
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को बीजेपी को ‘‘उपद्रवियों की पार्टी’’ करार दिया और उस पर विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में रामनवमी रैलियों के दौरान हिंसा भड़काने का आरोप भी लगाया।
ममता बनर्जी के बाद टीएमसी के दो नंबर के नेता अभिषेक बनर्जी ने बीरभूम जिले के लाभपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि बंगाल के लोग पारंपरिक रूप से सभी त्योहारों को सौहार्दपूर्वक मनाते आए हैं। उन्होंने कहा, “क्या आपने दुर्गा पूजा, काली पूजा, जगद्धात्रि पूजा, ईद, छठ पूजा, क्रिसमस या जैन समुदाय द्वारा निकाली जाने वाली यात्राओं के दौरान किसी उपद्रव या झड़प की कोई घटना सुनी है? तो फिर रामनवमी जैसे पवित्र अवसर का उपयोग वे (बीजेपी) हिंसा और अराजकता पैदा करने के लिए क्यों कर रहे हैं?
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चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के कुछ हिस्सों में शुक्रवार को उस वक्त तनाव फैल गया, जब रामनवमी जुलूस के दौरान झड़पें हुईं। कई स्थानों से पथराव, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएँ रिपोर्ट हुईं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि रघुनाथगंज और जंगीपुर क्षेत्रों में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि अब तक हिंसा के संबंध में 30 लोग गिरफ्तार किए गए हैं।
डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद ने बिना किसी घटना का उल्लेख किए आरोप लगाया कि बीजेपी का मतलब ‘‘उपद्रवी’’ (होना) है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी और इसके सहयोगी संगठन रामनवमी के जुलूसों में गुंडों को लाते हैं, जो तलवारें लहराते हैं और सार्वजनिक रूप से शराब पीते हैं।
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डायमंड हार्बर के सांसद ने लाभपुर रैली में कहा, ‘‘केवल रामनवमी के दौरान ही हिंसा की रिपोर्ट क्यों होती है? बंगाल में त्योहारों के अवसर पर सद्भाव और सौहार्द की परंपरा है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या के लोग 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को खारिज कर चुके हैं, यद्यपि उन्होंने धर्म आधारित राजनीति की थी। उन्होंने आश्वस्त किया कि बीजेपी को बंगाल और अन्य चुनावी राज्यों में भी यही नतीजा भुगतना होगा।
अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि उसने राज्य के लोगों को “एसआईआर की कतारों में खड़ा होने के लिए मजबूर करके” और “लाखों असली मतदाताओं के नाम हटाकर” परेशानी में डाल दिया है। उन्होंने सवाल किया, “बीजेपी नेता एसआईआर के नाम पर बंगाल के लोगों को धमकी क्यों दे रहे हैं?’’ उन्होंने बाहरी जमींदारों को जनता को परेशान करने के लिए सबक सिखाने का आह्वान किया।
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बनर्जी ने दावा किया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने सत्ता में रहते हुए असम, बिहार और त्रिपुरा में महिलाओं, युवाओं, वृद्धों और समाज के अन्य वर्गों के लिए विकासात्मक पहल शुरू नहीं की, जबकि तृणमूल सरकार ने बंगाल में यह काम किया। केंद्र पर बंगाल में गरीबों के लिए आवास योजनाओं के लिए एक पैसा भी मंजूर न करने का आरोप लगाते हुए बनर्जी ने कहा, “हालांकि उन्होंने (केंद्र सरकार ने) 10 पैसे भी मंजूर नहीं किए लेकिन हम अगले छह महीनों में राज्य के हर व्यक्ति के सिर पर छत सुनिश्चित करेंगे।”
रैली समाप्त होने और अभिषेक बनर्जी के मंच से उतरने के तुरंत बाद, मंच के एक किनारे आग लग गई, लेकिन इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। एक अधिकारी ने बताया कि जैसे ही मंच को आग ने अपनी चपेट में लिया, मौके पर तैनात दमकलकर्मियों ने आग पर जल्दी काबू कर लिया। उन्होंने बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।
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