
जयराम रमेश ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर मोदी सरकार की जांच पर कई सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि CCTV में चढ़ावा चोरी की 105 घटनाएं सामने आने के बावजूद सिर्फ आठ लोगों को आरोपी बनाया गया।
कांग्रेस महासचिव ने ₹79.85 लाख की बरामदगी और चंपत राय व अनिल मिश्रा को आरोपी के बजाय गवाह बनाए जाने पर सवाल किया।
उन्होंने 4 जून से 25 जून के बीच हुई 21 दिन की देरी का पूरा सच सामने रखने की मांग की है।
कांग्रेस पार्टी ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अपने एक्स पोस्ट में इसे ‘चंदा चोरी, आस्था से धोखा’ बताते हुए पूछा कि भगवान श्रीराम के मंदिर में चढ़ावे की चोरी करने वालों के प्रति सरकार इतनी नरमी क्यों बरत रही है।
जयराम रमेश ने कहा कि सरकार विपक्षी नेताओं के खिलाफ ED और CBI के इस्तेमाल से पीछे नहीं हटती, लेकिन राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की 105 घटनाएं CCTV में कैद होने के बाद भी जांच उन लोगों तक क्यों नहीं पहुंची, जिन पर चोरों को बचाने का संदेह है और जो व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार थे।
जयराम रमेश ने सवाल किया कि 105 चोरी की घटनाओं के बावजूद मामले में सिर्फ आठ आरोपी कैसे हो सकते हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि 105 घटनाओं से सिर्फ ₹79.85 लाख की बरामदगी के बाद मामले को बंद करने की इतनी जल्दी क्यों है।
उन्होंने चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपी बनाए जाने के बजाय गवाह बनाए जाने पर भी सवाल उठाया। जयराम रमेश ने पूछा कि आखिर ऐसा क्यों है और क्या जांच का मकसद केवल चढ़ावा चोरी करने वाले छोटे आरोपियों तक सीमित रखना था या उन लोगों की जवाबदेही तय करना भी था, जिनकी निगरानी में यह सब चलता रहा।
कांग्रेस महासचिव ने 4 जून से 25 जून के बीच हुई घटनाओं के क्रम को लेकर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक, चोरी की रकम का वीडियो 4 जून को चंपत राय तक पहुंचा, 5 जून को CCTV फुटेज की समीक्षा की गई और 25 जून को FIR दर्ज हुई। उन्होंने पूछा कि इन 21 दिनों की देरी का पूरा सच देश के सामने क्यों नहीं रखा गया।
जयराम रमेश ने यह भी सवाल किया कि इतनी सारी घटनाएं उच्च स्तर की मिलीभगत, लापरवाही या संरक्षण के बिना कैसे हो सकती हैं। उन्होंने पूछा कि अगर 105 घटनाएं सामने आईं तो चोरी की कुल रकम अब तक क्यों नहीं पता है और जांच खत्म करने की इतनी जल्दी क्यों की जा रही है।
जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस शुरुआत से ही मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच की मांग करती रही है। उन्होंने कहा कि चढ़ावा भगवान राम के नाम पर दिया गया था और 105 घटनाओं के बाद भी अगर चोरी की कुल रकम का पता नहीं है, तो जांच खत्म करने की जल्दबाजी क्यों है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले पर चुप्पी तोड़ने की मांग करते हुए पूछा कि सरकार चढ़ावा चोरी करने वालों तक पहुंचना चाहती है या उन सवालों को दबाना चाहती है, जो बड़े जिम्मेदार लोगों तक पहुंच सकते हैं। जयराम रमेश ने कहा कि अब देश जानना चाहता है कि चढ़ावे की चोरी के लिए जवाबदेही कब तय होगी।
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