
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन शुरु होने से पहले आखिरकार बीजेपी ने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। कुल 189 उम्मीदवारों की लिस्ट में 52 नए चेहरे हैं, जिसके बाद पार्टी में बगावत शुरु हो गई है। मुसलमानों को रिझाने के दावों के बावजूद पहली लिस्ट में किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार का नाम नहीं है। वहीं राज्य की विभिन्न जातियों और खासतौर से ओबीसी को साधने के लिए किए गए सियासी प्रयोगों की झलक पहली लिस्ट से मिलती है।
बीजेपी उम्मीदवारों की पहली लिस्ट में कुल 189 उम्मीदवारों में 52 नए चेहरे हैं। इसके अलावा जातिगत समीकरणों को देखें तो पहली लिस्ट में 32 ओबीसी उम्मीदवार, 30 अनुसूचित जाति यानी एससी, 16 अनुसूचित जनजाति यानी एसटी उम्मीदवार हैं। उम्मीदवारों की इस सूची में कुल 8 महिलाओं, 5 वकीलों और 9 डॉक्टरों के नाम हैं।
Published: undefined
जो सूची सामने आई है उसमें मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को फिर से शिगगांव से उम्मीदवार बनाया गया है। इसी तरह आर अशोक को कनकपुर से मैदान में उतारा गया है। इस सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डी के शिवकुमार मैदान में हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी के मुकाबले बीजेपी ने सी पी योगेश्वर को चन्नापटना से टिकट दिया है। योगेश्वर को पद्मनाभनगर से भी मैदान में उतारा गया है। इसी तरह पूर्व सीएम बी एस येदियुरप्पा के बेटे को शिकारपुर से टिकट मिला है।
Published: undefined
बड़े नाम कहां से लड़ेंगे चुनाव?
जो लिस्ट सामने आई है, उसके मुताबिक मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को एक बार फिर शिगगांव से टिकट दिया गया है. इसी तरह आर अशोक को कनकपुर से टिकट दिया
बीजेपी ने कई मौजूदा विधायकों को ठेंगा दिखा दिया है। पूर्व डिप्टी सीएम लक्ष्मण सवाडी का अथनी से टिकट कट गया है। वहीं जगदीश शेट्टार का नाम भी लिस्ट में नहीं है। माना जा रहा है कि उनका पत्ता भी कट गया है। पहली लिस्ट में किसी मुस्लिम उम्मीदवार का नाम नहीं है।
Published: undefined
Published: undefined
बीजेपी की लिस्ट सामने आते ही पार्टी में बगावत भी शुरु हो गयी है। पहली लिस्ट में नाम होने से गुस्साए बीजेपी के वरिष्ठ नेता और हुबली-धारवाड़ से 6 बार के विधायक रहे जगदीश शेट्टार ने कहा है कि पार्टी आलाकमान को अपने फैसले पर फिर से विचार करना होगा। उन्होंने ऐलान किया है कि वे चुनाव तो हर हाल में लड़ेंगे।
देर शाम पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि, उन्हें इस संबंध में आलाकमान से आखिरी समय पर एक फोन आया था। उन्होंने कहा कि मैं बहुत निराश हूं। मैंने तीन दशकों से अधिक समय तक पार्टी के लिए काम किया है और इसे बनाने में मदद की है। उन्होंने कहा कि, “अगर उन्होंने मुझे 2-3 महीने पहले सूचित किया होता तो मैं मान जाता। लेकिन मैंने पहले ही चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है और नामांकन दाखिल करने से कुछ दिन पहले ही मुझे चुनाव न लड़ने के लिए कह दिया गया है।“ उन्होंने आगे कहा कि जब उन्होंने मुझसे चुनाव न लड़ने को कहा, तो मैंने उनसे अपने फैसले पर फिर से विचार करने को कहा, लेकिन मैंने साफ कर दिया कि मैं किसी भी कीमत पर चुनाव लड़ूंगा।“
बता दें कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया 13 अप्रैल से 20 अप्रैल तक चलेगी। 10 मई को वोटिंग होगी और 13 मई को नतीजों का ऐलान होगा।
(आईएएनएस इनपुट के साथ)
Published: undefined
Google न्यूज़, व्हाट्सएप, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia
Published: undefined