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बजट 2026 : अनाज पैदा करने वाले किसानों की अनदेखी, एमएसपी पर चुप्पी, अन्नश्री कहे गए बाजरे का तो जिक्र तक नहीं

बजट में एमएसपी की कानूनी गारंटी की पर कुछ नहीं कहा गया है। इसकी मांग सालों से देश भर में किसानों के आंदोलनों के केंद्र में रही है। साफ है कि सरकार ऐसे छोटे और सीमांत किसानों ध्यान देने को तैयार नहीं है, जो अस्थिर बाजारों में पक्की खरीद पर निर्भर हैं।

फाइल फोटो (Getty Images)
फाइल फोटो (Getty Images) NARINDER NANU

केंद्रीय बजट 2026-27 कृषि में बदलाव की तस्वीर का दावा करता है, लेकिन गौर से देखने पर पता चलता है कि सरकार की प्राथमिकताएं धीरे-धीरे उन किसानों से दूर होती जा रही हैं जो देश का मुख्य अनाज उगाते हैं। वित्त मंत्री ने "हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर", पशुधन, मत्स्य पालन और खास फसलों पर तो काफी जोर दिया है, लेकिन ज़्यादातर किसानों की चिंताएं उनके भाषण से गायब रहीं।

बजट में घोषित नई पहलें नारियल, कोको, काजू, पहाड़ी इलाकों के मेवे, मखाना, प्राकृतिक रेशे और हाइब्रिड बीजों पर केंद्रित हैं। वित्त मंत्री की घोषणाएं भारत-विस्तार एआई प्लेटफॉर्म जैसे तकनीक-आधारित पहल बाजार एकीकरण और महत्व बढ़ाने का उद्देश्य तो दिखाती हैं, लेकिन भारत के कृषि कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा माने जाने वाले गेहूं, धान, दालों और अन्य खाद्यान्नों पर निर्भर किसान इन घोषणाओं में काफी हद तक अनदेखे रह गए हैं।

अहम बात यह है कि बजट में  न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी की लंबे समय से चली आ रही मांग पर कुछ नहीं कहा गया है। यह एक ऐसी मांग है जो सालों से देश भर में किसानों के आंदोलनों के केंद्र में रही है। यहां तक ​​कि एक सांकेतिक जिक्र भी न होना यह संकेत देता है कि सरकार ऐसे छोटे और सीमांत किसानों के लिए आय सुरक्षा पर ध्यान देने को तैयार नहीं है, जो अस्थिर बाजारों में जीविका के लिए पक्की खरीद पर निर्भर हैं।

यह बदलाव इस बात से भी साफ है कि किन चीज़ों का जिक्र भाषण में नहीं किया गया है। बाजरा, जिसे कभी "श्री अन्न" के तौर पर ज़ोर-शोर से बढ़ावा दिया गया था और जलवायु-अनुकूल फसल के रूप में दिखाया गया था, इस साल उसका कोई खास ज़िक्र नहीं हुआ। उन किसानों के लिए जिन्होंने पहले की नीति के संकेतों पर ध्यान दिया था और बाजरे की खेती शुरू की थी, उनके लिए यह चुप्पी निराश करने वाली है।

बजट में कृषि क्षेत्र का आवंटन इस चिंता को और बढ़ाता है। कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों पर खर्च पिछले साल के बजट अनुमानों की तुलना में सिर्फ़ 2.41% बढ़ा है, वह भी ऐसे समय में जब सरकार 7% से ज़्यादा की कुल आर्थिक ग्रोथ का अनुमान लगा रही है। असल में, कृषि क्षेत्र से बहुत कम संसाधनों में ज़्यादा काम करने की उम्मीद की जा रही है।

किसान नेता डॉ. सुनीलम ने बढ़ती निराशा को बताते हुए कहा, "सरकार किसानों की इनकम दोगुनी करने का अपना वादा भूल गई है। असल में, किसानों को अब पहले की इनकम का आधा ही मिल रहा है।" यह बजट, जो इनोवेशन पर ज़्यादा और इनकम की गारंटी पर कम ध्यान देता है, इस डर को सही साबित करता दिख रहा है।

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