
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद आंतरिक विभाजन से जूझ रही पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी को एक और झटका लगा है। टीएमसी सांसद सुष्मिता देव ने बुधवार को पार्टी से और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके फौरन बाद देव की असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के साथ मुलाकात की तस्वीर सामने आने से उनके बीजेपी में जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।
सांसद के रूप में सुष्मिता देव के इस्तीफे को राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने स्वीकार कर लिया है। राज्यसभा सचिवालय की एक अधिसूचना के अनुसार, ‘‘पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की निर्वाचित सदस्य सुष्मिता देव ने उच्च सदन की अपनी सीट से इस्तीफ़ा दे दिया है और उनका इस्तीफ़ा राज्यसभा के सभापति ने 10 जून, 2026 से मंजूर कर लिया है।’’
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साल 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुईं सुष्मिता देव अब बीजेपी में शामिल हो सकती हैं। उन्होंने अपना इस्तीफा देने के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से मुलाकात की। सुष्मिता देव ने तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी को लेकर पूछे गए सवालों या अपने भविष्य की राजनीतिक योजनाओं पर कोई भी टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा, ‘‘यह मेरा व्यक्तिगत निर्णय है कि मैं किस तरह की राजनीति करना चाहती हूं और मेरा नेता किसे होना चाहिए। मेरे अपने कारण हैं और इसलिए मैंने यह फैसला किया है।’’
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बीजेपी में शामिल होने की अटकलों पर उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं फैसला करुंगी तो आपको जानकारी दूंगी।’’ देव ने कहा कि उन्होंने निजी और राजनीतिक कारणों से इस्तीफा दिया है और ‘‘सभी को अपनी सोच बदलने का और यह फैसला करने का अधिकार है कि वे किस तरह की राजनीति करना चाहते हैं।’’
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता संतोष मोहन देव की बेटी सुष्मिता पहले असम के सिलचर से लोकसभा सदस्य रही हैं। वह अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने आज राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा सौंपा। देव ने अपने इस्तीफे में कहा, ‘‘मैं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देती हूं, जिसे कृपया तुरंत स्वीकार किया जाए।’’
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सुष्मिता देव इस सप्ताह तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देने वाली राज्यसभा की दूसरी सदस्य हैं। इससे पहले सुखेंदु शेखर राय ने भी पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस बगावत का सामना कर रही है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कई सांसदों ने एक अलग समूह बनाने और आम आदमी पार्टी के सात सांसदों की तरह सत्ताधारी एनडीए के साथ जाने का फैसला किया है। आम आदमी पार्टी के सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया था।
इससे पहले पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से 50 से ज्यादा सदस्यों ने रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में एक अलग समूह बना लिया और बनर्जी को राज्य विधानसभा में विपक्ष का नेता चुन लिया है। उनके दावे को विधानसभा स्पीकर ने भी स्वीकार कर लिया और बनर्जी को नेता विपक्ष की मान्यता दे दी।
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