदों में माहिर है। यह कहने के अलावा कोई विवरण सामने नहीं आया है कि उन्हें जल्द ही जारी किया जाएगा।"

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उन्होंने कहा कि यदि मनरेगा के स्थान पर लाए गए कानून को एक जुलाई, 2026 से लागू किया जाना है, तो सभी परिचालन विवरण अब तक उपलब्ध होने चाहिए थे।" रमेश के अनुसार, इन विवरण पर सार्वजनिक परामर्श और राज्य सरकारों के साथ चर्चा सार्थक तरीके से की जानी चाहिए, न कि महज औपचारिकता पूरी करने के लिए।

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उन्होंने कहा, "लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं रहना चाहिए कि जी राम जी अधिनयम द्वारा प्रदान की जाने वाली एकमात्र गारंटी अत्यधिक केंद्रीकरण और ग्रामीण श्रम की मोलभाव करने की शक्ति को कमजोर करना है। ग्रामीण भारतीय परिवारों के काम करने के संवैधानिक अधिकार और मजदूरी के अधिकार की चोरी की जा रही है।"

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