
तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में दो चरण में विधानसभा चुनाव कराए जाने को ज्यादा तवज्जो न देते हुए रविवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने चरणों की संख्या अपने राजनीतिक आकाओं की जरूरतों के अनुसार तय की।
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पार्टी ने सवाल उठाया कि 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान कोविड-19 महामारी फैली होने के बावजूद आयोग ने आठ चरण में चुनाव कराया था जबकि इस बार केवल दो चरण में चुनाव कराने का फैसला किया है। टीएमसी के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा, “चरणों की संख्या बीजेपी की इच्छा को दर्शाती है और निर्वाचन आयोग ने अपने राजनीतिक आकाओं की जरूरतों के अनुसार काम किया है।”
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निर्वाचन आयोग ने रविवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित करते हुए बताया कि राज्य में 23 और 29 अप्रैल को दो चरण में मतदान होगा। चक्रवर्ती ने कहा, “2021 में जब लोग कोविड संक्रमण से मर रहे थे, तब राज्य में आठ चरण में चुनाव कराए गए और अब जब ऐसी कोई बीमारी नहीं है, तो केवल दो चरणों में चुनाव कराने का निर्णय क्यों लिया गया? चुनावों के चरणों की संख्या मायने नहीं रखती, लोग बीजेपी को हर हाल में परास्त कर देंगे।”
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने दो चरण में चुनाव कराने के फैसले का स्वागत किया, लेकिन साथ ही सवाल किया कि क्या मतदाता बिना डर और दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाएंगे। पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि उन्होंने हाल ही में आयोग की पूर्ण पीठ के साथ बातचीत में मतदाताओं को डराने और धमकाए जाने का मुद्दा उठाया था।
उन्होंने कहा, “मैं पश्चिम बंगाल में दो चरण में चुनाव कराने के निर्वाचन आयोग के फैसले का स्वागत करता हूं। लेकिन मेरी एकमात्र चिंता यह है कि क्या मतदाता स्वतंत्र रूप से और बिना किसी भय के मतदान कर सकेंगे।” उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चुनावों में कई बार ऐसा हुआ कि कई चरण में चुनाव होने के बावजूद भी मतदाता वोट नहीं डाल पाए।
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