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बिहार बाढ़ अपडेट: 22.42 लाख लोग प्रभावित, गंगा ने तोड़ा 2016 का रिकॉर्ड, 3 स्टेशनों पर बाढ़ का खतरा बेहद गंभीर

बिहार में 22.42 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। पटना में गंगा ने 2016 का रिकॉर्ड तोड़ा है, जबकि कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

फोटो: IANS
फोटो: IANS 

बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य के 12 जिलों में 22.42 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं और कई इलाकों में गांव के गांव पानी से घिर गए हैं। राजधानी पटना, छपरा, भागलपुर, मुंगेर, खगड़िया और कटिहार समेत कई जिलों में हालात बिगड़े हुए हैं। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर पहुंच गया है, जिसने 2016 में दर्ज 50.52 मीटर के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इसके बाद पटना के कई मोहल्लों में पानी घुस गया है। गंगा के साथ कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती समेत कई नदियां उफान पर हैं।

गंगा ने तोड़ा रिकॉर्ड, 3 जगह बाढ़ को लेकर बड़ा अलर्ट

सेंट्रल वॉटर कमीशन (CWC) ने बिहार के तीन फ्लड फोरकास्टिंग स्टेशनों, पटना के गांधीघाट, हाथीदह और पंडारक, पर अत्यधिक बाढ़ की चेतावनी जारी की है। हाथीदह में गंगा खतरे के निशान 41.76 मीटर से लगातार ऊपर बह रही है और आज सुबह यहां जलस्तर 43.52 मीटर दर्ज किया गया। हाथीदह में गंगा रात 11 बजे 2021 के रिकॉर्ड स्तर तक भी पहुंच गई थी। CWC के मुताबिक बिहार में गंगा की मुख्य धारा में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की नदियों के साथ बिहार की उत्तरी सहायक नदियों से भी बड़ी मात्रा में पानी आ रहा है। इसके चलते बक्सर, सारण, वैशाली, खगड़िया, मुंगेर और भागलपुर में 8 अगस्त तक जलस्तर स्थिर रहने या बढ़ने और सामान्य से लेकर गंभीर बाढ़ की स्थिति बने रहने की संभावना है।

राज्य में कई दूसरी नदियां भी खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। गंडक डुमरियाघाट और हाजीपुर में, कोसी बलतारा और कुरसेला में, बूढ़ी गंडक खगड़िया में, गंगा बक्सर, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर में, पुनपुन श्रीपालपुर में, घाघरा दरौली में और बागमती बेनीबाद में खतरे के निशान से ऊपर है। भारी बारिश के बाद गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) से भी ऊपर चला गया है। अधिकारियों को आशंका है कि अगले एक से तीन दिनों में इसका असर पटना और हाथीदह समेत दूसरे स्टेशनों पर भी पड़ सकता है।

कहीं तटबंध टूटा, कहीं हजारों घर डूबे

बाढ़ ने कई इलाकों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। छपरा के दरियापुर में माही नदी का तटबंध करीब 20 फीट टूट गया, जिसके बाद कई गांव जलमग्न हो गए। भागलपुर के अकबरनगर में रिंग बांध ओवरफ्लो होने से सुल्तानगंज की 9 पंचायतों के करीब 4 हजार घर पानी में डूब गए हैं। पटना सिटी के कई मोहल्लों में भी पानी घुस गया है, जबकि पुनपुन नदी के आसपास के कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं।

बाढ़ का असर रेल परिचालन पर भी पड़ा है। मध्य पूर्व रेलवे ने बताया कि पटना-गया रेलखंड पर पुनपुन और परसा बाजार स्टेशनों को जोड़ने वाले पुल संख्या 21 पर पानी का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है। इसके चलते कुछ ट्रेनों को रद्द किया गया है, जबकि कुछ के मार्ग में बदलाव किया गया है। राज्य के पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय और अरवल में करीब 22.42 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।

राहत-बचाव में 190 सामुदायिक रसोई, 1,429 नावें तैनात

प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए अलग-अलग जिलों में 190 सामुदायिक रसोई चलाई जा रही हैं। लोगों को सुरक्षित निकालने और बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवाजाही बनाए रखने के लिए 1,429 नावों की सेवा ली जा रही है। इसके अलावा राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की 27 और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 10 टीमें अलग-अलग जिलों में तैनात हैं।

जल संसाधन विभाग की नई एडवाइजरी में चेतावनी दी गई है कि हाथीदह में गंगा का जलस्तर अपने पिछले HFL को पार कर सकता है। इसके मद्देनजर बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार में सतर्कता बढ़ाई गई है। अधिकारियों और जमीनी कर्मचारियों को जलस्तर, तटबंधों, संवेदनशील स्थानों और निचले इलाकों पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। इंजीनियरों को बाढ़ से निपटने के लिए संसाधन और मशीनरी तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों को नदी के पास नहीं जाने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है। स्थानीय प्रशासन से नावों के संचालन पर नजर रखने, क्षमता से ज्यादा लोगों को नाव पर नहीं बैठाने और लोगों को लगातार स्थिति की जानकारी देने को कहा गया है।

विपक्ष ने राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की

स्थानीय मौसम विज्ञान कार्यालय के अधिकारी ने अगले दो दिनों में बिहार के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में पहले से बाढ़ की मार झेल रहे इलाकों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

इस बीच बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार की बाढ़ को ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि राज्य का 76 प्रतिशत इलाका बाढ़ से प्रभावित है और 19 जिलों के 20 लाख लोग इसकी चपेट में हैं। तेजस्वी यादव ने कहा कि 20 लाख से ज्यादा लोग इस आपदा में फंसे हैं, पशुपालकों के मवेशी पानी में डूबकर बह गए हैं और सार्वजनिक ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने हजारों करोड़ रुपये की जान-माल की क्षति का भी दावा किया। तेजस्वी ने बिहार सरकार पर बाढ़ पीड़ितों की मदद में उदासीनता का आरोप लगाते हुए केंद्र से बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और बिहार के लिए 5,000 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता देने की मांग की है।

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