
महाराष्ट्र में मुंबई समेत 29 नगर निकायों के लिए होने वाले महत्वपूर्ण चुनाव के लिए प्रचार अभियान मंगलवार शाम को समाप्त हो गया। सभी की निगाहें मुंबई में बीएमसी के लिए होने वाले बड़े मुकाबले पर टिकी हैं, जहां बीजेपी के नेतृत्व वाला महायुति ठाकरे बंधुओं की चुनौती का सामना कर रहा है।
सभी 29 नगर निकायों के 893 वार्ड में फैली 2,869 सीटों के लिए मतदान 15 जनवरी को सुबह 7.30 बजे शुरू होगा और शाम 5.30 बजे संपन्न होगा। कुल 3.48 करोड़ पात्र मतदाता 15,931 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे, जिनमें मुंबई के 1,700 और पुणे के 1,166 उम्मीदवार शामिल हैं। मतगणना 16 जनवरी को होगी।
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सभी 29 नगर निकायों के चुनाव छह साल से अधिक समय के बाद हो रहे हैं जिनका कार्यकाल 2020 और 2023 के बीच समाप्त हुआ था। इनमें से नौ मुंबई महानगर क्षेत्र में हैं। चुनावी संग्राम में छत्रपति संभाजीनगर, नवी मुंबई, वसई-विरार, कल्याण-डोंबिवली, कोल्हापुर, नागपुर, मुंबई, सोलापुर, अमरावती, अकोला, नासिक, पिंपरी-चिंचवड, पुणे, उल्हासनगर, ठाणे, चंद्रपुर, परभणी, मीरा-भायंदर, नांदेड़-वघाला, पनवेल, पांडे भिवंडी-निजामपुर, लातूर, मालेगांव, सांगली-मिराज-कुपवाड, जलगांव, अहिल्यानगर, धुले, जालना और इचलकरंजी शामिल हैं।
नगर निकाय चुनाव के दौरान शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल बनाए रखने के लिए पूरे महाराष्ट्र में पुलिस ने व्यापक सुरक्षा बंदोबस्त किया है। मुंबई में बीएमसी चुनाव में मतदान और मतगणना के दिन मुंबई भर में सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात रहेगा। इसमें 25000 पुलिस जवानों समेत बड़ी संख्या में सीनियर अधिकारी भी शामिल रहेंगे। 10 एडिशनल पुलिस कमिश्नर और 33 डीसीपी तैनात रहेंगे। इसके अलावा 84 एसीपी और 3000 से अधिक अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहेंगे।
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए चुनाव प्रचार का नेतृत्व किया और महायुति उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करने के वास्ते पूरे राज्य का दौरा किया। पर्यवेक्षकों का कहना है कि महायुति गठबंधन में तीसरी सहयोगी और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को रणनीतिक रूप से बाहर रखा गया है, ताकि ‘‘गैर-हिंदू’’ मतदाताओं को आकर्षित किया जा सके।
वहीं बीस साल पहले अलग हुए चचेरे भाई उद्धव और राज ठाकरे मराठी मतों को एकजुट करने के प्रयास के तहत चुनाव से ठीक पहले फिर से एकजुट हुए हैं। वर्ष 2022 में विभाजित हुई शिवसेना के लिए बीएमसी का यह पहला चुनाव होगा। एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद शिवसेना को विभाजन का सामना करना पड़ा था। अविभाजित शिवसेना ने देश के सबसे धनी नगर निकाय पर 25 वर्षों तक शासन किया।
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एनसीपी के प्रतिद्वंद्वी गुटों ने भी पुणे, पिंपरी-चिंचवाड और परभनी के नगर निकाय चुनावों के लिए हाथ मिला लिया। वहीं, कांग्रेस ने मुंबई में महा विकास अघाडी के अपने सहयोगी दलों- शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) की छाया से बाहर निकलकर इस चुनाव में एक मजबूत छवि पेश की है। कांग्रेस ने मुंबई में प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन अघाडी (वीबीए) और राष्ट्रीय समाज पक्ष के साथ गठबंधन किया है, जबकि नागपुर में उसने अकेले चुनाव लड़ने का विकल्प चुना है।
तेलंगाना के मंत्री मोहम्मद अज़हरुद्दीन, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और बीजेपी की तमिलनाडु इकाई के नेता के. अन्नामलाई चुनाव के लिए स्टार प्रचारक थे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने राज्य भर में अपने-अपने उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया, जबकि ठाकरे बंधुओं ने मुंबई, ठाणे, नासिक और छत्रपति संभाजीनगर पर ध्यान केंद्रित किया।
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मुंबई में सीटों के अंतिम बंटवारे के अनुसार, बीजेपी 137 सीट पर और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 90 सीट पर चुनाव लड़ रही है। वहीं, एनसीपी 94 सीट पर अलग से चुनाव लड़ रही है। शिवसेना (यूबीटी) ने 163 उम्मीदवार, एमएनएस ने 52, कांग्रेस ने 143 और वीबीए ने 46 उम्मीदवार उतारे हैं। कांग्रेस ने राज्य के शेष हिस्सों में 1,263 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।
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